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History of India
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी में घटित घटनाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बंगाल नेटिव इन्फैंट्री (BNI) के 34वें रेजिमेंट के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में नए एनफील्ड राइफल में प्रयोग होने वाले चर्बीयुक्त कारतूसों के विरोध में अपने वरिष्ठ अधिकारी सार्जेंट मेजर ह्यू बसन और लेफ्टिनेंट बोथगार्ड पर आक्रमण कर दिया था।
- 2. मंगल पांडे को इस कृत्य के लिए 18 अप्रैल 1857 को फांसी दिए जाने का निश्चित दिन तय किया गया था, परंतु ब्रिटिश प्रशासन ने किसी बड़े विद्रोह की आशंका से घबराकर उन्हें तय तारीख से 10 दिन पूर्व ही यानी 8 अप्रैल 1857 को ही फांसी पर लटका दिया था।
- 3. बैरकपुर छावनी की इस घटना के तुरंत बाद, अवध के नवाब वाजिद अली शाह ने लखनऊ से गुप्त रूप से निर्देश भेजकर मंगल पांडे के इस कदम की सराहना की और अंग्रेजी हुकूमत के खिलाफ खुलेआम जिहाद का आह्वान किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के विद्रोह का तात्कालिक कारण ब्रिटिश सेना में नई 'एनफील्ड P-53' राइफल का शामिल किया जाना था, जिसमें प्रयोग होने वाले कारतूसों के बारे में यह अफवाह फैल गई थी कि उनके खोल पर गाय और सुअर की चर्बी का लेप लगाया गया है, जिसे सैनिकों को दांतों से काटना पड़ता था। 29 मार्च 1857 को बैरकपुर (पश्चिम बंगाल) छावनी में 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री (BNI) के सिपाही विकिपीडिया संदर्भ मंगल पांडे ने इस कारतूस के प्रयोग के विरुद्ध आक्रोशित होकर अपने अंग्रेज अधिकारियों पर हमला कर दिया। उन्हें 18 अप्रैल 1857 को फांसी दी जानी थी, लेकिन ब्रिटिश अधिकारियों ने बगावत के डर से उन्हें 8 अप्रैल 1857 को ही फांसी दे दी। इस घटना के समय अवध के नवाब वाजिद अली शाह कलकत्ता (मटियाला बुरज) में नजरबंद थे, और उनका इस घटना से कोई सीधा संबंध नहीं था। अतः कथन 3 असत्य है।
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के प्रथम चरण, गांधी-इरविन समझौते तथा गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान हिंसा के आरोपियों को छोड़कर सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने की शर्त स्वीकार की थी, किंतु भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु की फांसी की सजा को माफ करने की गांधीजी की मांग को औपचारिक रूप से अस्वीकार कर दिया गया था।
2. लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन (1931) में महात्मा गांधी ने कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था, और इस सम्मेलन में उन्होंने अछूतों के लिए डॉ. बी.आर. अंबेडकर द्वारा मांग किए गए 'पृथक निर्वाचक मंडल' का पूर्ण समर्थन किया था।
3. गांधी-इरविन समझौते के अनुपालन के परिणामस्वरूप कांग्रेस ने सविनय अवज्ञा आंदोलन को स्थगित कर दिया था तथा कराची अधिवेशन (1931) में इस समझौते का अनुमोदन किया गया था।
4. वर्ष 1932 में जब गांधीजी ने द्वितीय गोलमेज सम्मेलन से निराश होकर भारत लौटने के पश्चात पुनः सविनय अवज्ञा आंदोलन प्रारंभ किया, तब वाइसराय लॉर्ड विलिंगडन ने अत्यधिक दमनकारी नीतियां अपनाते हुए कांग्रेस को गैर-कानूनी घोषित कर दिया और दमनकारी अध्यादेशों के माध्यम से आंदोलन को कुचल दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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