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History of India
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ऋग्वैदिक काल एवं उत्तर वैदिक काल की राजनीतिक, आर्थिक और धार्मिक संरचना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में राजा की शक्ति पर 'सभा' और 'समिति' नामक संस्थाएँ नियंत्रण रखती थीं, और राजा को अपनी सेना रखने के लिए कर संग्रह करने का नियमित अधिकार प्राप्त था जिसे 'बलि' कहा जाता था।
- 2. उत्तर वैदिक काल में लोहे के व्यापक प्रयोग (जिसे 'श्याम अयस' कहा गया है) ने कृषि अर्थव्यवस्था को सुदृढ़ किया, जिसके फलस्वरूप गोत्र प्रथा का उदय हुआ और वर्ण व्यवस्था अधिक कठोर होकर जन्म पर आधारित हो गई।
- 3. ऋग्वैदिक काल के प्रमुख देवता इंद्र और अग्नि थे, जिनकी उपासना मुख्य रूप से प्राकृतिक शक्तियों के रूप में की जाती थी, जबकि उत्तर वैदिक काल में प्रजापति (सृष्टिकर्ता) सर्वोच्च देवता के रूप में उभरे और यज्ञीय अनुष्ठान अत्यंत जटिल हो गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 असत्य है क्योंकि ऋग्वैदिक काल में 'बलि' वास्तव में प्रजा द्वारा राजा को दिया जाने वाला स्वेच्छा से दिया गया उपहार या कर था, लेकिन उस समय राजा के पास कोई स्थायी सेना नहीं थी और न ही कोई नियमित कर प्रणाली (Taxation System) अस्तित्व में थी। कथन 2 और 3 सत्य हैं; उत्तर वैदिक काल में लोहे के प्रयोग से कृषि में क्रांति आई और वर्ण व्यवस्था जटिल हो गई। इस संदर्भ में अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
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क्रांतिकारी आंदोलन के द्वितीय चरण और प्रमुख संगठनों (विशेषकर हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन - HSRA और गदर पार्टी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में गठित 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) ने अपने घोषणापत्र में पहली बार समाजवाद के दृष्टिकोण को स्पष्ट रूप से शामिल किया और सशस्त्र संघर्ष के माध्यम से 'सोशलिस्ट रिपब्लिक' की स्थापना को अपना मुख्य लक्ष्य बनाया।
2. लाला हरदयाल और सोहन सिंह भकना द्वारा वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'गदर पार्टी' ने 'ग़दर' नामक साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन किया, जिसका प्रत्येक अंक ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध खुले विद्रोह का आह्वान करता था और इसके पहले पृष्ठ पर 'अंग्रेज़ी राज का कच्चा चिट्ठा' शीर्षक से लेख छापे जाते थे।
3. वर्ष 1929 में भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा केंद्रीय विधानसभा (Central Legislative Assembly) में बम फेंकने का मुख्य उद्देश्य किसी भी व्यक्ति की जान लेना नहीं था, बल्कि 'बधिरों को सुनना' था, ताकि वे जनहित के विरुद्ध लाए गए 'पब्लिक सेफ्टी बिल' और 'ट्रेड डिस्प्यूट्स बिल' जैसे दमनकारी कानूनों के विरोध में अपनी आवाज़ देशवासियों तक पहुँचा सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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हुमायूँ का मकबरा कहाँ स्थित है?
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गुप्तकालीन राजनीतिक व्यवस्था, प्रशासनिक संरचना और आर्थिक जीवन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में 'कुमारमात्य' साम्राज्य के सर्वोच्च और सबसे महत्वपूर्ण अधिकारी होते थे, जिनका चयन मुख्य रूप से मंत्रिपरिषदों के माध्यम से वंशीय आधार पर न होकर केवल उच्च प्रशासनिक योग्यता के आधार पर सम्राट द्वारा किया जाता था।
2. इस काल में भूमि राजस्व की दर उपज का सामान्यतः 1/6 से 1/4 भाग हुआ करती थी, तथा कृषि भूमि के वर्गीकरण के अंतर्गत 'क्षेत्र' (जुतने योग्य भूमि), 'वास्तु' (वास योग्य भूमि), और 'अपहता' (जंगली या बिना जोती गई भूमि) शब्दों का उल्लेख मिलता है।
3. गुप्त सम्राटों द्वारा जारी किए गए सोने के सिक्के (जिन्हें 'दिनार' कहा जाता था) कुषाणों के स्वर्ण सिक्कों की तुलना में अधिक शुद्धता और कलात्मक सुंदरता से परिपूर्ण थे, जो इस काल के सुदृढ़ और समृद्ध वाणिज्यिक नेटवर्क को दर्शाते हैं।
4. गुप्त प्रशासन में 'संदिविग्रहिक' युद्ध और शांति मामलों का सर्वोच्च अधिकारी होता था, जो आवश्यकता पड़ने पर विदेश नीति का संचालन और युद्ध की घोषणा या संधि के मामलों में भी महत्वपूर्ण परामर्शदाता की भूमिका निभाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बंगाल विभाजन एवं स्वदेशी आंदोलन (1905) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा सर्वप्रथम जुलाई 1905 में की गई थी, और इस विभाजन का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक सुधार बताना था, जबकि वास्तविक उद्देश्य बंगाल में उभरते हुए राष्ट्रवादी राजनीतिक प्रभाव को कमजोर करना और सांप्रदायिक आधार पर विभाजन करना था।
2. 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित एक ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई और प्रसिद्ध 'बॉयकॉट प्रस्ताव' (बहिष्कार संकल्प) पारित किया गया।
3. बंगाल विभाजन के प्रभावी होने के दिन (16 अक्टूबर 1905) को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, नंगे पाँव जुलूस निकाले और रविंद्रनाथ टैगोर के आह्वान पर एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर एकता का प्रदर्शन किया।
4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (National Council of Education) की स्थापना का मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली का बहिष्कार कर तकनीकी और साहित्यिक शिक्षा के लिए स्वदेशी विश्वविद्यालयों की स्थापना करना था, किंतु इस आंदोलन का प्रसार केवल बंगाल तक ही सीमित रहा और देश के अन्य हिस्सों में इसका कोई प्रभाव नहीं पड़ा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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इब्न बतूता के अनुसार, मोहम्मद बिन तुगलक के दरबार में कितने "वजीर" होते थे?
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