त्वरित लिंक्स
History of India
17 views
मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, दार्शनिक मान्यताओं तथा उनके ऐतिहासिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. दक्षिण भारत में भक्ति आंदोलन को लोकप्रिय बनाने का श्रेय मुख्य रूप से आलवार (वैष्णव) और नयनार (शैव) संतों को जाता है, जिन्होंने अपनी रचनाओं में जाति-पाति के कठोर बंधनों की आलोचना की तथा तमिल भाषा को भक्ति के प्रचार का माध्यम बनाया, जिससे अलवर संत आंदाल को 'दक्षिण की मीरा' के रूप में जाना गया।
- 2. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को प्रसारित करने वाले रामानंद ने जातिगत भेदभाव को अस्वीकार करते हुए अपने शिष्यों में रैदास (चमार), कबीर (जुलाहा), और सेना (नाई) जैसे समाज के विभिन्न वर्गों के लोगों को सम्मिलित किया, तथा उन्होंने संस्कृत के स्थान पर लोकभाषा (हिंदी/अवधी) को उपदेश का माध्यम बनाया।
- 3. सूफी मत (तसव्वुफ़) के चिश्ती सिलसिले की स्थापना भारत में ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती द्वारा की गई थी, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य के संरक्षण, शाही दरबारों के साथ निकट संबंध और भारी मात्रा में जागीरें स्वीकार करने की नीति का कड़ाई से पालन किया ताकि वे गरीबों की सेवा कर सकें।
- 4. महान सूफी संत निजामुद्दीन औलिया के दरबार में समकालीन सात सुल्तानों का शासनकाल देखा गया, किंतु उन्होंने कभी भी किसी सुल्तान के दरबार में प्रवेश नहीं किया और 'सुल्तान-उल-मशाइख' की उपाधि से विभूषित हुए, जबकि उनके प्रिय शिष्य अमीर खुसू ने फारसी कविता में भारतीय शैली (सबक-ए-हिन्दी) का सूत्रपात किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1, 2 और 4 सही हैं, जबकि कथन 3 असत्य है। चिश्ती सिलसिले के सूफी संत राज्य के संरक्षण, शाही दरबारों और राजनीतिक सत्ता से दूर रहने (दुनिया से अलगाव और सादगी) के अपने कड़े उसूलों के लिए जाने जाते थे; वे शाही जागीरें या बड़े अनुदान स्वीकार नहीं करते थे और अपनी आजीविका के लिए भिक्षा (फुतूह) या स्वयं श्रम पर निर्भर रहते थे। भक्ति और सूफी संतों ने भारतीय समाज में समन्वय और समरसता की संस्कृति को सुदृढ़ किया। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखा जा सकता है।
Related Questions
→
हल्दीघाटी के युद्ध में अकबर का सेनापति:
→
मौर्य साम्राज्य के सम्राट अशोक और उसकी प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अशोक के अधिकांश अभिलेख प्राकृत भाषा और ब्राह्मी लिपि में उत्कीर्ण हैं, किंतु उत्तर-पश्चिम भारत के अभिलेखों में खरोष्ठी लिपि के साथ-साथ यूनानी और आरेमीय (Aramaic) लिपियों का भी प्रयोग किया गया है।
2. अशोक के 'धम्म' का मूल उद्देश्य प्रजा का नैतिक उत्थान और सामाजिक समरसता स्थापित करना था, जिसमें बड़ों का आदर, गुरुओं का सम्मान, दासों और शिष्यों के प्रति दया तथा सभी धर्मों के प्रति सहिष्णुता शामिल थी।
3. अशोक के शासनकाल में आयोजित 'तृतीय बौद्ध संगीति' की अध्यक्षता मोग्गालिपुत्त तिस्स ने पाटलिपुत्र में की थी, तथा इसी संगीति में बौद्ध धर्म के प्रचार-प्रसार के लिए विभिन्न क्षेत्रों (जैसे कश्मीर, गंधार, यवन देश और सुवर्णभूमि) में प्रचारक मंडल भेजे गए थे।
4. अशोक के राज्याभिषेक के आठवें वर्ष (लगभग 261 ईसा पूर्व) लड़े गए कलिंग युद्ध के भीषण रक्तपात और मानवीय पीड़ा ने अशोक के हृदय में ऐसा परिवर्तन किया कि उसने दिग्विजय की नीति को हमेशा के लिए त्याग कर 'घोषघोष' (युद्ध की घोषणा) के स्थान पर 'धम्मघोष' (धर्म की घोषणा) को अपनीराजकीय नीति बना लिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (Duhitr) शब्द का प्रयोग उस पुत्री के लिए किया जाता था जो गाय का दूध दोहती थी, और इस काल में सभा और समिति नामक संस्थाओं में महिलाओं की उपस्थिति के स्पष्ट प्रमाण मिलते हैं।
2. उत्तर वैदिक काल में आर्यों का विस्तार गंगा-यमुना दोआब क्षेत्र की ओर हो गया, जिससे कुरु और पांचाल जैसे बड़े जनपदों का उदय हुआ, तथा इस काल में लोहे के व्यापक प्रयोग को 'श्याम अयस' (Shyama Ayas) के रूप में ग्रंथों में उल्लेखित किया गया है।
3. शतपथ ब्राह्मण ग्रंथ में गंधार, केकय और मद्र जैसे उत्तर-पश्चिम के राज्यों के साथ-साथ दक्षिण भारत के राज्यों (जैसे आंध्र और पुंड्र) का भी विस्तृत भौगोलिक विवरण मिलता है, जिससे यह सिद्ध होता है कि उत्तर वैदिक काल के अंत तक आर्यों का भौगोलिक प्रभाव दक्षिण भारत तक पूरी तरह स्थापित हो चुका था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और इसके विरोध में प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के दौरान कलकत्ता और अन्य क्षेत्रों में स्थापित विभिन्न राष्ट्रीय संस्थानों तथा उनके संस्थापकों के संबंध में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल नेशनल कॉलेज — अरबिंदो घोष (पहले प्रधानाचार्य)
2. नेशनल काउंसिल ऑफ एजुकेशन (राष्ट्रीय शिक्षा परिषद) — सतेंद्रनाथ टैगोर
3. सोसाइटी फॉर द प्रमोशन ऑफ टेक्निकल एजुकेशन — तारकनाथ पालित
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-सा/से युग्म सही सुमेलित है/हैं?
→
विजयनगर साम्राज्य का राजकीय चिन्ह (Royal Seal) क्या था?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.