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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, जल निकास प्रणाली और सामाजिक-आर्थिक संगठन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हड़प्पा सभ्यता के नगरों में ग्रिड पद्धति (Grid System) का अनुसरण किया गया था, जहाँ सड़कें एक-दूसरे को समकोण पर काटती थीं, और लगभग सभी प्रमुख घरों में निजी कुओं, स्नानघरों तथा ढके हुए ईंटों से बने नालों की उत्तम व्यवस्था थी जो मुख्य सड़क की बड़ी नालियों से जुड़ी होती थीं।
  2. 2. धौलावीरा (गुजरात) सिंधु घाटी सभ्यता का एक ऐसा विशिष्ट नगर है जो सामान्यतः दो भागों (गढ़ और निचला नगर) में विभाजित होने के स्थान पर तीन भागों (गढ़, मध्यम नगर और निचला नगर) में विभाजित था, और यहाँ से एक उन्नत जल प्रबंधन प्रणाली तथा बड़े पैमाने पर जल कुंडों (Reservoirs) के साक्ष्य मिले हैं।
  3. 3. लोथल एक प्रमुख तटीय पतन नगर (Port Town) था, जहाँ से पकी ईंटों से निर्मित एक विशाल 'गोदीबाड़ा' (Dockyard) प्राप्त हुआ है, जो पश्चिमी एशियाई देशों के साथ समुद्री व्यापार और वाणिज्यिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र था।
  4. 4. सिंधु घाटी सभ्यता के मुहरों (Seals) और मृदभांडों पर प्राप्त चित्रात्मक लिपि (Pictographic Script) को 'बौस्ट्रोफेडन' (Boustrophedon) शैली में लिखा जाता था, जिसमें पहली पंक्ति दाईं से बाईं ओर और दूसरी पंक्ति बाईं से दाईं ओर लिखी जाती थी, और इस लिपि को अब तक सफलताપૂર્વक पढ़ लिया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 सही हैं। सिंधु घाटी सभ्यता अपनी उत्कृष्ट नगर योजना और जल निकास प्रणाली के लिए विश्व प्रसिद्ध थी। हड़प्पा सभ्यता के अधिकांश नगर ग्रिड पद्धति पर आधारित थे जहाँ सड़कें समकोण पर काटती थीं। धौलावीरा तीन भागों में विभाजित था और यहाँ का जल प्रबंधन अद्वितीय था। लोथल से विशाल गोदीबाड़ा (Dockyard) मिला है जो समुद्री व्यापार का प्रमाण है। किंतु कथन 4 असत्य है क्योंकि सिंधु घाटी की लिपि को अभी तक पूरी तरह पढ़ा नहीं जा सका है (यह अभी भी 'अपाठ्य' या undeciphered है)। इस सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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