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History of India
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वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ऋग्वैदिक काल में लोहे के व्यापक ज्ञान और उसके सैन्य व कृषि उपयोग के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं, जिसके कारण इस काल में बस्तियों का स्थायी शहरीकरण तेजी से विकसित हुआ था।
  2. 2. उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार गंगा-यमुना दोआब की ओर हुआ, और इस दौरान 'शतपथ ब्राह्मण' में पूर्वी क्षेत्र की ओर विस्तार की कथा (वैश्वानर आग्नि कथा) का उल्लेख मिलता है।
  3. 3. ऋग्वेद में 'दुहितृ' (गोदुहन करने वाली) शब्द पुत्री के लिए प्रयोग किया जाता था, जो यह दर्शाता है कि ऋग्वैदिक समाज में पशुधन (विशेषकर गाय) का आर्थिक जीवन में केंद्रीय महत्व था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

वैदिक सभ्यता के संदर्भ में कथन 1 असत्य है, क्योंकि ऋग्वैदिक काल के लोगों को लोहे (कृष्ण अयस) का ज्ञान नहीं था; लोहे का व्यापक प्रयोग उत्तर वैदिक काल (लगभग 1000 ईसा पूर्व के बाद) में आरंभ हुआ था। ऋग्वैदिक काल में लोहे के अभाव के कारण शहरीकरण नहीं बल्कि कबीलाई और ग्रामीण संस्कृति थी। कथन 2 सत्य है, उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार सतलज से गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र तक हुआ और 'शतपथ ब्राह्मण' में विदेह माधव और वैश्वानर अग्नि की कथा के माध्यम से पूर्वी दिशा में उनके प्रसार का विवरण मिलता है। कथन 3 भी सत्य है, ऋग्वेद में गाय (अघन्या) का अत्यधिक आर्थिक व धार्मिक महत्व था और पुत्री को 'दुहितृ' कहा जाता था जिसका शाब्दिक अर्थ गाय का दूध निकालने वाली होता था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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