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History of India
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माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) और भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. माउंटबेटन योजना के तहत बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं को भारत या पाकिस्तान में से किसी एक को चुनने का अधिकार दिया गया था, जिसके तहत दोनों प्रांतों के मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों ने जनमत संग्रह के माध्यम से पाकिस्तान के साथ जाने का निर्णय लिया।
- 2. ब्रिटिश संसद में प्रस्तुत भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के अनुसार, 15 अगस्त 1947 को भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन (Dominions) के सृजन का प्रावधान किया गया तथा दोनों देशों के लिए भारत सरकार अधिनियम, 1935 को अंतरिम संविधान के रूप में तब तक लागू रखने की अनुमति दी गई जब तक कि उनके नए संविधान नहीं बन जाते।
- 3. इस योजना के अंतर्गत रियासतों (Princely States) के पास यह विकल्प छोड़ा गया कि वे अपनी भौगोलिक स्थिति और जनसांख्यिकीय बनावट को ध्यान में रखते हुए या तो भारत या पाकिस्तान में शामिल हो सकती हैं, अथवा अपने स्वतंत्र अस्तित्व को बनाए रख सकती हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि बंगाल और पंजाब की विधानसभाओं में मतदान के द्वारा प्रांतों का विभाजन हुआ था, लेकिन पंजाब के मामले में पश्चिमी पंजाब (मुस्लिम बहुसंख्यक) पाकिस्तान में गया और पूर्वी पंजाब भारत में रहा, जबकि बंगाल में भी पश्चिमी बंगाल भारत में और पूर्वी बंगाल पाकिस्तान में शामिल हुआ; यहाँ जनमत संग्रह (Referendum) केवल उत्तर-पश्चिम सीमांत प्रांत (NWFP) और सिलहट में कराया गया था, न कि पूरे बंगाल व पंजाब के जिलों में। कथन 2 बिल्कुल सही है क्योंकि भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947 के तहत 15 अगस्त 1947 को दो स्वतंत्र डोमिनियन बने और जब तक नया संविधान नहीं बना, तब तक शासन संचालन के लिए भारत सरकार अधिनियम 1935 को अंतरिम रूप से अपनाया गया। कथन 3 भी सही है क्योंकि माउंटबेटन योजना और स्वतंत्रता अधिनियम के अंतर्गत रियासतों को भारत या पाकिस्तान में शामिल होने अथवा स्वतंत्र रहने का विकल्प दिया गया था, जिसे बाद में सरदार वल्लभभाई पटेल की दृढ़ इच्छाशक्ति और 'इंस्ट्रूमेंट ऑफ़ एक्सेशन' के माध्यम से हल किया गया। इस ऐतिहासिक घटनाक्रम के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के परिणाम और भारत सरकार अधिनियम 1858 (क्वीन विक्टोरिया की घोषणा) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत सरकार अधिनियम 1858 के द्वारा भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की दोहरी शासन प्रणाली को समाप्त कर दिया गया और 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) के पद का सृजन किया गया, जिसे सहायता के लिए 15 सदस्यीय परिषद प्रदान की गई।
2. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जिसे इलाहाबाद दरबार में 1 नवंबर 1858 को लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया था) में यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियाسतों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी, उनके दत्तक पुत्र लेने के अधिकारों (Doctrine of Lapse को समाप्त करते हुए) को मान्यता दी जाएगी, तथा ब्रिटिश भारत के लोगों के साथ नस्ल, धर्म या जन्म के आधार पर सरकारी नौकरियों में कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा।
3. इस अधिनियम और महारानी की घोषणा के पश्चात ब्रिटिश सेना की नीति में यह आमूल-चूल परिवर्तन किया गया कि बंगाल की सेना में उच्च जातियों के सैनिकों (विशेषकर अवध के ब्राह्मणों और राजपूतों) के अनुपात को कम किया गया, तथा सिख, गोरखा और पठानों जैसी जातियों को 'मार्शल रेस' (लड़ाकू नस्ल) घोषित कर सेना में उनकी संख्या बढ़ाई गई।
4. विद्रोह के दमन के तुरंत बाद ब्रिटिश संसद ने भारतीय जनता को यह पूर्ण अधिकार प्रदान कर दिया कि वे देश के सर्वोच्च विधायी निकायों (विधान परिषदों) में अपने निर्वाचित प्रतिनिधियों को भेजकर ब्रिटिश नीतियों के विरुद्ध कानून निर्माण में संशोधन की मांग कर सकते हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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गांधी-इरविन समझौता (5 मार्च 1931) और उसके पश्चात हुए घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान राजनीतिक कैदियों (हिंसा के आरोपियों को छोड़कर) को रिहा करने तथा समुद्र तट के पास नमक बनाने की अनुमति देना स्वीकार किया था।
2. कांग्रेस ने कराची अधिवेशन (1931) में गांधी-इरविन समझौते का अनुमोदन किया और महात्मा गांधी को द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए एकमात्र कांग्रेस प्रतिनिधि के रूप में नामित किया।
3. लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर उत्पन्न गहरे मतभेद और डॉ. बी.आर. अंबेडकर के साथ हुए समझौते के कारण गांधीजी ने सम्मेलन का बहिष्कार कर बीच में ही भारत लौटने का निर्णय लिया।
4. भारत लौटने के बाद गांधीजी ने तुरंत वायसराय लॉर्ड विलिंगटन से मुलाकात की, जिन्होंने कांग्रेस के प्रस्तावों को स्वीकार करते हुए सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण को रोकने में पूर्ण सहयोग प्रदान किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी में भारत में हुए सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके वैचारिक संस्थापकों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद और पैतृक पुरोहिती के प्रभुत्व का कड़ा विरोध करते हुए उपनिषदों के एकेश्वरवादी दर्शन को समाज के सुधार का आधार बनाया।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा वर्ष 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया और साथ ही पाखंड खंडनी पताका फहराते हुए जन्मना जाति व्यवस्था के स्थान पर गुण, कर्म और स्वभाव पर आधारित वर्ण व्यवस्था का समर्थन किया।
3. प्रार्थना समाज के संस्थापक आत्माराम पांडुरंग थे, जिन्हें न्याय मूर्ति महादेव गोविंद रानाडे और आर.जी. भंडारकर का सक्रिय सहयोग प्राप्त हुआ, तथा इस संस्था का मुख्य ध्यान अंतरजातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और दलितोद्धार जैसे सामाजिक सुधारों पर केंद्रित था।
4. यंग बंगाल आंदोलन का नेतृत्व करने वाले हेनरी विवियन डेरोज़ियो ने सामाजिक सुधारों के साथ-साथ पारंपरिक हिंदू धर्म की कुरीतियों पर तीखा प्रहार किया, और उनके शिष्यों (डेरोज़ियंस) को कलकत्ता में रूढ़िवादी समाज का पूर्ण समर्थन और आशीर्वाद प्राप्त हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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