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History of India
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दिल्ली सल्तनत के विभिन्न राजवंशों और उनके प्रशासनिक ढाँचे के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. गुलाम वंश के सुल्तान इल्तुतमिश ने केंद्रीय प्रशासन को सुदृढ़ करने के लिए 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालीस तुर्क सरदारों का दल) का गठन किया था, जिसे बाद में बलवान ने अपनी केंद्रीय सत्ता को सर्वोच्च बनाने के लिए पूरी तरह समाप्त कर दिया।
  2. 2. खिलजी वंश के दौरान अलाउद्दीन खिलजी ने भू-राजस्व व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने हेतु बिस्वा के आधार पर भूमि की पैमाइश कराई और नगद के रूप में कर वसूली पर जोर दिया, साथ ही सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को जागीर के बदले नकद वेतन देने की परंपरा को संस्थागत रूप दिया।
  3. 3. तुगलक वंश के सुल्तान फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत काल की जागीरदारी प्रथा को आनुवंशिक बना दिया और सैनिकों तथा अमीरों को वेतन के रूप में नगद देने की बजाय 'वजह' (लगान के अधिकार वाली पर्ची) अथवा जागीरें देना पुनः प्रारंभ कर दिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 गलत है क्योंकि इल्तुतमिश ने 'तुर्कान-ए-चहलगानी' का गठन किया था, किंतु गयासुद्दीन बलबन ने इस शक्तिशाली दल को समाप्त किया था, न कि इसे पूरी तरह बलवान ने (बलवान ने स्वयं इसे नष्ट किया था ताकि उसके विरोध में कोई संगठित शक्ति न रहे)। कथन 2 सही है कि अलाउद्दीन खिलजी ने बिस्वा के आधार पर भूमि पैमाइश (पैमाइश को 'मसाहत' कहा जाता था) की शुरुआत की और सैनिकों को नकद वेतन देना अनिवार्य किया। कथन 3 भी सही है कि फिरोजशाह तुगलक ने सेना और प्रशासनिक अधिकारियों को नगद वेतन देने की व्यवस्था को लगभग समाप्त कर दिया और इसके स्थान पर जागीर तथा 'इक्ता' प्रणाली को आनुवंशिक बना दिया। दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक विकास के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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