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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) की आर्थिक संरचना, शिल्प उत्पादन और दूर-दुरुस्त के क्षेत्रों से कच्चे माल की प्राप्ति के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हड़प्पाकालीन शिल्पकारों द्वारा बहुमूल्य और अर्ध-कीमती पत्थरों जैसे लाजवर्डमणि (Lapis lazuli) की प्राप्ति मुख्य रूप से बदख्शाँ (अफगानिस्तान) क्षेत्र से की जाती थी, जबकि शोतुघई नामक हड़प्पाकालीन स्थल इसी क्षेत्र में नहरों और व्यापारिक नियंत्रण के लिए स्थापित किया गया था।
  2. 2. तांबे की आपूर्ति के मुख्य स्रोत के रूप में खेतड़ी (राजस्थान) क्षेत्र का उपयोग किया जाता था, और पुरातात्विक साक्ष्यों से यह स्पष्ट होता है कि खेतड़ी से तांबा प्राप्त करने वाले हड़प्पावासी ओमान (Oman) के साथ भी समुद्री मार्ग से तांबे के व्यापार में संलग्न थे।
  3. 3. लोथल और चान्हूदड़ो जैसे स्थलों पर मनके (Beads) बनाने के कारखाने और औद्योगिक कार्यशालाएँ पाई गई हैं, जहाँ जैस्पर, कार्नेलियन, क्वार्ट्ज और शंख जैसी सामग्रियों का बड़े पैमाने पर उपयोग करके विभिन्न आकारों के आभूषणों का निर्माण किया जाता था।
  4. 4. सिंधु घाटी सभ्यता के निवासियों द्वारा व्यापार और विनिमय के लिए मुख्य रूप से 'मानकीकृतबाट और माप तौल प्रणाली' का उपयोग किया जाता था, जिसमें द्विआधारी (Binary) और दशमलव (Decimal) प्रणालियों का मिश्रण पाया गया है, और वजन के लिए मुख्य रूप से चट (Chert) पत्थर से बने घनाकार बाटों का प्रयोग होता था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

सिंधु घाटी सभ्यता की अर्थव्यवस्था उन्नत कृषि, शिल्प उत्पादन और सुव्यवस्थित आंतरिक तथा बाह्य व्यापार पर आधारित थी। हड़प्पावासी अपनी शिल्प आवश्यकताओं के लिए विभिन्न दूरस्थ क्षेत्रों से कच्चा माल मंगाते थे। उदाहरणस्वरूप, लाजवर्डमणि (Lapis lazuli) अफगानिस्तान के बदख्शाँ क्षेत्र से, टिन अफगानिस्तान व ईरान से, और तांबा राजस्थान के खेतड़ी क्षेत्र तथा ओमान से आयात किया जाता था। शोतुघई (Afghanistan) सिंधु घाटी सभ्यता का एक ऐसा स्थल था जो अफगानिस्तान में व्यापारिक चौकी के रूप में स्थापित था। चान्हूदड़ो और लोथल मनके निर्माण (Bead-making) के प्रमुख केंद्र थे जहाँ कार्नेलियन, जैस्पर, शंख और steatite जैसी सामग्रियों का उपयोग किया जाता था। व्यापार में सटीकता के लिए मानकीकृत चट (Chert) पत्थर से बने घनाकार बाटों का प्रयोग होता था जो द्विआधारी और दशमलव प्रणालियों पर आधारित थे। इस सभ्यता के व्यापारिक और सांस्कृतिक पहलुओं के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं। अतः सभी चारों कथन पूर्णतः सही हैं।
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