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History of India
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में, पल्लव और चालुक्य राजवंशों के प्रशासनिक तथा सांस्कृतिक विकास के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन् प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का अनुयायी होने के बावजूद शैव संत अप्पर के प्रभाव से शैव धर्म अपना लिया था, तथा महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकश्म 'रथ मंदिरों' का निर्माण कार्य उसी के शासनकाल में प्रारंभ हुआ था।
- 2. बादामी के चालुक्य राजवंश के शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्द्धन को पराजित किया था, जिसका सजीव विवरण ऐहोल प्रशस्ति में मिलता है जिसकी रचना उसके दरबारी कवि रविकीर्ति ने की थी।
- 3. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन् प्रथम ने वातापी पर अधिकार कर लिया था और 'वातापिकोंड' (वातापी का विजेता) की उपाधि धारण की थी, जबकि कांची के प्रसिद्ध कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण राजसिंह (नर्सिम्हवर्मन् द्वितीय) के शासनकाल में हुआ था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि महाबलीपुरम के प्रसिद्ध रथ मंदिरों (सप्त पगोडा) का निर्माण पल्लव शासक नरसिंहवर्मन् प्रथम (मामल्ल) के शासनकाल में करवाया गया था, न कि महेंद्रवर्मन् प्रथम के काल में, हालांकि महेंद्रवर्मन् ने रॉक-कट वास्तुकला की शुरुआत अवश्य की थी। कथन 2 और 3 बिल्कुल सही हैं। पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा के तट पर हर्षवर्धन को हराया था और रविकीर्ति द्वारा रचित ऐहोल प्रशस्ति में इसका वर्णन है। पल्लव नरेश नरसिंहवर्मन् प्रथम ने चालुक्य राजधानी वातापी को जीतकर 'वातापिकोंड' की उपाधि ली थी और कांची के कैलाशनाथ मंदिर का निर्माण नरसिंहवर्मन् द्वितीय (राजसिंह) ने करवाया था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
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औरंगजेब के समय में किस हिंदू राजा ने "शिवाजी महाराज" और मुगलों के बीच "पुरंदर की संधि" करवाई थी?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक चरण और 'नरम दल-गरम दल' के वैचारिक संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के नरमपंथी नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी और फिरोजशाह मेहता) की राजनीतिक पद्धति 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' (Prayer, Petition and Protest) पर आधारित थी, तथा उनका मुख्य विश्वास ब्रिटिश न्यायप्रियता में था।
2. वर्ष 1905 के बनारस अधिवेशन और 1906 के कलकत्ता अधिवेशन के बीच बढ़ते तनाव के दौरान, गरम दल के नेता बंगाल से बाहर भी स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का विस्तार करना चाहते थे, जबकि नरमपंथी इस आंदोलन को केवल बंगाल तक ही सीमित रखना चाहते थे।
3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के विभाजन के उपरांत ब्रिटिश सरकार ने 'दमन और फुसलाiment' (Repression and Conciliation) की नीति अपनाई, जिसके तहत वर्ष 1909 के भारतीय परिषद अधिनियम (मॉर्ले-मिंटो सुधार) के माध्यम से नरमपंथियों को संतुष्ट करने का प्रयास किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सल्तनत काल में किस सुल्तान ने फलों की गुणवत्ता सुधारने के लिए विशेष प्रयास किए?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां के नेतृत्व तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब को अंग्रेजों द्वारा उनके पिता पेशवा बाजीराव द्वितीय की पेंशन से वंचित किए जाने और ब्रिटिश सत्ता द्वारा उनके उपाधि एवं अधिकारों को अस्वीकार करने के पश्चात उन्होंने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभाला तथा स्वयं को पेशवा घोषित किया।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और कूटनीतिक रणनीतिकार थे, ने ब्रिटिश नीतियों के विरुद्ध तुर्की और अन्य अंतरराष्ट्रीय ताकतों से संपर्क साधने का प्रयास किया था तथा कानपुर में सैन्य अभियानों के दौरान अंग्रेजों के साथ कूटनीतिक वार्ताओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. तात्या टोपे ने कानपुर में नाना साहब की सेना के सैन्य कमांडर के रूप में कार्य करते हुए ब्रिटिश जनरल सर कॉलिन कैंपबेल को निर्णायक रूप से पराजित किया और कानपुर पर स्थायी रूप से अधिकार स्थापित कर लिया, जिसे अंग्रेजों ने कभी पुनः नहीं जीता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई तथा तात्या टोपे के सैन्य अभियानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1858 में ब्रिटिश सेनापति सर ह्यू रोज़ द्वारा झांसी की घेराबंदी किए जाने पर, रानी लक्ष्मीबाई ने अदम्य साहस का परिचय दिया और अंग्रेजों से घिरने के बाद कालपी की ओर प्रस्थान किया, जहाँ तात्या टोपे ने उनकी सेना के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना का पुरजोर मुकाबला किया।
2. कालपी के युद्ध में पराजित होने के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर रुख किया और सिंधिया राजवंश के शासक जयाजीराव सिंधिया को पराजित कर ग्वालियर के रणनीतिक किले पर अधिकार कर लिया।
3. ग्वालियर के पतन के अंतिम चरण में जून 1858 में अंग्रेजों से लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे वहाँ से निकलकर केंद्रीय भारत और राजस्थान के जंगलों में अंग्रेजों के विरुद्ध छापामार युद्ध (Guerrilla warfare) का नेतृत्व करते रहे।
4. तात्या टोपे को उनके एक जमींदार मित्र मान सिंह के विश्वासघात के कारण ब्रिटिश सेना द्वारा शिवपुरी में पकड़ लिया गया और अप्रैल 1859 में उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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