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History of India
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के प्रारंभिक काल (नरम दल काल) और उसके वैचारिक व राजनीतिक दृष्टिकोण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1885 में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के समय ब्रिटिश सरकार का दृष्टिकोण पूरी तरह से शत्रुतापूर्ण था और लॉर्ड डफरिन ने इसके गठन का पुरजोर विरोध करते हुए इसे एक राष्ट्रद्रोही संगठन घोषित किया था।
- 2. नरमपंथी नेताओं (जैसे दादाभाई नौरोजी, फिरोजशाह मेहता और सुरेंद्रनाथ बनर्जी) का यह अटूट विश्वास था कि ब्रिटिश शासन भारत के हित में है, और वे ब्रिटिश न्यायप्रियता में विश्वास रखते हुए 'प्रार्थना, याचिका और शिष्टमंडल' (Prayer, Petition and Protest) की संवैधानिक पद्धति में यकीन करते थे।
- 3. दादाभाई नौरोजी ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'पावर्टी एंड अन-ब्रिटिश रूल इन इंडिया' के माध्यम से 'धन की निकासी' (Drain of Wealth) के सिद्धांत का प्रतिपादन किया, जिसमें उन्होंने यह स्पष्ट किया कि किस प्रकार औقनवाशिक नीतियां भारत के आर्थिक शोषण का मुख्य कारण हैं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि कांग्रेस की स्थापना के समय तत्कालीन वायसराय लॉर्ड डफरिन ने इसे विरोधी के रूप में नहीं बल्कि 'सुरक्षा वाल्व' (Safety Valve) के रूप में देखा था और प्रारंभिक वर्षों में ब्रिटिश अधिकारियों का रुख इसके प्रति काफी हद तक सहयोगात्मक या उदासीन था, न कि तुरंत शत्रुतापूर्ण। कथन 2 और 3 बिल्कुल सही हैं; नरमपंथी नेताओं का ब्रिटिश न्यायप्रियता में अटूट विश्वास था और वे क्रमिक सुधारों के पक्षधर थे, जबकि दादाभाई नौरोजी ने 'धन की निकासी' सिद्धांत के जरिए ब्रिटिश औपनिवेशिक आर्थिक शोषण का पर्दाफाश किया था। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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बिहार में 1857 के स्वतंत्रता संग्राम के दौरान बाबू वीर कुंवर सिंह और उनके छोटे भाई अमर सिंह की युद्ध रणनीतियों तथा प्रशासनिक दृष्टिकोण के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरा पर अधिकार करने के पश्चात वीर कुंवर सिंह ने अपनी सैन्य कमजोरी को भाँपते हुए ब्रिटिश सेना के विरुद्ध परंपरागत युद्ध पद्धति का त्याग कर छापामार (गोरिल्ला) युद्ध प्रणाली को अपनाया और आजमगढ़ तथा बलिया तक ब्रिटिश सेना को पराजित किया।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के उपरांत अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों और कैमूर की पहाड़ियों से अंग्रेजी सेना के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व जारी रखा तथा ब्रिटिश सत्ता के समानांतर एक स्थानीय प्रशासन (सरकार) स्थापित किया।
3. अमर सिंह द्वारा संचालित इस समानांतर प्रशासन और गोरिल्ला युद्ध का दमन करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने मेजर जनरल डगलस और लेफ्टिनेंट कर्नल इंnis को विशेष रूप से नियुक्त किया था, जिन्होंने कैमूर की पहाड़ियों में कड़े संघर्ष के बाद इस प्रतिरोध को समाप्त किया।
4. अमर सिंह वर्ष 1858 के अंत में ब्रिटिश सेना के साथ हुई एक अंतिम निर्णायक झड़प में वीरगति को प्राप्त हुए थे, जिसके साथ ही बिहार में 1857 के विद्रोह की अंतिम संगठित ज्वाला बुझ गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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दिल्ली सल्तनत के विभिन्न राजवंशों के प्रशासनिक ढांचे, सैन्य सुधारों और राजस्व व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी के शासनकाल में केंद्रीय राजस्व विभाग 'दीवान-ए-वजीर' के अंतर्गत कार्यरत 'मुस्तौफी-ए-मुमालिक' राज्य के महालेखा परीक्षक (Auditor General) के रूप में कार्य करता था, जबकि 'अरिज़-ए-मुमालिक' का विभाग सैन्य संगठन, सैनिकों का हुलिया (चेहरा) दर्ज करने और घोड़ों को दागने (दाग) की प्रणाली का प्रबंधन करता था।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने कृषि के विकास और बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने के लिए 'दीवान-ए-कोही' नामक एक नए कृषि विभाग की स्थापना की थी, जिसके तहत किसानों को प्रत्यक्ष आर्थिक सहायता और बीज उपलब्ध कराए गए, तथा इस योजना के लिए 'सौंदल' (तक्क़वी ऋण) बांटे गए।
3. फ़िरोज़ शाह तुगलक ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नकद वेतन देने की परंपरा को पूरी तरह समाप्त कर दिया और इसके स्थान पर 'वजह' (लगान के अधिकार वाली भूमि) देने की जागीरदारी प्रथा को पुनः स्थापित किया, तथा दासों की देखभाल के लिए 'दीवान-ए-बदगान' की स्थापना की।
4. लोदी वंश के संस्थापक बहलोल लोदी ने अफगान सरदारों की तुष्टिकरण और संतुष्टि के लिए 'मंनद-ए-आली' (समानों का आसन) की नीति अपनाई, जिसके अंतर्गत वह अपने दरबार में सरदारों के साथ बराबरी के स्तर पर बैठता था, जबकि उसके पुत्र सिकंदर लोदी ने इस नीति को त्यागकर पूर्ण राज्याधिकार और सुल्तान की सर्वोच्चता पर जोर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक आकलन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस ब्रिटिश इतिहासकार या समकालीन विचारक ने यह मत व्यक्त किया था कि 'यह विद्रोह न तो राष्ट्रीय था, न ही स्वतंत्रता संग्राम था और न ही प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था'?
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मुगल दरबार में आने वाला प्रथम अंग्रेज:
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित किया और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध युद्ध का संचालन किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' (या फैजाबाद का लाइटहाउस) भी कहा जाता है, ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और चिनहट के युद्ध में ब्रिटिश सेना को पराजित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. बेगम हजरत महल ने ब्रिटिश सेना की दमनकारी नीतियों के आगे कभी आत्मसमर्पण नहीं किया और अंततः नेपाल जाकर शरण ली, जहाँ उनकी मृत्यु हुई।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था और उन पर मुकदमा चलाकर उन्हें फांसी दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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