त्वरित लिंक्स
History of India
15 views
वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां के नेतृत्व तथा उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. नाना साहब को अंग्रेजों द्वारा उनके पिता पेशवा बाजीराव द्वितीय की पेंशन से वंचित किए जाने और ब्रिटिश सत्ता द्वारा उनके उपाधि एवं अधिकारों को अस्वीकार करने के पश्चात उन्होंने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभाला तथा स्वयं को पेशवा घोषित किया।
- 2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और कूटनीतिक रणनीतिकार थे, ने ब्रिटिश नीतियों के विरुद्ध तुर्की और अन्य अंतरराष्ट्रीय ताकतों से संपर्क साधने का प्रयास किया था तथा कानपुर में सैन्य अभियानों के दौरान अंग्रेजों के साथ कूटनीतिक वार्ताओं में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- 3. तात्या टोपे ने कानपुर में नाना साहब की सेना के सैन्य कमांडर के रूप में कार्य करते हुए ब्रिटिश जनरल सर कॉलिन कैंपबेल को निर्णायक रूप से पराजित किया और कानपुर पर स्थायी रूप से अधिकार स्थापित कर लिया, जिसे अंग्रेजों ने कभी पुनः नहीं जीता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब (पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र) ने अंग्रेजों द्वारा पेंशन बंद किए जाने के बाद विद्रोह का नेतृत्व किया और स्वयं को पेशवा घोषित किया। अजीमुल्ला खां उनके चतुर सलाहकार और कूटनीतिक रणनीतिकार थे, जिन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समर्थन जुटाने का प्रयास किया था। हालाँकि, तीसरा कथन गलत है क्योंकि तात्या टोपे ने उत्कृष्ट सैन्य नेतृत्व अवश्य प्रदान किया था, किंतु ब्रिटिश जनरल कॉलिन कैंपबेल ने बाद में भारी सैन्य बल के साथ कानपुर पर पुनः अधिकार कर लिया था और तात्या टोपे को अंततः मध्य भारत की ओर प्रस्थान करना पड़ा था। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
1857 के महान विद्रोह की असफलता के मुख्य कारणों और नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस विद्रोह का स्वरूप मुख्य रूप से अखिल भारतीय और सर्वसमावेशी था, जिसमें देश के सभी वर्गों, क्षेत्रों और राजाओं ने एक केंद्रीय योजना के तहत एक साथ भाग लिया था।
2. विद्रोही नेताओं के पास आधुनिक सैन्य तकनीक, संचार साधनों और युद्ध सामग्री का अभाव था, तथा उनके पास अंग्रेजों की अनुशासित सेना का मुकाबला करने के लिए कोई एक केंद्रीय सर्वोच्च कमांडर या सुसंगत रणनीतिक योजना नहीं थी।
3. भारत के अधिकांश शिक्षित मध्यम वर्ग, बड़े जमींदारों, साहूकारों और सिंधिया, होलकर तथा हैदराबाद जैसे कई प्रमुख देशी रियासतों के शासकों ने विद्रोहियों का साथ देने के बजाय ब्रिटिश साम्राज्य का सक्रिय समर्थन किया था।
4. विद्रोहियों के पास ब्रिटिश सत्ता को उखाड़ फेंकने के बाद स्थापित होने वाली एक आधुनिक वैकल्पिक राजनीतिक और प्रशासनिक व्यवस्था का कोई स्पष्ट वैचारिक खाका नहीं था, और यह आंदोलन मुख्य रूप से पुरानी सामंतवादी व्यवस्था को पुनः स्थापित करने तक सीमित था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारणों और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश सेना द्वारा पुरानी 'ब्राउन बैस' बन्दूक के स्थान पर 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी असंतोष पैदा कर दिया था।
2. बैरकपुर छावनी की 34वीं नेटिव इन्फैंट्री के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के खिलाफ खुलेआम बगावत की और ब्रिटिश अधिकारियों लेफ्टिनेंट बॉग तथा सार्जेंट ह्यू हडसन पर हमला कर उन्हें मौत के घाट उतार दिया।
3. इस घटना के तुरंत बाद ब्रिटिश प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मंगल पांडे को 8 अप्रैल 1857 को निर्धारित तिथि से पहले ही बैरकपुर में सार्वजनिक रूप से फांसी पर लटका दिया था।
4. चर्बी वाले कारतूसों के विरोध में सबसे पहले आधिकारिक रूप से बगावत करने वाली और नए कारतूसों का इस्तेमाल करने से पूरी तरह इनकार करने वाली पहली रेजिमेंट मेरठ की 3rd लाइट कैवलरी थी, जिसने जनवरी 1857 में ही विद्रोह कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
1857 के महान विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (1 नवंबर 1858) के प्रावधानों एवं दूरगामी परिणामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम द्वारा 'डबल गवर्नमेंट' (बोर्ड ऑफ कंट्रोल और कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स) की प्रणाली को समाप्त कर दिया गया तथा भारत के शासन का संपूर्ण नियंत्रण ब्रिटिश कैबिनेट के एक सदस्य 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) को सौंप दिया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (India Council) का गठन किया गया।
2. इलाहाबाद दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा उद्घाटित क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में यह आधिकारिक रूप से घोषित किया गया कि ब्रिटिश साम्राज्य अब अपने भौगोलिक विस्तार की नीति (व्यपगत सिद्धांत और राज्य-हरण की नीति) को त्यागता है और भारतीय राजाओं के दत्तक पुत्र लेने के अधिकार को मान्यता देता है।
3. घोषणा में यह भी आश्वस्त किया गया कि लोक सेवाओं (Civil Services) में प्रवेश और उच्च पदों पर नियुक्तियों के समय नस्ल, रंग या धर्म को आधार नहीं बनाया जाएगा, तथा भारतीयों को उनकी योग्यता के अनुसार निष्पक्ष रूप से अवसर दिए जाएंगे।
4. इस घोषणा के उपरांत ब्रिटिश प्रशासनिक नीति में उदारवादी सुधारों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी गई, जिसके तहत सेना के पुनर्गठन में भारतीय सैनिकों का अनुपात बढ़ाकर उन्हें सभी सामरिक रूप से संवेदनशील और उच्च पदों पर नियुक्त किया गया ताकि भविष्य में ऐसा कोई विद्रोह दोबारा न हो सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मुगल चित्रकला में "छवि चित्र" (Portraits) और "प्राकृतिक दृश्यों" की शुरुआत किसके काल में हुई?
→
भक्ति और सूफी आंदोलन के दार्शनिक तथा वैचारिक विकास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शंकराचार्य के 'अद्वैत वेदांत' के विपरीत, रामानुजाचार्य ने 'विशिष्टाद्वैत' दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार ब्रह्म और व्यक्तिगत आत्मा (जीव) एक समान नहीं हैं, बल्कि जीव ब्रह्म का ही एक अंश है और मोक्ष प्राप्ति के लिए प्रपत्ति (पूर्ण आत्मसमर्पण) मार्ग पर बल दिया गया।
2. सूफी सिलसिलों में 'बा-शरा' (इस्लामी शरीयत कानूनों के बंधनों का पालन करने वाले) और 'बे-शरा' (शरीयत के कठोर नियमों से स्वतंत्र या मस्त कलंदर) दोनों प्रकार की धाराएँ भारत में सक्रिय थीं, जिनमें चिश्ती सिलसिला 'बा-शरा' श्रेणी के अंतर्गत आता था, किंतु उसने स्थानीय भारतीय सांस्कृतिक परिवेश और संगीत (समां) को अपनाया।
3. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने वाले संत कबीर और गुरु नानक दोनों ने निर्गुण भक्ति का समर्थन किया और जाति-पाँति, बाह्य आडंबरों तथा मूर्तिपूजा का कड़ा विरोध किया, किंतु गुरु नानक ने कबीर की तुलना में गृहस्थ जीवन को त्यागकर कठोर तपस्या और संन्यास ग्रहण करने पर अधिक बल दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.