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History of India
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनकी संस्थागत व्यवस्थाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बौद्ध धर्म का 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (Dependent Origination) का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि प्रत्येक घटना और वस्तु किसी न किसी कारण से उत्पन्न होती है और यह शाश्वत ब्रह्म या आत्मा के अस्तित्व को स्वीकार किए बिना संसार के संचालन की व्याख्या करता है, जबकि जैन धर्म का 'स्यादवाद' (सप्तभंगी नय) ज्ञान की सापेक्षता का सिद्धांत है जो यह बताता है कि प्रत्येक सत्य दृष्टिकोण विशेष के अनुसार आंशिक होता है।
- 2. बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा пятнадцать (15) वर्ष निर्धारित की गई थी, और संघ में किसी भी प्रकार के ऋणग्रस्त, चोर, दास, या राजकर्मचारी को प्रवेश की पूर्ण अनुमति थी ताकि सामाजिक समानता स्थापित की जा सके।
- 3. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार स्त्रियाँ मोक्ष प्राप्त करने में सक्षम हैं और उनके 19वें तीर्थंकर 'मल्लिनाथ' एक स्त्री थीं, जबकि दिगंबर संप्रदाय इस मान्यता का पूर्ण खंडन करता है और यह मानता है कि मोक्ष प्राप्ति के लिए नग्नता अनिवार्य है और स्त्री शरीर से मुक्ति संभव नहीं है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि बौद्ध धर्म का 'प्रतीत्यसमुत्पाद' कार्य-कारण सिद्धांत पर आधारित है जो अनात्मवादी दर्शन का समर्थन करता है, और जैन धर्म का 'स्यादवाद' सत्य की बहुआयामी प्रकृति को समझाता है। कथन 2 गलत है क्योंकि बौद्ध संघ में प्रवेश के लिए न्यूनतम आयु सीमा 15 वर्ष नहीं बल्कि 15 के स्थान पर 15 वर्ष से अधिक (सामान्यतः 15 वर्ष नहीं बल्कि 15 वर्ष से कम आयु वर्जित थी, संघ में चोर, ऋणग्रस्त, दास और राजकर्मचारियों का प्रवेश वर्जित था)। कथन 3 सही है क्योंकि श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ स्त्री थीं और स्त्रियाँ मोक्ष पा सकती हैं, जबकि दिगंबर मत इसके विपरीत है। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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अंग्रेजी राजदूत सर थॉमस रो और कैप्टन हॉकिन्स किसके दरबार में व्यापारिक अनुमति लेने आए थे?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के तात्कालिक कारण और बैरकपुर छावनी की घटना के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जनवरी 1857 में बंगाल सेना में पुरानी 'ब्राउन बेस' बंदूक के स्थान पर नई 'एनफील्ड राइफल' को शामिल किया गया था, जिसके कारतूसों में गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों की धार्मिक भावनाओं को आहत किया।
2. 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी (34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री) के सिपाही मंगल पांडे ने चर्बी वाले कारतूसों के प्रयोग के विरुद्ध विरोध प्रदर्शन करते हुए अपने ब्रिटिश अधिकारियों लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट ह्यूसन पर आक्रमण कर दिया था।
3. मंगल पांडे को ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया और उन पर मुकदमा चलाकर उन्हें निर्धारित तिथि से पहले ही 8 अप्रैल 1857 को फाँसी दे दी गई, जिसके परिणामस्वरूप इस घटना ने संपूर्ण उत्तर भारत में विद्रोह की चिंगारी को भड़काने का कार्य किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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महात्मा गांधी के भारत आगमन के पश्चात उनके शुरुआती सत्याग्रह आंदोलनों—विशेष रूप से चंपारण, खेड़ा और अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन—की कार्यप्रणाली और उनके परिणामों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान, जहाँ एक ओर राजकुमार शुक्ल के अनुरोध पर गांधीजी ने यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर थोपी गई 'तीनकथा पद्धति' के विरुद्ध सफल संघर्ष किया, वहीं सरकार द्वारा नियुक्त 'चंपारण अग्रैरियन कमेटी' के दबाव में आकर अंततः इस शोषणकारी प्रथा को कानूनी रूप से समाप्त कर दिया गया।
2. वर्ष 1918 के खेड़ा सत्याग्रह के दौरान जब फसल खराब होने के बावजूद ब्रिटिश प्रशासन द्वारा लगान वसूली में कोई रियायत नहीं दी गई, तब गांधीजी ने किसानों को स्पष्ट निर्देश दिया कि वे स्वेच्छा से लगान देना बंद कर दें, और इस आंदोलन के परिणामस्वरूप सरकार ने केवल उन्हीं किसानों से लगान वसूलने का आदेश जारी किया जो भुगतान करने में सक्षम थे।
3. अहमदाबाद मिल मजदूर आंदोलन में पहली बार गांधीजी द्वारा 'भूख हड़ताल' (Hunger Strike) का सफल प्रयोग किया गया, जिसका उद्देश्य मिल मालिकों और मजदूरों के बीच चल रहे प्लेग बोनस विवाद को सुलझाना था, और मध्यस्थता बोर्ड द्वारा मजदूरों को 35 प्रतिशत वेतन वृद्धि दिए जाने के निर्णय के साथ यह विवाद समाप्त हुआ।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था, प्रशासनिक संरचना और भूमि अनुदान व्यवस्था के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में 'अग्रहार' भूमि वह भूमि होती थी जो मंदिरों और ब्राह्मणों को कर-मुक्त रूप से दान दी जाती थी, जिस पर स्थानीय प्रशासकों का कोई हस्तक्षेप नहीं होता था।
2. गुप्त सम्राटों द्वारा जारी किए गए स्वर्ण सिक्के (जिसे 'दीनार' कहा जाता था) कुषाणों के स्वर्ण सिक्कों की तुलना में अधिक शुद्धता और कलात्मक सुंदरता प्रदर्शित करते थे, विशेष रूप से कुमारगुप्त प्रथम के मयूर प्रकार के सिक्के।
3. इस काल में व्यापारिक गतिविधियों में गिरावट आने के कारण श्रेणी (Guilds) व्यवस्था पूरी तरह समाप्त हो गई थी और मुद्रा अर्थव्यवस्था का स्थान पूर्णतः वस्तु-विनिमय प्रणाली (Barter System) ने ले लिया था।
4. गुप्त प्रशासन में प्रांत को 'भुक्ति' कहा जाता था, जिसके प्रमुख को 'उपरिक' कहा जाता था, तथा भुक्तियों का विभाजन 'विषय' (जिला) में होता था, जिसके प्रशासनिक अधिकारी को 'विषयपति' कहा जाता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अवध में विद्रोह के फूट पड़ने के उपरांत बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को लखनऊ का नवाब घोषित किया और स्वयं राज्य की वास्तविक बागडोर संभालते हुए अंग्रेजों के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध का नेतृत्व किया।
2. फैजाबाद में विद्रोह का नेतृत्व करने वाले मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, ने अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया था और वे अपनी उत्कृष्ट सैन्य रणनीति तथा नेतृत्व क्षमता के लिए विख्यात थे।
3. ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने अंततः मार्च 1858 में गोरखा रेजिमेंट और अन्य सैन्य टुकड़ियों की सहायता से लखनऊ पर पुनः पूर्ण नियंत्रण स्थापित कर लिया, जिसके बाद बेगम हजरत महल ने नेपाल की ओर प्रस्थान किया और वहीं शरण ली।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को पकड़ने के लिए अंग्रेजों ने पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, और अंत में पुवायां के एक स्थानीय राजा के साथ हुई मुठभेड़ में उन्हें जीवित गिरफ्तार कर लिया गया था, जिन पर लखनऊ में राजद्रोह का मुकदमा चलाकर फांसी दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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