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History of India
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन और शिवाजी की राजस्व प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. शिवाजी ने मलिक अंबर की रयतवारी व्यवस्था के आधार पर अपनी भू-राजस्व प्रणाली को पुनर्गठित किया, जिसके तहत भूमि की पैमाइश काठी और जरीब के माध्यम से की जाती थी और राज्य का प्रारंभिक हिस्सा कुल उपज का 33 प्रतिशत निर्धारित किया गया था जिसे बाद में बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया।
- 2. 'चौथ' कर उन क्षेत्रों से वसूला जाने वाला कर था जो सीधे मराठा नियंत्रण में नहीं थे, और यह कर उस क्षेत्र की कुल राजस्व आय का एक-चौथाई हिस्सा होता था, जिसके बदले मराठा आक्रमणकारियों द्वारा उन क्षेत्रों को बाहरी आक्रमणों से सुरक्षा प्रदान करने की गारंटी दी जाती थी।
- 3. 'सरदेशमुखी' कर शिवाजी द्वारा संपूर्ण महाराष्ट्र पर अपने वंशानुगत अधिकारों के दावे के रूप में वसूला जाने वाला अतिरिक्त कर था, जो कुल राजस्व का 10 प्रतिशत होता था और इसे चौथ वसूलने वाले क्षेत्रों से नहीं लिया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि शिवाजी ने मलिक अंबर की पद्धति पर भू-राजस्व प्रणाली तैयार की थी जिसमें राज्य का हिस्सा कुल उपज का 33% (लगभग एक-तिहाई) तय किया गया था, जिसे बाद में अन्नाजी दत्तो के सुधारों के समय बढ़ाकर 40% (दो-पाँचवां हिस्सा) किया गया था, न कि प्रारंभिक 33% से बढ़ाकर सीधा 40%। कथन 2 बिल्कुल सही है; 'चौथ' पड़ोसी और गैर-मराठा क्षेत्रों से वसूला जाने वाला कर था जो उस क्षेत्र की कुल आय का 25% (एक-चौथाई) होता था और इसके बदले मराठे उन क्षेत्रों की सुरक्षा का आश्वासन देते थे। कथन 3 गलत है क्योंकि 'सरदेशमुखी' 10% का कर था जिसे शिवाजी अपने आपको संपूर्ण महाराष्ट्र का 'सरदेशमुख' (प्रधान मुखिया) मानते हुए उन क्षेत्रों से भी वसूलते थे जहाँ से चौथ लिया जाता था (यह एक प्रकार का वतनरी दावा था)। विस्तृत ऐतिहासिक संदर्भ के लिए देखें विकिपीडिया संदर्भ।
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मुगल प्रशासन में काजी:
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उदय के लिए उत्तरदायी राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड डलहौजी की 'राज्य हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया, तथा मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के उत्तराधिकारियों से लाल किले की शाही उपाधियाँ और उनके विशेषाधिकार छीन लिए जाने की घोषणा से भारतीय शासक वर्ग और अभिजात वर्ग में भारी असुरक्षा की भावना उत्पन्न हुई।
2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों (De-industrialization) के कारण भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों का पूर्ण पतन हो गया, जिससे लाखों बुनकर और कारीगर बेरोजगार हो गए, जबकि ब्रिटिश भू-राजस्व व्यवस्थाओं (जैसे स्थायी बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) ने किसानों पर अत्यधिक कर का बोझ लादकर उन्हें ग्रामीण साहूकारों के चंगुल में फंसा दिया।
3. वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने हिंदू से ईसाई धर्म में परिवर्तित व्यक्तियों को अपने पैतृक पूर्वजों की संपत्ति से वंचित करने वाले पुराने कानून को बदल दिया, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाई धर्म के प्रचार और जबरन धर्मांतरण के एक सुनियोजित षड्यंत्र के रूप में देखा।
4. सेना के भीतर नस्लीय भेदभाव, भारतीय सैनिकों को कम वेतन और 'भत्ता' (Foreign Service Allowance) न दिए जाने की नीति के साथ-साथ वर्ष 1856 के 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) ने, जिसके तहत भारतीय सैनिकों को समुद्र पार वर्मा या विदेशों में भी सेवा देने के लिए बाध्य किया गया था, सैनिकों की धार्मिक मान्यताओं को सीधे तौर पर आहत किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण (1932-34), गांधी-इरविन समझौते और द्वितीय गोलमेज सम्मेलन से जुड़े निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मार्च 1931 में संपन्न गांधी-इरविन समझौते के तहत ब्रिटिश सरकार ने हिंसा के मामलों में अभियुक्तों को छोड़कर सभी राजनीतिक बंदियों को रिहा करने और सविनय अवज्ञा आंदोलन के दौरान जब्त की गई संपत्ति को वापस करने पर सहमति व्यक्त की थी।
2. लंदन में आयोजित द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में कांग्रेस के एकमात्र प्रतिनिधि के रूप में महात्मा गांधी ने भाग लिया, जहाँ सांप्रदायिक प्रतिनिधित्व के मुद्दे और अछूतों के लिए पृथक निर्वाचक मंडल की मांग पर गंभीर गतिरोध उत्पन्न होने के कारण यह सम्मेलन बिना किसी ठोस परिणाम के समाप्त हो गया।
3. वर्ष 1932 में जब गांधीजी ने भारत लौटने के बाद दोबारा सविनय अवज्ञा आंदोलन शुरू किया, तो ब्रिटिश वाइसराय लॉर्ड विलिंगडन ने अत्यधिक दमनकारी नीतियां अपनाते हुए कांग्रेस को गैर-कानूनी घोषित कर दिया और आपातकालीन अध्यादेशों के माध्यम से आंदोलन को पूरी तरह कुचल दिया।
4. डॉ. भीमराव अंबेडकर द्वारा अछूतों के लिए पृथक निर्वाचन की मांग के समर्थन में ब्रिटिश प्रधानमंत्री रामसे मैकडोनाल्ड ने 'कम्युनल अवार्ड' की घोषणा की, जिसके विरोध में गांधीजी ने येरवडा जेल में आमरण अनशन किया, जिसके परिणामस्वरुप पूना समझौता संपन्न हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, सैन्य और आर्थिक सुधारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार बिचौलियों (खوت, मुकद्दम और चौधरी) के विशेषाधिकारों को समाप्त करते हुए सीधे किसानों से भू-राजस्व वसूलने की व्यवस्था की और उपज का आधा हिस्सा (50 प्रतिशत) कर के रूप में निर्धारित किया।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी महत्त्वाकांक्षी योजनाओं के तहत दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि के साथ-साथ कृषि सुधारों के लिए 'दीवान-ए-कोही' नामक एक नए कृषि विभाग की स्थापना की, जिसका मुख्य उद्देश्य बंजर भूमि को उपजाऊ बनाना था।
3. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल में पहली बार बड़े पैमाने पर नहरों का निर्माण कराया, तथा किसानों पर से सभी प्रकार के सिंचाई कर हटाकर पूरी तरह कर-मुक्त सिंचाई व्यवस्था लागू की।
4. इल्तुतमिश ने मंगोल आक्रमण के खतरे से निपटने और साम्राज्य की प्रशासनिक सुदृढ़ता के लिए 'इकता प्रणाली' को संस्थागत रूप दिया, जिसके तहत सैन्य अधिकारियों और सैनिकों को वेतन के बदले भूमि या राजस्व अनुदान दिया जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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सत्रहवीं शताब्दी में छत्रपति शिवाजी महाराज द्वारा स्थापित मराठा साम्राज्य और उनके प्रशासनिक एवं राजस्व सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था में मंत्रिपरिषद को 'अष्टप्रधान' कहा जाता था, जिसमें प्रत्येक मंत्री सीधे सम्राट के प्रति उत्तरदायी होता था और इनमें से 'पंडितराव' और 'न्यायाधीश' को छोड़कर शेष सभी मंत्रियों को आवश्यकता पड़ने पर सैन्य अभियानों का नेतृत्व भी करना पड़ता था।
2. शिवाजी ने दक्कन में मलिक अंबर की राजस्व व्यवस्था के आधार पर भूमि की पैमाइश कराकर भू-राजस्व निर्धारित किया था, जिसमें प्रारंभिक वर्षों में उपज का 33 प्रतिशत भाग राज्य की आय के रूप में लिया जाता था, जिसे बाद में बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया था।
3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठा साम्राज्य के प्रमुख बाह्य कर थे, जहाँ 'चौथ' पड़ोसी मुगल क्षेत्रों की कुल आय का 25 प्रतिशत हिस्सा इस बात के बदले वसूला जाता था कि मराठा सेना उन क्षेत्रों पर आक्रमण नहीं करेगी, जबकि 'सरदेशमुखी' 10 प्रतिशत का एक अतिरिक्त कर था जिसे शिवाजी संपूर्ण महाराष्ट्र और अपने पैतृक अधिकारों के दावे के रूप में वसूलते थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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