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History of India
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मध्यकालीन भारत के इतिहास में 'भक्ति और सूफी आंदोलन' के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. सूफी मत के 'चिशती सिलसिले' के संतों ने राज्य की राजनीति से पूर्ण दूरी बनाए रखने और शासकों से उपहार या वित्तीय सहायता स्वीकार न करने के अपने कठोर नियम का पालन किया, जिसके कारण शेख निजामुद्दीन औलिया ने सल्तनत के कई सुल्तानों के आमंत्रण को अस्वीकार कर दिया था।
- 2. बारहवीं शताब्दी में दक्षिण भारत में उत्पन्न 'वीरशैव आंदोलन' (लिंगायत संप्रदाय), जिसका नेतृत्व बासवण्णा और उनके साथियों ने किया था, ने ब्राह्मणवादी वर्चस्व, जाति व्यवस्था तथा पुनर्जन्म के सिद्धांतों को अस्वीकार करते हुए वैदिक अनुष्ठानों का कड़ा विरोध किया।
- 3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने वाले रामानंद ने अपनी शिक्षाओं के प्रसार के लिए संस्कृत भाषा के स्थान पर जनसाधारण की भाषा (हिंदी/अवधी) को अपनाया और अपनी शिष्यों की मंडली में जातिगत भेदों को नजरअंदाज करते हुए रैदास (चमार), कबीर (जुलाहा) और सेना (नाई) जैसे व्यक्तियों को शामिल किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उपर्युक्त तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। सूफी मत का चिशती सिलसिला राजनीति से दूर रहने और दरबारी प्रभावों से बचने के लिए प्रसिद्ध था; शेख निजामुद्दीन औलिया ने इसी कारण सुल्तानों से दूरी बनाए रखी। बासवण्णा द्वारा प्रारंभ किया गया वीरशैव (लिंगायत) आंदोलन जातिगत और ब्राह्मणवादी मान्यताओं के विरुद्ध एक सशक्त सुधारवादी कदम था। वहीं, रामानंद ने भक्ति को आम जनता तक पहुँचाने के लिए क्षेत्रीय भाषाओं का प्रयोग किया और समाज के तथाकथित निम्न वर्गों से शिष्यों को चुनकर समतावादी दृष्टिकोण का परिचय दिया। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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1857 के महान विद्रोह की असफलता के मुख्य कारणों और नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस विद्रोह का स्वरूप मुख्य रूप से अखिल भारतीय और सर्वसमावेशी था, जिसमें देश के सभी वर्गों, क्षेत्रों और राजाओं ने एक केंद्रीय योजना के तहत एक साथ भाग लिया था।
2. विद्रोही नेताओं के पास आधुनिक सैन्य तकनीक, संचार साधनों और युद्ध सामग्री का अभाव था, तथा उनके पास अंग्रेजों की अनुशासित सेना का मुकाबला करने के लिए कोई एक केंद्रीय सर्वोच्च कमांडर या सुसंगत रणनीतिक योजना नहीं थी।
3. भारत के अधिकांश शिक्षित मध्यम वर्ग, बड़े जमींदारों, साहूकारों और सिंधिया, होलकर तथा हैदराबाद जैसे कई प्रमुख देशी रियासतों के शासकों ने विद्रोहियों का साथ देने के बजाय ब्रिटिश साम्राज्य का सक्रिय समर्थन किया था।
4. विद्रोहियों के पास ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेंकने के बाद स्थापित होने वाली एक आधुनिक वैकल्पिक राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था का कोई स्पष्ट वैचारिक खाका नहीं था, और यह आंदोलन मुख्य रूप से पुरानी सामंतवादी व्यवस्था को पुनः स्थापित करने तक सीमित था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों—विशेषकर पटना, दानापुर, आरा, मुजफ्फरपुर और छपरा—में हुई गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिनके विद्रोह का मुख्य केंद्र एक स्थानीय अफीम की कोठी और दुकान थी, और कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर उन्हें सार्वजनिक रूप से फांसी दी गई थी।
2. दानापुर छावनी के 7वीं, 8वीं और 40वीं रेजिमेंट के भारतीय सैनिकों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और सोन नदी पार कर सीधे शाहबाद (आरा) पहुंचे, जहाँ उन्होंने बाबू वीर कुंवर सिंह के नेतृत्व में एक सशक्त सैन्य गठबंधन का निर्माण किया।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा क्षेत्रों में विद्रोहियों के दमन के लिए ब्रिटिश सरकार ने किसी भी सैन्य कार्रवाई से परहेज किया क्योंकि वहाँ के स्थानीय जमींदारों ने पूरी तरह से ब्रिटिश शासन के प्रति अपनी निष्ठा व्यक्त करते हुए विद्रोहियों को शरण देने से इंकार कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की प्रशासनिक, सांस्कृतिक एवं सैन्य उपलब्धियों के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हर्षवर्द्धन के शासनकाल में कन्नौज को 'महासंविधानिक' केंद्र के रूप में प्रतिष्ठा प्राप्त हुई तथा चीनी यात्री ह्वेनसांग ने हर्ष द्वारा प्रयाग की सभा में दान दिए जाने और बौद्ध धर्म की महायान शाखा को विशेष संरक्षण प्रदान करने का विस्तृत वर्णन किया है।
2. पल्लव शासक महेन्द्रवर्मन् प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन मत का अनुयायी होने के बावजूद शैव संत अप्पर के प्रभाव से शैव धर्म अपना लिया, और उसके शासनकाल में महाबलीपुरम के प्रसिद्ध एकात्मक (मोनोलिथिक) रथ मंदिरों का निर्माण कार्य आरंभ हुआ था।
3. चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, और इस विजय का विस्तृत तथा प्रामाणिक उल्लेख कवि रवि कीर्ति द्वारा रचित 'ऐहोले प्रशस्ति' में प्राप्त होता है।
4. चोल सम्राट राजेंद्र प्रथम ने अपनी शक्तिशाली नौसेना के माध्यम से श्रीविजय साम्राज्य (सुमात्रा, जावा और मलय प्रायद्वीप) पर सफल सैन्य अभियान चलाया था, तथा गंगा नदी की घाटी तक अपनी सेना भेजने के कारण 'गंगैकोंडचोल' की उपाधि धारण की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय प्रशासनिक व्यवस्था, गुप्तचर तंत्र और अशोक के शासनकाल के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' में मौर्य प्रशासन के सर्वोच्च सत्रह अधिकारियों या विभागों को 'तीर्थ' कहा गया है, जिनकी नियुक्ति से पहले उनके चरित्र की शुद्धता की जाँच के लिए 'उपधा परीक्षण' किया जाता था।
2. मौर्यकालीन गुप्तचर प्रणाली में भ्रमण करने वाले गुप्तचरों को 'संस्था' कहा जाता था, जबकि एक ही स्थान पर संस्थागत रूप से रहकर कार्य करने वाले गुप्तचरों को 'संचारा' की श्रेणी में रखा गया था।
3. अशोक के धम्म महामात्रों की नियुक्ति उसके राज्याभिषेक के 14वें वर्ष में की गई थी, जिनका मुख्य कार्य विभिन्न धार्मिक संप्रदायों के बीच सद्भाव बढ़ाना और जनता के नैतिक व आध्यात्मिक जीवन की देखरेख करना था।
4. मौर्य प्रशासन में 'सीताध्यक्ष' राजकीय कृषि भूमि के प्रबंधन और कृषि कार्यों की देखरेख करने वाला प्रमुख अधिकारी होता था, जबकि राज्य द्वारा संचालित व्यापार और वाणिज्य के नियंत्रण का कार्य 'पण्यध्यक्ष' के अधीन था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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