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History of India
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वर्ष 1857 के विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी के अतिरिक्त अवध का भी विलय किया गया था, जिससे वहाँ के नवाब और बड़ी संख्या में आश्रित सैनिकों तथा दरबारी कर्मचारियों में తీవ్ర आक्रोश उत्पन्न हुआ।
- 2. ब्रिटिश आर्थिक नीतियों के कारण पारंपरिक भारतीय हस्तशिल्प और हथकरघा उद्योगों का पतन हुआ, जिससे कारीगर बेरोजगार हो गए और भूमि पर दबाव अत्यधिक बढ़ गया।
- 3. वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) द्वारा हिंदू धर्म से ईसाई धर्म में परिवर्तित होने वाले व्यक्ति को पैतृक संपत्ति से वंचित करने के प्रावधान को समाप्त कर दिया गया, जिसे रूढ़िवादी भारतीय समाज ने धर्म परिवर्तन का षड्यंत्र माना।
- 4. वर्ष 1856 में पारित 'सामान्य सेवा उपनियम अधिनियम' (General Service Enlistment Act) के तहत भारतीय सिपाहियों के लिए यह अनिवार्य कर दिया गया कि आवश्यकता पड़ने पर उन्हें समुद्र पार भी सेवा देनी होगी, जिससे तत्कालीन सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँची।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि लॉर्ड डलहौजी ने 'व्यपगत का सिद्धांत' (डिफ़ॉल्ट या हड़प नीति) के अंतर्गत सतारा, जैतपुर, संबलपुर, बघाट, उदयपुर, झाँसी और नागपुर का विलय किया था, किंतु 'अवध' का विलय वर्ष 1856 में कुशासन (Misgovernance) के आरोप पर वाजिद अली शाह के अधीन किया गया था, न कि डॉक्ट्रिन ऑफ़ लैप्स के तहत। कथन 2, 3 और 4 पूर्णतः सत्य हैं। वर्ष 1850 का धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम और 1856 का सामान्य सेवा उपनियम अधिनियम ने सामाजिक और धार्मिक असंतोष को चरम पर पहुँचा दिया था। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इल्तुतमिश ने सल्तनत काल में पहली बार शुद्ध अरबी के सिक्के—चांदी का 'टका' और तांबे का 'जीतल'—प्रचलित किए, तथा प्रशासनिक सुदृढ़ता के लिए 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालीस गुलाम सरदारों का दल) का गठन किया।
2. अलाउद्दीन खिलजी ने साम्राज्य की आर्थिक स्थिति पर नियंत्रण रखने और बड़ी स्थायी सेना के रखरखाव के लिए बाजार नियंत्रण प्रणाली लागू की, जिसके तहत 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' जैसे अधिकारियों की नियुक्ति की गई तथा नगद वेतन के स्थान पर भूमि अनुदान (इकता) प्रथा को पूर्ण रूप से समाप्त कर दिया गया।
3. फिरोजशाह तुगलक ने किसानों के आर्थिक कल्याण के लिए कृषि विभाग 'दीवान-ए-कोही' की स्थापना की और सिंचाई की सुविधा के लिए अनेक नहरों का निर्माण कराया, साथ ही शरियत के विरुद्ध वसूले जाने वाले 24 प्रकार के कष्टदायक करों को समाप्त कर केवल चार प्रकार के वैध कर—खराज, जकात, जिजिया और खुम्स—ही रखे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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जहाँगीर के समय आने वाला यात्री:
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मुगल साम्राज्य का वास्तविक संस्थापक:
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भोंसले (अप्पा साहब) को किस युद्ध में अंग्रेजों ने पराजित किया था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका तथा उससे जुड़े ऐतिहासिक घटनाक्रम के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व संभाला और ब्रिटिश रेजीडेंसी की घेराबंदी के दौरान सैन्य संचालन का प्रभावी निर्देशन किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेनापति हेनरी लॉरेंस की सेना को पराजित करने में प्रमुख सैन्य भूमिका निभाई।
3. लखनऊ के पतन के उपरांत बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश सेना के समक्ष आत्मसमर्पण कर दिया और ब्रिटिश सरकार से पेंशन स्वीकार कर कलकत्ता में निवास करने लगीं।
4. ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अंततः गोरखा रेजिमेंट और अन्य सैन्य टुकड़ियों की सहायता से मार्च 1858 में लखनऊ पर पुनः पूर्ण नियंत्रण स्थापित किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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