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History of India
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सत्रहवीं शताब्दी के मध्य में भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के संघर्ष और बस्तियों की स्थापना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1661 में पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन ऑफ ब्रैगांजा का विवाह ब्रिटेन के सम्राट चार्ल्स द्वितीय के साथ होने पर, पुर्तगालियों ने अंग्रेजों को 'बॉम्बे' (मुंबई) द्वीप उपहार या दहेज के रूप में दे दिया था, जिसे बाद में चार्ल्स द्वितीय ने मात्र 10 पाउंड के वार्षिक किराए पर ईस्ट इंडिया कंपनी को सौंप दिया था।
- 2. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना लुई चौदहवें के शासनकाल में वर्ष 1664 में वित्त मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से हुई थी, और फ्रांसीसियों ने भारत में अपनी पहली व्यापारिक कोठी फ्रैंक कैरो के निर्देशन में वर्ष 1668 में मसूलीपट्टम में स्थापित की थी।
- 3. डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) ने पुर्तगालियों को पराजित कर भारतीय प्रायद्वीप के कोचीन और नागपट्टम जैसे महत्वपूर्ण बंदरगाहों पर अधिकार कर लिया था, किंतु उन्होंने कभी भी भारतीय वस्त्रों के व्यापार में रुचि नहीं दिखाई और उनका संपूर्ण ध्यान केवल दक्षिण-पूर्व एशिया के मसाला द्वीपों पर केंद्रित रहा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि 1661 में पुर्तगाल की राजकुमारी कैथरीन और ब्रिटेन के चार्ल्स द्वितीय के विवाह के उपलक्ष्य में बॉम्बे अंग्रेजों को दहेज में मिला था, जिसे 1668 में चार्ल्स द्वितीय ने ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को किराए पर दे दिया था। कथन 2 भी सही है कि फ्रांसीसी कंपनी की स्थापना 1664 में कोल्बर्ट के प्रयासों से हुई और 1668 में मसूलीपट्टम में पहली कोठी बनी। कथन 3 गलत है क्योंकि डचों ने भारतीय वस्त्रों के व्यापार (विशेष रूप से कोरोमंडल तट से सूती वस्त्रों के निर्यात) में भारी रुचि दिखाई थी और वे इसके प्रमुख व्यापारी थे। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न भारतीय क्षेत्रों में ब्रिटिश सत्ता को पुनः स्थापित करने और विद्रोह का दमन करने वाले ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली - जॉन निकलसन
2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल
3. झाँसी और ग्वालियर - सर ह्यूरोज
4. बिहार (जगदीशपुर) - मेजर विलियम टेलर और विंसेंट आयर
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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मौर्य साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य कालीन केंद्रीय प्रशासन में कृषि विभाग के अध्यक्ष को 'सीताध्यक्ष' कहा जाता था, जो राजकीय कृषि भूमि (सीता भूमि) की देखरेख और प्रबंधन करता था।
2. अशोक के लघु शिलालेखों में प्रयुक्त 'रज्जुक' नामक अधिकारी का मुख्य कार्य न्याय प्रशासन के साथ-साथ ग्रामीण क्षेत्रों में भूमि की पैमाइश और जनपद में राजस्व का निर्धारण करना था।
3. मेगस्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन छह समितियों द्वारा संचालित होता था, जिनमें प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे और ये नगर की स्वच्छता, शिल्पियों, विदेशियों तथा व्यापारिक करों की देखरेख करते थे।
4. अशोक के शिलालेखों में उल्लिखित 'प्रतिवेदक' ऐसे विशेष गुप्तचर और रिपोर्टर अधिकारी होते थे जो राजा को प्रजा की स्थिति और साम्राज्य की हर गतिविधि की सूचना किसी भी समय सीधे देने के लिए अधिकृत थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक मूल्यांकन के संदर्भ में, विभिन्न इतिहासकारों द्वारा दिए गए प्रसिद्ध कथनों पर विचार कीजिए:
1. वी. डी. सावरकर ने अपनी पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस महान विद्रोह को सुनियोजित राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम की संज्ञा दी है।
2. डॉ. आर. सी. मजूमदार का यह प्रसिद्ध मत था कि 'तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।'-
3. सर जॉन लॉरेन्स और सी. ई. आर. सी. सी. रीस के अनुसार यह विद्रोह मूल रूप से केवल 'सिपाही विद्रोह' (Sepoy Mutiny) था, जिसका उद्देश्य राष्ट्रीय मुक्ति न होकर सैनिकों का पेशेवर असंतोष था।
4. टी. आर. होम्स का यह कथन था कि यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष' था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक और आर्थिक कारणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजनीतिक कारणों के तहत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति के माध्यम से सतारा, नागपुर और झांसी जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर लिया गया, तथा साथ ही लॉर्ड कैनिंग द्वारा मुगल सम्राट के उत्तराधिकारियों को लाल किले से बेदखल करने की घोषणा से पारंपरिक शासक वर्ग में तीव्र असंतोष फैल गया।
2. सामाजिक और धार्मिक कारणों में वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्ति को उसके पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित करने की पुरानी हिंदू कानून की बाधा को समाप्त कर दिया, जिसे रूढ़िवादी भारतीयों ने ईसाईकरण का षड्यंत्र माना।
3. आर्थिक कारणों के अंतर्गत ब्रिटिश औपनिवेशिक नीतियों ने भारत के पारंपरिक हस्तशिल्प और कुटीर उद्योगों को पूरी तरह तबाह कर दिया, जिससे दस्तकार और कारीगर बेरोजगार होकर कृषि पर आश्रित हो गए, और भू-राजस्व की कठोर प्रणालियों (जैसे स्थायी बंदोबस्त और रयतवारी) के कारण भारी कर के बोझ तले दबे किसान साहूकारों के शिकंजे में फंस गए।
4. सैन्य कारणों के साथ-साथ धार्मिक असंतोष का एक प्रमुख कारण वर्ष 1856 का 'सामान्य सेवा enlistment अधिनियम' (General Service Enlistment Act) था, जिसके तहत भारतीय सैनिकों (सिपाहियों) को कंपनी की आवश्यकतानुसार समुद्र पार (विदेश) जाकर भी सेवा देने के लिए कानूनी रूप से बाध्य किया गया, जिसे तत्कालीन धार्मिक मान्यताओं के अनुसार समुद्र पार जाने पर जाति और धर्म भ्रष्ट होने का खतरा माना गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विजयनगर काल में राजा के निजी सचिव को क्या कहा जाता था जो शाही आदेशों को लिखता था?
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