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History of India
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गदर पार्टी और हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन (HRA) तथा उसके वैचारिक एवं संगठनात्मक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. गदर पार्टी की स्थापना वर्ष 1913 में सैन फ्रांसिस्को में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाकना द्वारा की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य भारत में एक सशक्त सशस्त्र विद्रोह के माध्यम से ब्रिटिश औपनिवेशिक शासन को उखाड़ फेंकना था।
- 2. वर्ष 1924 में कानपुर में स्थापित 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) के संस्थापकों में सचिन्द्र नाथ सन्याल, रामप्रसाद बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद शामिल थे, और इस संगठन ने अपनी क्रांतिकारी गतिविधियों के वित्तपोषण के लिए वर्ष 1925 में प्रसिद्ध 'काकोरी ट्रेन डकैती' को अंजाम दिया था।
- 3. भगत सिंह और उनके सहयोगियों ने वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में HRA का पुनर्गठन करते हुए इसका नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया था, जिसमें समाजवादी विचारधारा को संगठन के मुख्य एजेंडे के रूप में शामिल किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। गदर पार्टी की स्थापना 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाकना के नेतृत्व में हुई थी। 1924 में कानपुर में सचिन्द्र नाथ सन्याल, रामप्रसाद बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद आदि ने मिलकर 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) की स्थापना की थी, जिसने 9 अगस्त 1925 को काकोरी कांड को अंजाम दिया। बाद में सितंबर 1928 में भगत सिंह और उनके साथियों ने दिल्ली के फिरोजशाह कोटला में इस संगठन का पुनर्गठन कर इसका नाम 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) रखा और वैज्ञानिक समाजवादी विचारों को अपनाया। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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1857 के महान विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश संसद द्वारा पारित 'भारत सरकार अधिनियम 1858' (Government of India Act 1858) और महारानी विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के माध्यम से भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन कर दिया गया और 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' तथा 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर' की दोहरी शासन प्रणाली को समाप्त कर उसके स्थान पर 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) का पद सृजित किया गया, जिसे सहायता के लिए 15 सदस्यीय परिषद प्रदान की गई।
2. महारानी विक्टोरिया की घोषणा (जिसे 'मैग्नाकार्टा' भी कहा जाता है) में यह स्पष्ट आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतों के साथ किए गए सभी संधियों और समझौतों का सम्मान करेगी तथा भविष्य में ब्रिटिश साम्राज्य का और अधिक विस्तार (Annexation) नहीं किया जाएगा।
3. इस घोषणा में धार्मिक सहिष्णुता की नीति अपनाते हुए यह गारंटी दी गई कि भारत के लोगों के सामाजिक और धार्मिक विश्वासों में कोई हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा, तथा नस्ल या धर्म के भेदभाव के बिना योग्यता के आधार पर लोक सेवाओं में भारतीयों को बिना किसी अंतर के उच्च पद प्रदान किए जाएंगे।
4. विद्रोह के दौरान अंग्रेजों के प्रति वफादारी दिखाने वाले देशी राजाओं और जमींदारों को 'दत्तक पुत्र' (Adopted Son) लेने के अधिकार को मान्यता दी गई, जिससे भविष्य में उत्तराधिकार के संकट को समाप्त किया जा सके और ब्रिटिश शासन के लिए एक नया सामाजिक आधार तैयार हो सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मध्यकालीन भारत के सूफी आंदोलनों और उनकी विभिन्न विचारधाराओं एवं सिलसिलों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चिश्ती सिलसिले के संतों ने राज्य के राजनीतिक मामलों और राजकीय संरक्षण (पैट्रोनटेज) से पूरी तरह दूरी बनाए रखी, तथा शेख निजामुद्दीन औलिया ने स्पष्ट रूप से सुल्तानों के दरबार में जाने से इंकार करते हुए 'मेरे घर के दो दरवाजे हैं, यदि सुल्तान एक से प्रवेश करेगा तो मैं दूसरे से बाहर चला जाऊंगा' की नीति अपनाई।
2. सुहरावर्दी सिलसिले के संतों ने चिश्ती संतों के विपरीत राजकीय सहायता, जागीरों और बड़े पदों को स्वीकार करने में कोई परहेज नहीं किया, तथा इस सिलसिले का मुख्य कार्यक्षेत्र सिंध और मुल्तान का क्षेत्र था।
3. कादिरिया सिलसिले के संस्थापक अब्दुल कादिर जिलानी थे, और भारत में इस सिलसिले के प्रसार का श्रेय शाह नियाज और मियाँ मीर को जाता है, जिन्होंने मुगल राजकुमार दारा शिकोह को आध्यात्मिक मार्गदर्शन प्रदान किया था।
4. नक्सबंदी सिलसिले की स्थापना ख्वाजा बाकी بالله ने भारत में की थी, और इस सिलसिले के सबसे प्रसिद्ध संत शेख अहमद सरहिंदी (मुजद्दिद-अलिसानी) ने अकबर की धार्मिक सहिष्णुता और 'दीन-ए-इलाही' नीति की कड़ी आलोचना करते हुए रूढ़िवादी इस्लाम के पुनरुत्थान पर जोर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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औरंगजेब के समय "नवाजुब" (Nawajub) नामक कर किससे संबंधित था?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी ब्राउन बेस मस्कट बन्दूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' (Enfield Rifle) को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी आक्रोश पैदा किया।
2. बैरकपुर छावनी (34वीं नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के आदेश का विरोध करते हुए अपने अंग्रेजी अधिकारियों लेफ्टिनेंट बाग और सार्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर दिया था, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें 8 अप्रैल 1857 को फांसी दे दी गई।
3. मंगल पांडे की इस घटना के तुरंत बाद, मेरठ छावनी के सैनिकों ने 10 मई 1857 को विद्रोह का बिगुल बजा दिया, जहाँ उन्होंने एनफील्ड राइफल्स के प्रयोग से पूर्णतः इंकार करते हुए यूरोपीय अधिकारियों को बंधक बना लिया और दिल्ली की ओर कूच किया।
4. चर्बी वाले कारतूसों की घटना के विरोध में विद्रोह करने वाले मंगल पांडे को गिरफ्तार करने से इनकार करने वाले ब्रिटिश रेजिमेंट के भारतीय अधिकारियों को ब्रिटिश सरकार द्वारा पुरस्कृत किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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छत्रपति शिवाजी महाराज के प्रशासनिक, राजस्व तथा सैन्य सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की भू-राजस्व प्रणाली मूल रूप से मलिक अंबर की व्यवस्था पर आधारित थी, जिसके तहत राज्य सीधी देखरेख में कुल उपज का लगभग 40 प्रतिशत भाग वसूलता था, जिसे बाद में बढ़कर 40 प्रतिशत से 50 प्रतिशत तक कर दिया गया था।
2. शिवाजी के अष्टप्रधान मंत्रिमंडल में 'न्यायाधीश' और 'पंडितराव' को छोड़कर शेष छह मंत्री युद्ध के समय सैन्य कमान संभालने के लिए सीधे तौर पर बाध्य थे और उन्हें सेना का नेतृत्व करना पड़ता था।
3. मराठा नौसेना का सुदृढ़ीकरण करते हुए शिवाजी ने कोलाबा, सिंधुदुर्ग और विजयदुर्ग जैसे तटीय किलों का निर्माण किया तथा मयनाक भंडारी और कान्होजी आंग्रे जैसे सक्षम सरखेल (नौसेना प्रमुख) नियुक्त किए।
4. शिवाजी द्वारा वसूल किया जाने वाला 'चौथ' कुल राजस्व का एक-चौथाई हिस्सा था, जिसे मराठा आक्रमण से सुरक्षा के एवज में गैर-मराठा क्षेत्रों से वसूला जाता था, जबकि 'सरदेशमुखी' कर इस दावे पर लिया जाता था कि शिवाजी इस क्षेत्र के सर्वोच्च 'सरदेशमुख' हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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