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History of India
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क्रांतिकारी आंदोलन के द्वितीय चरण और प्रमुख संगठनों की वैचारिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में, हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) और गदर पार्टी के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में पुनर्गठित 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) के घोषणापत्र 'द रिवोल्यूशनरी' का प्रारूप मुख्य रूप से भगवती चरण बोहरा द्वारा तैयार किया गया था, जिसमें स्पष्ट रूप से समाजवादी समाज की स्थापना को क्रांतिकारी आंदोलन का अंतिम लक्ष्य बताया गया था।
- 2. वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में सोहन सिंह भकना और लाला हरदयाल के प्रयासों से स्थापित 'गदर पार्टी' ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना में कार्यरत भारतीय सैनिकों के बीच विद्रोह भड़काने और 'यंग इंडिया' तथा 'हिंदुस्तान गदर' जैसे क्रांतिकारी समाचार पत्रों के माध्यम से प्रवासी भारतीयों को संगठित करने की योजना बनाई थी।
- 3. वर्ष 1929 की सेंट्रल लेजिस्लेटिव असेंबली बम कांड घटना में भगत सिंह के साथ बटुकेश्वर दत्त ने भाग लिया था, जिसका उद्देश्य जनसंहार करना नहीं बल्कि ट्रेड डिस्प्यूट बिल और पब्लिक सेफ्टी बिल जैसे दमनकारी कानूनों के विरोध में 'बहरों को सुनाना' तथा अपनी वैचारिक उपस्थिति दर्ज कराना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन पूरी तरह से सही हैं। वर्ष 1928 में फिरोजशाह कोटला में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया, जिसके घोषणापत्र का प्रारूप भगवती चरण बोहरा ने लिखा था। गदर पार्टी की स्थापना 1913 में सैन फ्रांसिस्को में हुई थी और इसका मुखपत्र 'गदर' था। असेंबली बम कांड में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 'बहरों को सुनाने' के उद्देश्य से पर्चे फेंके थे। इस संबंध में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध में स्थापित 'प्रार्थना समाज' और 'आर्य समाज' के वैचारिक दृष्टिकोण, सामाजिक सुधार एजेंडे तथा धार्मिक सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रार्थना समाज की स्थापना वर्ष 1867 में केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से बंबई में आत्माराम पांडुरंग द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य ध्यान अंतर-जाति विवाह, अंतर-जाति भोज, विधवा पुनर्विवाह और दलित जातियों के उत्थान जैसे सामाजिक सुधारों पर था।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने मूर्तिपूजा, बहुदेववाद, अवतारवाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया तथा 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए वेदों की अचूकता और सर्वोच्चता को स्थापित किया।
3. प्रार्थना समाज के प्रमुख नेता और न्यायविद् महादेव गोविंद रानाडे ने समाज सुधार कार्यों को गति देने के लिए 'डेक्कन एजुकेशन सोसायटी' की स्थापना की, जबकि आर्य समाज ने पाश्चात्य शिक्षा प्रणाली का पूर्ण बहिष्कार करते हुए केवल गुरुकुल पद्धति पर आधारित शिक्षा को ही एकमात्र विकल्प माना।
4. आर्य समाज ने हिंदू समाज से अलग हुए या इस्लाम व ईसाई धर्म अपना चुके व्यक्तियों की पुनः हिन्दू धर्म में वापसी के लिए 'शुद्धि आंदोलन' की शुरुआत की थी, जिसे प्रार्थना समाज के सदस्यों का भी वैचारिक समर्थन प्राप्त था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा गठित आज़ाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बंबई (मुंबई) के ग्वालिया टैंक मैदान में ऐतिहासिक भाषण देने और कांग्रेस का झंडा फहराने वाली प्रमुख समाजवादी नेत्री अरुणा आसफ अली थीं, जिन्हें बाद में भूमिगत रहकर आंदोलन का नेतृत्व करने के लिए भी जाना जाता है।
2. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में कलकत्ता से गुप्त रूप से देश छोड़ने के पश्चात 'ग्रेट ब्रिटेन' नामक छद्म नाम से सोवियत संघ की यात्रा की थी, क्योंकि वे सोवियत संघ को ब्रिटिश साम्राज्यवाद के विरुद्ध सबसे बड़ा स्वाभाविक सहयोगी मानते थे।
3. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा इंडियन इंडिपेंडेंस लीग और आज़ाद हिंद फौज का औपचारिक नेतृत्व सुभाष चंद्र बोस को सौंपे जाने के पश्चात, आईएनए के अंतर्गत 'सुभाष ब्रिगेड', 'जवाहर ब्रिगेड' और महिलाओं की एक रेजिमेंट के रूप में 'झाँसी की रानी रेजिमेंट' का गठन किया गया था, जिसका नेतृत्व लक्ष्मी सहगल ने किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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विजयनगर साम्राज्य में "आयगार" (Ayagar) अधिकारियों की संख्या कितनी होती थी जो ग्रामीण प्रशासन देखते थे?
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