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History of India
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मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के दार्शनिक सिद्धांतों और उनके प्रचारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वल्लभाचार्य ने 'शुद्धाद्वैत' दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार ब्रह्म और जगत में कोई भिन्नता नहीं है और जगत ब्रह्म का वास्तविक (मायारहित) रूपांतरण है, तथा उन्होंने कृष्ण की बाल रूप में 'पुष्टिमार्ग' के माध्यम से उपासना पर बल दिया।
- 2. सूफी मत के 'चिशती सिलसिला' के प्रसिद्ध संत निजामुद्दीन औलिया ने राज्य की राजनीति से पूर्णतः दूर रहने की नीति अपनाई और दिल्ली के सुल्तानों द्वारा दिए गए सभी राजकीय उपहारों एवं जागीर प्रस्तावों को सहर्ष स्वीकार कर लिया था।
- 3. पंद्रहवीं शताब्दी के संत कबीर ने किसी भी पारंपरिक संगठित धर्म या बाहरी कर्मकांड को स्वीकार नहीं किया, बल्कि उन्होंने निर्गुण ब्रह्म की उपासना पर बल देते हुए हिंदू और इस्लाम दोनों धर्मों की कट्टरता तथा बाह्य आडंबरों का तीव्र खंडन किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: वल्लभाचार्य ने 'शुद्धाद्वैत' (Pure Non-dualism) का प्रतिपादन किया। उनके अनुसार संपूर्ण जगत माया का विवर्त नहीं बल्कि ब्रह्म का वास्तविक रूपांतरण है, और उन्होंने भगवान कृष्ण की बाल रूप में भक्ति के लिए 'पुष्टिमार्ग' की स्थापना की थी। कथन 2 गलत है: चिश्ती सिलसिले के संत निजामुद्दीन औलिया ने 'सुल्तान के दरवाजे हमारे लिए बहुत बड़े हैं, हम दूसरे दरवाजे से निकल जाएंगे' की नीति अपनाते हुए कभी भी राजसी संरक्षण या सुल्तानों के दरबार और जागीर प्रस्तावों को स्वीकार नहीं किया था। कथन 3 सही है: कबीर ने मूर्तिपूजा, जाति व्यवस्था, और दोनों धर्मों के बाह्य कर्मकांडों का कड़ा विरोध करते हुए निर्गुण भक्ति का प्रचार किया। भारतीय इतिहास के इन आध्यात्मिक आंदोलनों के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक ढांचे और शिवाजी की राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी ने अपनी भू-राजस्व प्रणाली में मलिक अंबर की रय्यतवाड़ी व्यवस्था के आधार पर पैमाइश (काठी प्रणाली) को अपनाया और बिघा (बीघा) को भूमि की माप की इकाई बनाया।
2. 'चौथ' मराठा राज्य द्वारा उन पड़ोसी क्षेत्रों से वसूला जाने वाला कर था जो सीधे तौर पर मराठा नियंत्रण में नहीं थे, और यह कर उस क्षेत्र की कुल राजस्व आय का लगभग एक-चौथाई हिस्सा होता था, जिसके बदले मराठा शासक उन क्षेत्रों को बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा और शांति की गारंटी (सरदेशमुखी) देते थे।
3. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद 'अष्टप्रधान' में प्रत्येक मंत्री पूर्णतः स्वतंत्र रूप से सैन्य और प्रशासनिक निर्णय लेता था, और मंत्रियों के पद वंशानुगत होते थे ताकि राज्य में राजनीतिक स्थिरता बनी रहे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अवध में विद्रोह के फूट पड़ने के उपरांत बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को लखनऊ का नवाब घोषित किया और स्वयं राज्य की वास्तविक बागडोर संभालते हुए अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व किया।
2. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया था और वे अपनी उत्कृष्ट सैन्य रणनीति तथा नेतृत्व क्षमता के लिए विख्यात थे।
3. ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अंततः मार्च 1858 में गोरखा रेजिमेंट और अन्य सैन्य टुकड़ियों की सहायता से लखनऊ पर पुनः पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया, जिसके बाद बेगम हजरत महल ने नेपाल की ओर प्रस्थान किया और वहीं शरण ली।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, और अंत में पुवायां के एक स्थानीय राजा के साथ हुई मुठभेड़ में उन्हें जीवित गिरफ्तार कर लिया गया था, जिन पर लखनऊ में राजद्रोह का मुकदमा चलाकर फांसी दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह दमन किए गए संबंधित क्षेत्रों के निम्नलिखित युग्मों में से कौन-सा/से सुमेलित है/हैं?
1. जॉन निकलसन - दिल्ली
2. कॉलिन कैंपबेल - कानपुर और लखनऊ
3. मेजर जनरल हैवलॉक - इलाहाबाद और बनारस
4. ह्यूरोज - झाँसी और ग्वालियर
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सिकंदर लोदी ने किस ब्राह्मण को मौत की सजा दी थी?
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मौर्योत्तर काल एवं गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में भूमि अनुदान (Land Grants) की प्रथा में व्यापक वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप 'अग्रहार' और 'ब्रह्मदेय' जैसी कर-मुक्त भूमि ब्राह्मणों और धार्मिक संस्थानों को दी जाने लगी, और इस काल में 'अपहत' वह भूमि थी जो जंगली या कृषि योग्य नहीं थी।
2. फाह्यान (FaHien) के विवरण के अनुसार, चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के शासनकाल में भारत में बौद्ध धर्म का अत्यधिक पतन हो चुका था और पाटलिपुत्र के बौद्ध विहार पूरी तरह से खंडहर में बदल चुके थे, तथा चांडालों को नगर के बाहर रहना पड़ता था।
3. गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में प्रांतीय प्रशासन 'भुक्ति' कहलाता था, जिसके प्रमुख को 'उपर्तिक' कहा जाता था, जबकि जिला प्रशासन 'विषय' के अधीन था और विषय का प्रमुख 'विषयपति' कहलाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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