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History of India
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ऋग्वैदिक काल और उत्तर वैदिक काल की राजनीतिक, आर्थिक और सामाजिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (गाय दुहने वाली) शब्द पुत्री के लिए प्रयोग किया जाता था, और इस काल में कबीले के मुखिया को 'राजनीन्' कहा जाता था जो वंशानुगत न होकर सभा और समिति द्वारा चुना जाता था, जबकि उत्तर वैदिक काल में राजा का पद वंशानुगत हो गया और राजसूय तथा अश्वमेध जैसे बड़े यज्ञों का प्रचलन बढ़ गया।
- 2. उत्तर वैदिक काल की अर्थव्यवस्था में लोहे का प्रयोग बड़े पैमाने पर शुरू होने के कारण कृषि मुख्य व्यवसाय बन गई, जिसे शतपथ ब्राह्मण में जुताई, बुवाई, कटाई और मड़ाई जैसी कृषि क्रियाओं के विस्तृत विवरण द्वारा दर्शाया गया है, जबकि ऋग्वैदिक काल में लोहे का कोई साक्ष्य नहीं मिलता और अर्थव्यवस्था का मुख्य आधार पशुपालन था।
- 3. ऋग्वैदिक समाज में वर्ण व्यवस्था जन्म के आधार पर अत्यंत कठोर थी, जहाँ शूद्रों को उच्च शिक्षा और यज्ञोपवीत संस्कार का पूर्ण अधिकार प्राप्त था, जबकि उत्तर वैदिक काल में गोत्र प्रथा का उदय हुआ और महिलाओं का उपनयन संस्कार पूरी तरह बंद कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि ऋग्वैदिक काल में राजा (राजनीन्) का पद कबीलाई लोकतंत्र पर आधारित था जहाँ 'सभा' और 'समिति' जैसी संस्थाएं राजा के चुनाव और नियंत्रण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती थीं। उत्तर वैदिक काल में कबीलाई राज्य जनपदों में बदलने लगे और राजसूय, वाजपेय तथा अश्वमेध जैसे यज्ञों के माध्यम से राजा की शक्ति और प्रतिष्ठा में वृद्धि हुई तथा पद वंशानुगत हो गया। कथन 2 सही है क्योंकि ऋग्वैदिक आर्यों को लोहे (श्याम अयस) का ज्ञान नहीं था और उनका मुख्य व्यवसाय पशुपालन था, जबकि उत्तर वैदिक काल में लगभग 1000 ई.पू. के आसपास लोहे के व्यापक प्रयोग से कृषि अर्थव्यवस्था मुख्य आधार बन गई, जिसका उल्लेख शतपथ ब्राह्मण में मिलता है। कथन 3 गलत है क्योंकि ऋग्वैदिक समाज में वर्ण व्यवस्था जन्म पर आधारित न होकर कर्म पर आधारित थी और इस काल में महिलाओं को उपनयन संस्कार तथा वेदों के अध्ययन का अधिकार प्राप्त था; उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्म आधारित और कठोर हुई।
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बिहार में 1857 के महान विद्रोह के संदर्भ में वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह की सैन्य रणनीतियों, नेतृत्व तथा संघर्ष के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. आरा पर अधिकार करने के पश्चात वीर कुंवर सिंह ने परंपरागत युद्धशैली का त्याग कर छापामार (गोरिल्ला) युद्ध प्रणाली को अपनाया और अपनी सेना का विस्तार करते हुए आजमगढ़, बलिया और गाजीपुर तक ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सफल सैन्य अभियान चलाए।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु (अप्रैल 1858) के उपरांत उनके भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों और कैमूर की पहाड़ियों से अंग्रेजी सेना के खिलाफ सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व जारी रखा और वहाँ एक समानांतर सरकार स्थापित कर ब्रिटिश सत्ता को कड़ी चुनौती दी।
3. अमर सिंह द्वारा संचालित इस गोरिल्ला युद्ध और समानांतर प्रशासन का पूरी तरह दमन करने के लिए ब्रिटिश सरकार ने मेजर जनरल डगलस और विंसेंट आयर को नियुक्त किया था, जिन्होंने अंततः कैमूर की पहाड़ियों में कड़े संघर्ष के बाद इस प्रतिरोध को समाप्त किया।
4. अमर सिंह वर्ष 1858 के अंत में नेपाल के तराई क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना के साथ हुई एक अंतिम झड़प में वीरगति को प्राप्त हुए थे, जिसके साथ ही बिहार में 1857 के विद्रोह की अंतिम संगठित ज्वाला बुझ गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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फिरोज शाह तुगलक ने दिल्ली के आसपास फलों के कितने नए बाग लगवाए थे?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के परिणामों और भारत सरकार अधिनियम 1858 (क्वीन विक्टोरिया की घोषणा) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत सरकार अधिनियम 1858 के द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी का शासन समाप्त कर दिया गया और भारत का शासन सीधे ब्रिटिश क्राउन (शाही ताज) के अधीन कर दिया गया, जिसके तहत भारत के नियंत्रण के लिए ब्रिटिश कैबिनेट में एक नए पद 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) का सृजन किया गया, जिसे सहायता देने के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (Council of India) का गठन किया गया।
2. इलाहाबाद (अब प्रयागराज) में 1 नवंबर 1858 को आयोजित एक भव्य दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ी गई क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (Queen Victoria's Proclamation) में यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतों के साथ किए गए संधियों और अनुबंधों का सम्मान करेगी तथा भविष्य में किसी भी भारतीय राज्य का विलय नहीं किया जाएगा।
3. इस घोषणा में ब्रिटिश साम्राज्य के विस्तार की नीति को आधिकारिक रूप से त्यागने की बात कही गई, धार्मिक मामलों में अहस्तक्षेप की नीति का पालन करने का वचन दिया गया, तथा जाति, पंथ या जन्म के आधार पर किसी भी भारतीय को बिना किसी भेदभाव के योग्यता के अनुसार सरकारी सेवाओं में नियुक्त करने का प्रावधान किया गया।
4. विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश सरकार ने भारतीय सेना का पुनर्गठन करते हुए बंगाल और मद्रास प्रेसीडेंसी में यूरोपीय सैनिकों के अनुपात को और कम कर दिया, ताकि भविष्य में इस प्रकार के सैन्य विद्रोहों को रोका जा सके और सेना में 'फूट डालो और राज करो' की नीति के तहत क्षेत्रीय व सांप्रदायिक संतुलन स्थापित किया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मुगल काल में नौसेना (जल सेना) और शाही नौकाओं का प्रबंधन कौन करता था?
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मराठा इतिहास में "द्वितीय संस्थापक" के रूप में किसे जाना जाता है?
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