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History of India
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भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के प्रारंभिक चरण और प्रमुख संगठनों के वैचारिक तथा संगठनात्मक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में स्थापित 'गदर पार्टी' ने 'गदर की गूंज' नामक प्रकाशन के माध्यम से प्रवासी भारतीयों में राष्ट्रवादी चेतना जगाई और लाला हरदयाल इसके प्रमुख संस्थापकों व विचारकों में शामिल थे।
- 2. वर्ष 1924 में कानपुर में गठित 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) के घोषणापत्र 'रेवोल्यूशनरी' (The Revolutionary) का मुख्य उद्देश्य भारत में संघीय गणराज्य की स्थापना करना था, जिसमें शोषण पर आधारित व्यवस्था को समाप्त कर समाजवाद के सिद्धांतों को अपनाना था।
- 3. भगत सिंह और उनके साथियों द्वारा सितंबर 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में स्थापित 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) ने पारंपरिक व्यक्तिगत आतंकवादी कार्रवाइयों से आगे बढ़कर जन-आधारित समाजवादी क्रांति और वैचारिक संघर्ष को अपनी रणनीति का मुख्य हिस्सा बनाया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि वर्ष 1913 में सोहन सिंह भाकना और लाला हरदयाल ने अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 'गदर पार्टी' की स्थापना की थी, जिसका उद्देश्य सशस्त्र विद्रोह के माध्यम से ब्रिटिश शासन को उखाड़ फेंकना था और 'गदर की गूंज' इसका प्रसिद्ध वैचारिक प्रकाशन था। कथन 2 गलत है क्योंकि 'रेवोल्यूशनरी' (The Revolutionary) घोषणापत्र सचिन्द्र नाथ सन्याल द्वारा लिखा गया था, लेकिन HRA का मुख्य उद्देश्य 'सोवियत संघ की तर्ज पर संघीय गणराज्य' की स्थापना करना था, जबकि पूर्ण समाजवादी सिद्धांतों को औपचारिक रूप से इसके पुनर्गठन के बाद HSRA द्वारा मुख्य एजेंडे में शामिल किया गया था। कथन 3 सही है, क्योंकि सितंबर 1928 में भगत सिंह, सुखदेव और चंद्रशेखर आजाद आदि ने फिरोजशाह कोटला में HRA का नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया और इसमें मार्क्सवादी तथा समाजवादी विचारधारा को प्राथमिकता दी गई। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की कला, वास्तुकला और प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम (महामल्ल) ने महाबलीपुरम (मामल्लापुरम) में एक ही विशाल चट्टान को काटकर प्रसिद्ध रथ मंदिरों (सप्त पगोडा) का निर्माण करवाया था, जबकि मामल्लपुरम शहर की स्थापना भी उसी ने की थी।
2. बादामी के चालुक्य वंश के सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने एहोले के लाड़ खां मंदिर और जैन मंदिर का निर्माण करवाया था, और चालुक्यों की यह वास्तुकला शैली नागर और वेसर शैलियों का सम्मिश्रण मानी जाती है।
3. चोल सम्राट राजराज प्रथम ने तंजावुर में प्रसिद्ध 'राजराजेश्वर' या 'बृहदेश्वर मंदिर' का निर्माण ग्रेनाइट पत्थर से करवाया था, जो द्रविण वास्तुकला की उत्कृष्ट कृति है और इसके शिखर पर स्थित विशाल कुंभ एक ही पत्थर के खंड से निर्मित है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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मौर्य साम्राज्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अशोक के 'धम्म' का मूल उद्देश्य धार्मिक विजय प्राप्त करना नहीं था, बल्कि इसके अंतर्गत प्रजा में नैतिक सहिष्णुता, बड़ों का आदर, अहिंसा और सामाजिक सदभाव को बढ़ावा देना था, जिसके लिए उसने 'धम्ममहामात्र' नामक उच्च अधिकारियों की नियुक्ति की थी।
2. कौटिल्य (चाणक्य) द्वारा रचित 'अर्थशास्त्र' में मौर्य कालीन केंद्रीय प्रशासन में सर्वोच्च स्तर पर मंत्रियों और अधिकारियों को 'तीर्थ' कहा जाता था, जिनकी कुल संख्या अठारह थी और इन पर कड़ी निगरानी रखने के लिए गुप्तचर प्रणाली (गूढ़पुरुष) का व्यापक उपयोग किया जाता था।
3. मेगास्थनीज की 'इंडिका' के अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन छह समितियों द्वारा संचालित होता था, जिसमें प्रत्येक समिति में पाँच सदस्य होते थे और ये समितियाँ उद्योग, विदेशी यात्रियों, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, व्यापार और कर संग्रह जैसे विभिन्न प्रशासनिक कार्यों की देखरेख करती थीं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ (अवध) में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका तथा उनके संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बृजकिसर (बिरजिज कादिर) को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी के दौरान सैन्य रणनीतियों का प्रभावी संचालन किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने अवध और रोहिलखंड के क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध को संगठित किया और चिनहट के युद्ध (जुलाई 1857) में हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को पराजित किया था।
3. लखनऊ के अंतिम पतन के पश्चात बेगम हजरत महल ने आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा पेंशन देकर कोलकाता में नजरबंद कर दिया गया, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह नेपाल की तराई में अंग्रेजों के विरुद्ध आजीवन संघर्ष करते रहे।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह की लोकप्रियता और ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों से भयभीत होकर अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, और अंततः एक स्थानीय राजा (पवैन के राजा) की गद्दारी के कारण वे धोखे से मारे गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के दौरान दिल्ली में हुए घटनाक्रमों और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की स्थिति के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के विद्रोही सैनिकों द्वारा 11 मई 1857 को दिल्ली पहुँचने के पश्चात अनिच्छुक मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को औपचारिक रूप से भारत का सम्राट (शहंशाह-ए-हिंद) घोषित किया गया, जबकि विद्रोहियों की वास्तविक सैन्य कमान जनरल बख्त खान के नेतृत्व में बनी 'न्याय अदालत' के पास थी।
2. ब्रिटिश सेना द्वारा सितंबर 1857 में दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के बाद, ब्रिटिश अधिकारी मेजर हडसन ने सम्राट के पुत्रों और पोते को हुमायूं के मकबरे के पास गोली मार कर हत्या कर दी थी, तथा बहादुर शाह जफर पर मुकदमा चलाकर उन्हें रंगून निर्वासित कर दिया गया था।
3. दिल्ली में विद्रोह के दौरान सम्राट बहादुर शाह जफर ने सक्रिय रूप से युद्ध रणनीतियों का संचालन किया और संपूर्ण देश के राजाओं व नवाबों को अंग्रेजों के विरुद्ध एक संयुक्त इस्लामिक मोर्चे के गठन हेतु सीधे आदेश जारी किए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना और नरम दल-गरम दल काल के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कांग्रेस के प्रारंभिक वर्षों (1885-1905) में नरमपंथियों की कार्यपद्धति 'प्रार्थना, याचिका और विरोध' (Prayer, Petition and Protest) की नीति पर आधारित थी, और उन्होंने वर्ष 1892 के भारतीय परिषद अधिनियम (Indian Councils Act 1892) को अपनी पहली बड़ी वैधानिक सफलता माना था, हालांकि वे इसके सीमित दायरे से पूर्णतः संतुष्ट नहीं थे।
2. वर्ष 1907 के सूरत अधिवेशन में कांग्रेस के विभाजन के पीछे मुख्य वैधानिक और वैचारिक मतभेद यह था कि गरम दल (लाल-बाल-पाल) स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन को केवल बंगाल तक सीमित रखना चाहते थे, जबकि नरम दल इसे पूरे देश में लागू करने के पक्षधर थे।
3. वर्ष 1906 के कलकत्ता अधिवेशन में दादाभाई नौरोजी की अध्यक्षता में कांग्रेस ने पहली बार 'स्वराज' (Self-Government) को अपने राजनीतिक लक्ष्य के रूप में स्वीकार किया, जिसे नरमपंथियों और चरमपंथियों के बीच एक अस्थायी समझौते के रूप में देखा गया था।
4. ब्रिटिश सरकार ने उग्रवादी राष्ट्रवादी आंदोलन को कुचलने के लिए वर्ष 1908 में 'विस्फोटक पदार्थ अधिनियम' (Explosive Substances Act) और 'समाचार पत्र (अपराधों के लिए प्रोत्साहन) अधिनियम' जैसे दमनकारी कानून पारित किए, जिसके तहत बाल गंगाधर तिलक को राजद्रोह के आरोप में छह वर्ष की कैद की सजा देकर मांडले (बर्मा) जेल भेज दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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