BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
19 views

वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह को कुचले गए क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

  1. 1. जॉन निकलसन — दिल्ली में विद्रोह को दबाने के दौरान ब्रिटिश सेना का नेतृत्व किया और कश्मीरी गेट पर संघर्ष करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
  2. 2. सर कॉलिन कैंपबेल — लखनऊ और कानपुर क्षेत्र में विद्रोहियों का दमन किया तथा अवध की घेराबंदी समाप्त करने में मुख्य भूमिका निभाई।
  3. 3. सर ह्यूरोज — झाँसी, ग्वालियर और सेंट्रल इंडिया के क्षेत्र में रानी लक्ष्मीबाई व तात्या टोपे की सेना के विरुद्ध सैन्य अभियान का संचालन किया।
  4. 4. कर्नल जेम्स नील — रोहिलखंड क्षेत्र में खान बहादुर खान के विद्रोह को कुचला तथा बरेली में शांति स्थापित की।

उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के महान विद्रोह को दबाने के लिए ब्रिटिश सरकार ने अपने कई अनुभवी सैन्य अधिकारियों को नियुक्त किया था। जॉन निकलसन ने दिल्ली में विद्रोह का दमन किया और कश्मीरी गेट पर लड़ते हुए मारे गए। सर कॉलिन कैंपबेल ने लखनऊ और कानपुर में विद्रोहियों को परास्त किया तथा अवध को पुनः अपने अधिकार में लिया। सर ह्यूरोज ने झाँसी और ग्वालियर में रानी लक्ष्मीबाई तथा तात्या टोपे के विरुद्ध अभियान चलाया और झाँसी के पतन के बाद ह्यूरोज ने ही रानी लक्ष्मीबाई के बारे में कहा था कि 'वह विद्रोहियों में सोई हुई एकमात्र महिला थी'। वहीं, कर्नल जेम्स नील ने बनारस और इलाहाबाद (प्रयागराज) क्षेत्र में अत्यधिक क्रूरता के साथ विद्रोह को कुचला था, जबकि बरेली में रोहिल्ला सेना का दमन सर कॉलिन कैंपबेल ने किया था, इसलिए चौथा युग्म गलत सुमेलित है। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

→ वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (पल्लव, चालुक्य एवं चोल) के राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. हर्षवर्धन के कन्नौज सभा के आयोजन का मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म का प्रचार करना और चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में एक भव्य धार्मिक उत्सव का आयोजन करना था, जिसमें बीस देशों के राजाओं और विभिन्न संप्रदायों के विद्वानों ने भाग लिया था। 2. बादामी के चालुक्य राजवंश के महान शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस ऐतिहासिक विजय का विस्तृत विवरण पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम के महाबलीपुरम के शिलालेखों में प्राप्त होता है। 3. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी पर अधिकार करने के बाद 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी, और इसी के शासनकाल में प्रसिद्ध रथ मंदिरों (एकात्म मंदिर) का निर्माण महाबलीपुरम में शुरू हुआ था। 4. चोल सम्राट राजराज प्रथम ने अपनी नौसैनिक शक्ति का विस्तार करते हुए श्रीलंका के उत्तरी भाग पर अधिकार कर लिया था तथा मालदीव द्वीपों को जीत लिया था, और तंजावुर में प्रसिद्ध राजराजेश्वर (बृहदेश्वर) मंदिर का निर्माण कराया था जो द्रविड़ वास्तुकला का उत्कृष्ट उदाहरण है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और महारानी विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया, जिसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर' की दोहरी शासन प्रणाली को समाप्त कर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) का नया पद सृजित किया गया, जिसे सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (Council of India) दी गई। 2. महारानी विक्टोरिया की घोषणा (जिसे 'मैग्नाकार्टा' भी कहा जाता है) के माध्यम से भारतीय रियासतों के विलय की नीति (व्यपगत का सिद्धांत) को आधिकारिक रूप से त्याग दिया गया तथा भविष्य में राज्यों के विस्तार की नीति न अपनाने का आश्वासन दिया गया। 3. घोषणा पत्र में यह स्पष्ट रूप से घोषित किया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीयों के पारंपरिक रीति-रिवाजों, धार्मिक विश्वासों और प्राचीन सामाजिक परंपराओं में कोई हस्तक्षेप नहीं करेगी, तथा सार्वजनिक सेवाओं में नस्ल, जाति या धर्म के आधार पर भेदभाव किए बिना योग्यता के आधार पर नियुक्ति दी जाएगी। 4. इस अधिनियम के प्रावधानों के तहत भारत में सैन्य बल का पुनर्गठन करते हुए यूरोपीय सैनिकों का अनुपात भारतीय सैनिकों की तुलना में काफी कम कर दिया गया, ताकि भविष्य में इस प्रकार के किसी भी बड़े सैन्य विद्रोह को आसानी से रोका जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और मनसबदारी प्रथा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मनसबदारी व्यवस्था की शुरुआत अकबर द्वारा की गई थी, जिसमें 'जात' पद मनसबदार की व्यक्तिगत स्थिति और उसके वेतन को निर्धारित करता था, जबकि 'सवार' पद उसके द्वारा रखे जाने वाले घोड़ों और घुड़सवार सैनिकों की संख्या को दर्शाता था। 2. शाहजहां के शासनकाल में मनसबदारी व्यवस्था में 'दुस्पा-सिंहस्पा' (दो घोड़े या तीन घोड़े वाले सैनिक रखने की व्यवस्था) नामक एक नई उप-प्रणाली जोड़ी गई थी, जिसे जहांगीर ने अपने अंतिम वर्षों में प्रारंभ किया था। 3. औरंगजेब के शासनकाल के दौरान साम्राज्य के विस्तार और मराठों के विरुद्ध अभियानों के कारण मनसबदारों की संख्या में भारी वृद्धि हुई, जिससे 'जागीर संकट' (Jagir Crisis) की स्थिति उत्पन्न हो गई क्योंकि उपलब्ध खालसा भूमि की तुलना में जागीरों की मांग अत्यधिक बढ़ गई थी। 4. मुगल प्रशासन में 'मीर बख्शी' सैन्य विभाग का प्रमुख अधिकारी होने के साथ-साथ मनसबदारों के वेतन बिलों की संस्तुति और उनके घोड़ों के हुलिया व दाग प्रथा के निरीक्षण का कार्य भी संभालता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. स्थाई बंदोबस्त (Permanent Settlement) प्रणाली को लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लागू किया गया था, जिसके अंतर्गत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया और कुल लगaन का 10/11 भाग ब्रिटिश सरकार को तथा 1/1 भाग जमींदारों को अपने प्रशासनिक व्यय के लिए रखने की अनुमति दी गई। 2. रयतवारी व्यवस्था मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसिडेंसी में लागू की गई थी, जहाँ किसानों (रयतों) को भूमि का मालिक माना गया और सरकार के साथ उनका सीधा भू-राजस्व समझौता हुआ, जिसमें लगान की दरें पूरी तरह स्थाई थीं और कभी संशोधित नहीं की जाती थीं। 3. महालवारी व्यवस्था को उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू किया गया था, जिसमें भू-राजस्व निर्धारण के लिए व्यक्तिगत किसानों के स्थान पर पूरे गाँव (महाल) को इकाई माना गया और सामूहिक रूप से गाँव के मुखिया या लंबरदार को राजस्व चुकाने की जिम्मेदारी सौंपी गई। 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों का दीर्घकालिक प्रभाव यह हुआ कि भारत का पारंपरिक कृषि ढांचा छिन्न-भिन्न हो गया, ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर अत्यधिक कर का बोझ बढ़ा, और कृषि का तेजी से वाणिज्यीकरण होने के बावजूद किसानों की क्रय शक्ति में भारी गिरावट आई। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों—स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी—के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा 1793 में लागू 'स्थाई बंदोबस्त' के तहत जमींदारों को भूमि का स्थायी स्वामी बना दिया गया, जहाँ राजस्व की दरें इतनी अधिक थीं कि 'सूर्यास्त कानून' (Sunset Law) के कठोर प्रावधानों के कारण शुरुआती वर्षों में ही कई पारंपरिक जमींदारों की संपत्तियां नीलाम हो गईं। 2. थॉमस मुनरो द्वारा मद्रास प्रेसीडेंसी में बड़े पैमाने पर लागू 'रयतवारी व्यवस्था' में बिचौलियों का पूर्ण रूप से उन्मूलन कर दिया गया और किसानों (रयतों) को भूमि का पूर्ण और सुरक्षित स्वामित्व दे दिया गया, जिससे किसानों पर महाजनों का आर्थिक शिकंजा पूरी तरह समाप्त हो गया। 3. हॉल्ट मैकेंज़ी और रॉबर्ट मार्टिन बर्ड द्वारा उत्तर-पश्चिम प्रांत और पंजाब के क्षेत्रों में विकसित 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत व्यक्तिगत किसानों को अलग से उत्तरदायी न मानकर पूरे ग्राम समुदाय या 'महाल' को संयुक्त रूप से भू-राजस्व भुगतान के लिए उत्तरदायी ठहराया गया। 4. इन तीनों भू-राजस्व प्रणालियों के संयुक्त परिणाम के रूप में भारतीय कृषि अर्थव्यवस्था का तेजी से वाणिज्यीकरण (Commercialization of Agriculture) हुआ, जिसके फलस्वरूप खाद्यान्न फसलों के स्थान पर नकदी फसलों (जैसे नील, कपास, अफीम) के उत्पादन को बल मिला। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.