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History of India
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वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान बंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी की बैठक में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित हुआ, और इस आंदोलन की शुरुआत के साथ ही महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' (Do or Die) का आह्वान किया था।
- 2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1939 में त्रिपुरी संकट के उपरांत कांग्रेस अध्यक्ष पद से त्यागपत्र देने के बाद 'फॉरवर्ड ब्लॉक' की स्थापना की थी, तथा वे भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के भीतर रहकर इस आंदोलन के मुख्य भूमिगत संचालक के रूप में कार्य कर रहे थे।
- 3. आज़ाद हिंद फौज (INA) की स्थापना मूल रूप से कैप्टन मोहन सिंह के प्रयासों से हुई थी, जिसे बाद में रास बिहारी बोस और सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में पुनर्गठित किया गया तथा सिंगापुर में 'अर्जी हुकूमत-ए-आज़ाद हिंद' की स्थापना की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 8 अगस्त 1942 को बंबई के ग्वालिया टैंक मैदान में कांग्रेस के ऐतिहासिक सत्र में 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव को स्वीकृति मिली और महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' का नारा दिया था। कथन 2 गलत है क्योंकि सुभाष चंद्र बोस वर्ष 1941 की शुरुआत में ही ब्रिटिश नजरबंदी से बचकर जर्मनी भाग गए थे और वे भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के भीतर भूमिगत संचालक नहीं थे (भूमिगत गतिविधियों का संचालन राम मनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन, अरुणा आसफ अली और जयप्रकाश नारायण जैसे नेताओं ने किया था)। कथन 3 सही है, आज़ाद हिंद फौज का प्रारंभिक विचार कैप्टन मोहन सिंह के मन में आया था और बाद में रास बिहारी बोस तथा सुभाष चंद्र बोस ने इसका पुनर्गठन कर सिंगापुर में अनंतिम सरकार बनाई थी। विकिपीडिया संदर्भ
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया तथा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) के नवीन पद का सृजन किया गया।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (जिसे इलाहाबाद दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया) के माध्यम से भारतीय रियाسतों को भविष्य में विलय करने की नीति को औपचारिक रूप से त्यागने का आश्वासन दिया गया तथा देशी राजाओं को गोद लेने के अधिकार (दत्तक पुत्र की अनुमति) को मान्यता दी गई।
3. इस घोषणा में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया कि भारत के सभी नागरिकों को उनकी नस्ल, धर्म और रंग के भेदभाव के बिना उनकी योग्यता के आधार पर उच्च सरकारी सेवाओं में बिना किसी पक्षपात के अवसर प्रदान किए जाएंगे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मुगल स्थापत्य कला का "स्वर्ण युग" किसके शासनकाल को माना जाता है?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान फैजाबाद, बरेली और इलाहाबाद में विद्रोह के दमन और नेतृत्व के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह द्वारा किया गया था, जिन्हें अंग्रेजों ने पवाया के राजा के विश्वासघात के बाद पराजित कर मार डाला था।
2. बरेली में रोहिलखंड के विद्रोह का नेतृत्व खान बहादुर खान ने किया था, जिन्हें विद्रोह के दमन के दौरान ब्रिटिश सेनापति जनरल कैंपबेल द्वारा पराजित किया गया और बाद में बरेली में ही सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई।
3. इलाहाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी लियाकत अली को ब्रिटिश सेनापति कर्नल जेम्स नीलगिरी (कर्नल नील) ने बुरी तरह पराजित कर इस सामरिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर पर पुनः अधिकार कर लिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन की पृष्ठभूमि में वर्ष 1947 में प्रस्तुत माउंटबेटन योजना (3 जून योजना) तथा उससे संबंधित प्रावधानों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माउंटबेटन योजना के तहत यह प्रावधान किया गया था कि बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं में हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के विधायक अलग-अलग बैठक कर यह निर्णय लेंगे कि प्रांत का विभाजन किया जाना चाहिए या नहीं।
2. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक के साथ मिलने का निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराए जाने का स्पष्ट प्रावधान इस योजना में किया गया था।
3. भारत और पाकिस्तान के बीच परिसंपत्तियों, दायित्वों तथा अंतरराष्ट्रीय सीमाओं के निर्धारण के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में गठित 'सीमा आयोग' (Boundary Commission) को 15 अगस्त 1947 से पूर्व ही अपनी रिपोर्ट सार्वजनिक करने का निर्देश दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक काल (नरम दल) की कार्यप्रणाली, उनकी राजनीतिक मान्यताओं तथा इसके विरोध में उभरने वाले उग्रवादी (गरम दल) विचारों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. प्रारंभिक कांग्रेस के नेताओं (जैसे- दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और सुरेंद्रनाथ बैनर्जी) की यह दृढ़ मान्यता थी कि ब्रिटिश शासन मूलतः न्यायप्रिय है और वे 'प्रेरित याचिका, प्रार्थना और विरोध' (Prayer, Petition and Protest) की पद्धति के माध्यम से भारतीयों के राजनीतिक अधिकारों की मांग करते थे।
2. वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन के उपरांत उत्पन्न राजनीतिक असंतोष के दौरान, गरम दल के नेताओं (लाल-बाल-पाल और अरबिंदो घोष) ने कांग्रेस के मंच से पहली बार औपनिवेशिक स्वराज्य के स्थान पर 'पूर्ण स्वतंत्रता' (संपूर्ण राजनीतिक मुक्ति) को अपना तात्कालिक लक्ष्य घोषित कर दिया था।
3. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में नरम दल और गरम दल के बीच अध्यक्ष पद के चुनाव तथा स्वदेशी आंदोलन के प्रस्ताव को लेकर तीव्र मतभेद उभरे, जिसके परिणामस्वरूप कांग्रेस का विभाजन हो गया और उग्रवादी नेताओं को कांग्रेस से निष्कासित कर दिया गया।
4. उग्रवादी (गरम दल) विचारधारा के उदय का एक प्रमुख कारण लॉर्ड कर्ज़न की प्रतिक्रियावादी नीतियां थीं, जिसके तहत कलकत्ता कॉर्पोरेट अधिनियम, विश्वविद्यालय अधिनियम और अंततः बंगाल का विभाजन शामिल था, जिसने मध्यम वर्ग का ब्रिटिश न्याय पर से विश्वास पूरी तरह उठा दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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