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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों तथा रणनीतियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज द्वारा झाँसी की घेराबंदी किए जाने के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई ने साहसपूर्वक किले की रक्षा की और अंततः तात्या टोपे की संयुक्त सेना के सहयोग से कालपी की ओर प्रस्थान किया, जहाँ तात्या टोपे के साथ मिलकर उन्होंने अंग्रेजों के विरुद्ध भीषण संघर्ष किया।
  2. 2. कालपी के पतन के पश्चात रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने असाधारण सैन्य कौशल का परिचय देते हुए ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया और सिंधिया राजवंश के शासक जयाजीराव सिंधिया को ग्वालियर से खदेड़कर वहाँ राव साहब (नारायण राव) के नेतृत्व में मराठा सत्ता स्थापित की।
  3. 3. ग्वालियर के पतन के अंतिम चरण में कोटरा की लड़ाई (मुरार) के दौरान ब्रिटिश सेनाओं का सामना करते हुए तात्या टोपे वीरगति को प्राप्त हुए, जबकि रानी लक्ष्मीबाई अंग्रेजों के हाथों गिरफ्तार होकर आजीवन कारावास के लिए मांडू भेज दी गईं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान झाँसी और ग्वालियर क्षेत्र में विकिपीडिया संदर्भ रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण रही है। मार्च 1858 में ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज ने झाँसी को घेर लिया। रानी ने अदम्य साहस का परिचय देते हुए किले की रक्षा की, किंतु अंग्रेजों के भारी दबाव के कारण वे कालपी पहुँचीं जहाँ तात्या टोपे की सेना ने उनका साथ दिया। कालपी की पराजय के पश्चात दोनों ने ग्वालियर की ओर कूच किया और ग्वालियर के सिंधिया शासक (जो अंग्रेजों के प्रति निष्ठावान थे) को पराजित कर वहाँ राव साहब पेशवा की सरकार स्थापित की। ग्वालियर की अंतिम लड़ाई (मुरार/फुगैल) में रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं, जबकि तात्या टोपे वहाँ से बच निकलने में सफल रहे और बाद में मानसिंह के विश्वासघात के कारण पकड़े गए तथा उन्हें अप्रैल 1859 में फाँसी दी गई। अतः कथन 3 गलत है।
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1857 के महान विद्रोह के दौरान झांसी की रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे के सैन्य अभियानों तथा उनके संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. मार्च 1858 में सर ह्यूरोज के नेतृत्व में ब्रिटिश सेना द्वारा झांसी के किले को घेर लिए जाने के बाद, रानी लक्ष्मीबाई ने अत्यंत साहस के साथ वीरतापूर्वक रक्षा की और कालपी की ओर प्रस्थान किया, जहाँ वे तात्या टोपे की सेना के साथ मिल गईं। 2. कालपी के पतन के बाद रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे ने ग्वालियर की ओर कूच किया तथा वहाँ के सिंधिया शासक (जयाजीराव सिंधिया) को पराजित कर ग्वालियर के किले पर अधिकार कर लिया, जहाँ नाना साहब के नाम से रानी को पेशवा घोषित किया गया। 3. ग्वालियर के पतन की खबर मिलते ही ब्रिटिश जनरल ह्यूरोज ने तत्काल ग्वालियर की ओर प्रहार किया, और 18 जून 1858 को कोटा की सराय के पास लड़ते हुए रानी लक्ष्मीबाई वीरगति को प्राप्त हुईं। 4. रानी की मृत्यु के पश्चात तात्या टोपे नेपाल की तराई में चले गए, जहाँ ब्रिटिश सेना द्वारा उन्हें कभी पकड़ा नहीं जा सका और उन्होंने जीवनभर अज्ञातवास में ही स्वतंत्रता संग्राम की अलख जगाए रखी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? छठी शताब्दी ईसा पूर्व में प्राचीन भारतीय इतिहास के संदर्भ में 'सोलह महाजनपदों' और 'मगध साम्राज्य के उत्कर्ष' के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अंगुट निकाय और भगवती सूत्र जैसे बौद्ध तथा जैन ग्रंथ सोलह महाजनपदों की स्पष्ट सूची प्रदान करते हैं, जिनमें वज्जी और मल्ल संघ गणतंत्रात्मक शासन प्रणालियों के उदाहरण थे, जबकि अधिकांश अन्य महाजनपद राजतंत्रात्मक थे। 2. मगध साम्राज्य के उत्कर्ष में उसकी भौगोलिक स्थिति की महत्वपूर्ण भूमिका थी; इसकी प्रारंभिक राजधानी राजगृह (गिरिव्रज) पाँच पहाड़ियों से घिरी होने के कारण सामरिक दृष्टि से अत्यंत सुरक्षित थी, और बाद में पाटलिपुत्र को राजधानी बनाए जाने से यह गंगा, सोन और गंडक नदियों के जलमार्गों के नियंत्रण के कारण व्यापार और सैन्य संचालन में सर्वोपरि हो गया। 3. बिम्बिसार (श्रेणिक) ने अपने साम्राज्य विस्तार के लिए वैवाहिक संबंधों की नीति अपनाई, जिसके तहत उसने कौशल, मल्ल और वज्जी राजवंशों की राजकुमारियों से विवाह कर अपनी स्थिति मजबूत की, तथा अवंती के शासक प्रद्योत के साथ शत्रुता समाप्त करने के लिए अपने प्रसिद्ध राजवैद्य जीवक को उसकी चिकित्सा हेतु भेजा था। 4. महाप्रपद्म नंद को पुराणों में 'सर्वक्षत्रान्तक' (सभी क्षत्रियों का नाश करने वाला) और 'एकराट' की उपाधि से विभूषित किया गया है, और नंद वंश के शासनकाल में पहली बार कलिंग को मगध साम्राज्य में मिलाए जाने के प्रमाण हाथीगुम्फा अभिलेख से मिलते हैं। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सेना के विभिन्न अधिकारियों और उनके द्वारा विद्रोह दमन किए गए क्षेत्रों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए: 1. जॉन निकलसन: दिल्ली में विद्रोह का दमन 2. मेजर जनरल हैवलॉक: लखनऊ में विद्रोह का दमन 3. ह्यूरोज़: झाँसी और ग्वालियर में विद्रोह का दमन 4. कॉलिन कैंपबेल: कानपुर और रोहिलखंड में विद्रोह का दमन उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं? 1857 के महान विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत डलहौजी की 'व्यपगत का सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के तहत सतारा, नागपुर और झाँसी का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय किया गया था, तथा मुगल सम्राट के साथ होने वाले शाही बर्ताव और पदवी को समाप्त करने के लॉर्ड डलहौजी और लॉर्ड कैनिंग के निर्णयों ने भारतीय जनमानस में गहरी असुरक्षा और आक्रोश पैदा कर दिया था। 2. सामाजिक और धार्मिक कारणों में वर्ष 1850 में पारित 'धार्मिक अयोग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) था, जिसके माध्यम से यह प्रावधान किया गया कि ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को अपने पैतृक संपत्ति के उत्तराधिकार से वंचित नहीं किया जाएगा, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाईकरण का षड्यंत्र माना। 3. आर्थिक कारणों में अंग्रेजों की लैंड रेवेन्यू नीतियां—जैसे रैयतवाड़ी और महालवाड़ी व्यवस्था—थीं, जिनके कारण पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था का विघटन हुआ, कृषक वर्ग अत्यधिक कर्ज के बोझ तले दब गया और विलासिता की वस्तुओं के आयात तथा भारतीय हस्तशिल्प व कपड़ा उद्योग के विनाश ने कारीगरों को बेरोजगार कर दिया। 4. विद्रोह के तत्काल पूर्व सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत करने वाले सामाजिक-धार्मिक कारणों में वर्ष 1856 का 'सामान्य सेना सेवा अधिनियम' (General Service Enlistment Act) भी शामिल था, जिसके तहत बंगाल सेना के नए रंगरूटों के लिए आवश्यकता पड़ने पर समुद्र पार (विदेशों में) जाकर सेवा देना अनिवार्य कर दिया गया था, जिसे उस समय समाज में समुद्र पार जाना धर्म भ्रष्ट होना माना जाता था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश का विभाजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. 3 जून 1947 को प्रस्तुत माउंटबेटन योजना में भारत के विभाजन के साथ-साथ बंगाल और पंजाब की विधानसभाओं को अपनी-अपनी प्रांतीय विधानसभाओं के हिंदू और मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के सदस्यों की अलग-अलग बैठकें आयोजित कर यह तय करने का अधिकार दिया गया था कि वे विभाजन चाहते हैं या नहीं। 2. ब्रिटिश संसद द्वारा जुलाई 1947 में पारित 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' के प्रावधानों के तहत 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश भारत को दो स्वतंत्र प्रभुसत्ता संपन्न डोमिनियन—भारत और पाकिस्तान—में विभाजित कर दिया गया तथा दोनों देशों के लिए एक साझा गवर्नर-जनरल के रूप में लॉर्ड माउंटबेटन को ही बनाए रखने का निर्णय लिया गया था। 3. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसके साथ शामिल होना है, इसका निर्णय लेने के लिए बिना किसी जनमत संग्रह (Referendum) के सीधे स्थानीय ब्रिटिश कमिश्नर के विवेक पर छोड़ दिया गया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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