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History of India
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सत्रहवीं शताब्दी के शुरुआती दौर में यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और पुर्तगाली तथा ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1615 में भारत आए ब्रिटिश राजदूत सर थॉमस रो ने मुगल सम्राट जहाँगीर के दरबार से सूरत के अतिरिक्त आगरा, अहमदाबाद और ब्रोच (भड़ौच) जैसे महत्वपूर्ण व्यावसायिक केंद्रों में भी अंग्रेजों को कारखाने स्थापित करने के लिए शाही फरमान प्राप्त करने में सफलता हासिल की थी।
- 2. पुर्तगाली गवर्नर नीनो दा कुन्हा ने वर्ष 1530 में पुर्तगाली भारत की राजधानी को कोचीन से गोवा स्थानांतरित किया था, और इसी के साथ पुर्तगालियों ने हुगली और बंगाल के अन्य क्षेत्रों में अपने व्यापारिक प्रभाव का विस्तार करना शुरू किया था।
- 3. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में अपनी प्रारंभिक व्यापारिक गतिविधियों को सुरक्षित रखने के लिए वर्ष 1622 में फारसी सेना के साथ मिलकर फारस की खाड़ी के सामरिक रूप से अत्यंत महत्वपूर्ण 'होरमुज बंदरगाह' को पुर्तगालियों से छीनने में सफलता मिली थी।
- 4. फ्राँसोवा कैरॉन ने वर्ष 1668 में मुगल बादशाह औरंगजेब से अधिकार पत्र प्राप्त कर मसूलीपट्टम में फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी के पहले कारखाने की स्थापना की थी, जिसे बाद में सूरत में भी अपनी दूसरी व्यावसायिक बस्ती स्थापित करने का अवसर मिला।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि सर थॉमस रो जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में 1615 में जहाँगीर के दरबार में आए थे और सूरत के अलावा अन्य स्थानों पर भी फैक्ट्री खोलने की अनुमति प्राप्त की थी। कथन 2 सही है; नीनो दा कुन्हा ने 1530 में मुख्यालय कोचीन से गोवा स्थानांतरित किया था। कथन 3 सही है, 1622 में अंग्रेजों ने फारसियों की सहायता से होरमुज पर अधिकार किया था जिससे पुर्तगालियों की नौसैनिक श्रेष्ठता को तगड़ा झटका लगा था। कथन 4 गलत है क्योंकि फ्रांसीसी कंपनी का पहला कारखाना 1668 में सूरत में स्थापित हुआ था, मसूलीपट्टम में नहीं। पुर्तगाली और ब्रिटिश सत्ता के विस्तार के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
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मौर्योत्तर काल एवं गुप्त साम्राज्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में भूमि अनुदान (Land Grants) की प्रथा में व्यापक वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप 'अग्रहार' और 'ब्रह्मदेय' जैसी कर-मुक्त भूमि ब्राह्मणों और धार्मिक संस्थानों को दी जाने लगी, और इस काल में 'अपहत' वह भूमि थी जो जंगली या कृषि योग्य नहीं थी।
2. फाह्यान (FaHien) के विवरण के अनुसार, चंद्रगुप्त द्वितीय विक्रमादित्य के शासनकाल में भारत में बौद्ध धर्म का अत्यधिक पतन हो चुका था और पाटलिपुत्र के बौद्ध विहार पूरी तरह से खंडहर में बदल चुके थे, तथा चांडालों को नगर के बाहर रहना पड़ता था।
3. गुप्त साम्राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था में प्रांतीय प्रशासन 'भुक्ति' कहलाता था, जिसके प्रमुख को 'उपर्तिक' कहा जाता था, जबकि जिला प्रशासन 'विषय' के अधीन था और विषय का प्रमुख 'विषयपति' कहलाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लॉर्ड डलहौजी द्वारा लागू की गई 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झांसी जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया, जिससे भारतीय शासक वर्ग और उनके आश्रितों में गहरी राजनीतिक असुरक्षा और असंतोष उत्पन्न हुआ।
2. ब्रिटिश सरकार द्वारा 1856 में अवध का अधिग्रहण 'कुशासन' (Misgovernance) के आधार पर किया गया था, जिसके परिणामस्वरूप अवध के हजारों सिपाही, जो ब्रिटिश सेना में कार्यरत थे, आहत हुए और इस कार्रवाई को उन्होंने अपनी मातृभूमि के साथ विश्वासघात माना।
3. वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) के तहत पैतृक संपत्ति से वंचित करने के पुराने हिंदू कानून में संशोधन किया गया, जिसके अनुसार ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को उसके पूर्वजों की संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा; इसे रूढ़िवादी भारतीय समाज ने धर्म परिवर्तन का षड्यंत्र माना।
4. अंग्रेजों द्वारा भू-राजस्व की नई प्रणालियाँ (जैसे रैयतवाड़ी और महालवाड़ी) लागू किए जाने से पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था छिन्न-भिन्न हो गई, जिसके कारण कृषक वर्ग और पारंपरिक हस्तशिल्पकार साहूकारों तथा ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के चंगुल में फंसकर पूरी तरह बर्बाद हो गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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दिसंबर 1802 ई. में बाजीराव द्वितीय और अंग्रेजों के बीच कौन सी अपमानजनक संधि हुई थी?
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औरंगजेब ने हिंदू त्यौहारों को सार्वजनिक रूप से मनाने पर रोक लगाने के लिए किसकी नियुक्ति की थी?
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ब्रिटिशकालीन भारत के इतिहास में 'संथाल हूल' (1855-56) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. यह विद्रोह केवल अंग्रेजों की भू-राजस्व नीतियों के खिलाफ था और इसमें बाहरी महाजनों (दिकुओं) की कोई भूमिका नहीं थी।
2. इस विद्रोह के परिणामस्वरुप ब्रिटिश सरकार ने 'संथाल परगना' नामक एक नए जिले का गठन किया।
3. सिद्धू और कान्हू ने इस विद्रोह का नेतृत्व किया था और इसे 'कार्ल मार्क्स' ने भारत का पहला किसान विद्रोह कहा था।
उपर्युक्त में से कौन सा/से कथन सही है/हैं?
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