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History of India
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में लोहे के व्यापक ज्ञान और उसके सैन्य व कृषि उपयोग के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं, जिसके कारण इस काल में बस्तियों का स्थायी शहरीकरण तेजी से विकसित हुआ था।
- 2. उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार गंगा-यमुना दोआब की ओर हुआ, और इस दौरान 'शतपथ ब्राह्मण' में पूर्वी क्षेत्र की ओर विस्तार की कथा (वैश्वानर आग्नि कथा) का उल्लेख मिलता है।
- 3. ऋग्वेद में 'दुहितृ' (गोदुहन करने वाली) शब्द पुत्री के लिए प्रयोग किया जाता था, जो यह दर्शाता है कि ऋग्वैदिक समाज में पशुधन (विशेषकर गाय) का आर्थिक जीवन में केंद्रीय महत्व था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वैदिक सभ्यता के संदर्भ में कथन 1 असत्य है, क्योंकि ऋग्वैदिक काल के लोगों को लोहे (कृष्ण अयस) का ज्ञान नहीं था; लोहे का व्यापक प्रयोग उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ईसा पूर्व के बाद) में आरंभ हुआ था। ऋग्वैदिक काल में लोहे के अभाव के कारण शहरीकरण नहीं बल्कि कबीलाई और ग्रामीण संस्कृति थी। कथन 2 सत्य है, उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार सतलज से गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र तक हुआ और 'शतपथ ब्राह्मण' में विदेह माधव और वैश्वानर अग्नि की कथा के माध्यम से पूर्वी दिशा में उनके प्रसार का विवरण मिलता है। कथन 3 भी सत्य है, ऋग्वेद में गाय (अघन्या) का अत्यधिक आर्थिक व धार्मिक महत्व था और पुत्री को 'दुहितृ' कहा जाता था जिसका शाब्दिक अर्थ गाय का दूध निकालने वाली होता था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार समस्त कृषि योग्य भूमि की पैमाइश करवाकर भू-राजस्व को बढ़ाकर उपज का आधा (50%) भाग कर दिया था और बिचौलियों (खूत्, मुकद्दम और चौधरी) के विशेषाधिकारों को समाप्त कर उन पर सामान्य कृषकों की तरह कर आरोपित किए थे।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि के कुप्रभावों से निपटने और कृषि को पुनर्जीवित करने के लिए 'दीवान-ए-कोही' नामक एक नया कृषि विभाग स्थापित किया था, जिसके तहत किसानों को 'सोंधार' (कृषि ऋण) प्रदान किए गए थे।
3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में सिंचाई व्यवस्था को उन्नत करने के लिए नहरों का एक विस्तृत जाल बिछाया, जिसमें यमुना से हिसार तक जाने वाली 'उलूग खानी' और सतलज से घग्गर तक जाने वाली नहरें शामिल थीं, और उसने किसानों से इन नहरों के उपयोग के बदले 'हक-ए-शर्ब' (सिंचाई कर) वसूल किया जो कुल उपज का 1/10 भाग था।
4. लोदी वंश के संस्थापक बहलोल लोदी ने सल्तनत की शक्ति को पुनर्गठन करने के लिए केंद्रीय राजतंत्र को अत्यधिक शक्तिशाली बनाया और सुल्तान के पद की गरिमा को सर्वोपरि रखते हुए अफगान सरदारों के साथ 'मस्नद-ए-आली' की सामंती समानता की नीति को पूर्णतः समाप्त कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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विजयनगर में स्थानीय प्रशासन की "आयगार व्यवस्था" (Ayagar System) का संबंध किससे था?
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चंपारण सत्याग्रह (1917) और खेड़ा सत्याग्रह (1918) के ऐतिहासिक संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण में यूरोपीय नील बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकथा पद्धति' थोपी गई थी, जिसके तहत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर अनिवार्य रूप से नील की खेती करनी होती थी, और राजकुमार शुक्ल के विशेष आग्रह पर महात्मा गांधी ने चंपारण की यात्रा की थी।
2. खेड़ा सत्याग्रह के दौरान, जब गुजरात के खेड़ा जिले में फसल पूरी तरह बर्बाद हो गई थी, तब बॉम्बे सरकार ने भू-राजस्व में शत-प्रतिशत राहत (पूर्ण माफी) प्रदान करने की किसानों की मांग को तत्काल स्वीकार कर लिया था क्योंकि वहाँ प्लेग की महामारी भी फैली हुई थी।
3. वर्ष 1918 के अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन में गांधीजी ने पहली बार भारत में 'भूख हड़ताल' (Hunger Strike) का प्रयोग किया था, जो मिल मालिकों और श्रमिकों के बीच 'प्लेग बोनस' को समाप्त करने के विरोध में था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मनसबदारी व्यवस्था में "पाईबाकी" (Paibaqi) क्या थी?
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