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History of India
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और तदुपरांत आरंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के वैचारिक, आर्थिक तथा संगठनात्मक पहलुओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बंगाल विभाजन के विरोध में कलकत्ता के टाउन हॉल में 7 अगस्त 1905 को आयोजित ऐतिहासिक बैठक में प्रसिद्ध 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया, जिसके तहत केवल ब्रिटिश वस्त्रों और नमक के बहिष्कार पर बल दिया गया था, जबकि ब्रिटिश अदालतों, स्कूलों और उपाδειयों के बहिष्कार का इसमें कोई उल्लेख नहीं था।
  2. 2. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक आत्मनिर्भरता (आत्मशक्ति) पर विशेष जोर दिया गया, जिसके परिणामस्वरूप आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' जैसी स्वदेशी उद्योगों की नींव रखी, तथा राष्ट्रीय शिक्षा की दिशा में 'नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन' की स्थापना की गई।
  3. 3. स्वदेशी आंदोलन का प्रभाव केवल कलकत्ता और बड़े शहरी क्षेत्रों तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका विस्तार बंगाल के ग्रामीण इलाकों तक भी हुआ, जहाँ अश्विनी कुमार दत्त द्वारा 'स्वदेश बांधव समिति' के माध्यम से किसानों और आम जनता को संगठित किया गया तथा मेलों व लोक-उत्सवों को जन-जागरण का माध्यम बनाया गया।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 असत्य है क्योंकि 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में पारित बहिष्कार प्रस्ताव में केवल वस्त्रों और नमक तक ही नहीं, बल्कि ब्रिटिश निर्मित सभी वस्तुओं, शिक्षण संस्थानों, अदालतों, उपाधियों और सरकारी नौकरियों के व्यापक बहिष्कार का आह्वान किया गया था। कथन 2 और 3 सत्य हैं; स्वदेशी आंदोलन के दौरान 'आत्मशक्ति' (आत्मनिर्भरता) के विचार को बढ़ावा देते हुए आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय ने स्वदेशी उद्योगों (जैसे बंगाल केमिकल) की स्थापना की और राष्ट्रीय शिक्षा के प्रसार के लिए अगस्त 1906 में 'नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन' का गठन किया गया। इसके अतिरिक्त, अश्विनी कुमार दत्त की 'स्वदेश बांधव समिति' ने ग्रामीण क्षेत्रों, मेलों और लोक-उत्सवों के माध्यम से इस आंदोलन को जन-जन तक पहुँचाने में ऐतिहासिक भूमिका निभाई थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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