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History of India
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बंगाल विभाजन (1905) के दौरान ब्रिटिश सरकार की दमनकारी नीतियों के विरोध में उपजे 'स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन' के विभिन्न आयामों और रणनीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. आंदोलन के प्रसार के दौरान स्वदेशी वस्तुओं के प्रचार-प्रसार के लिए 'अश्विनी कुमार दत्त' द्वारा 'स्वदेश बांधव समिति' की स्थापना की गई थी, जिसने जन-जागरण, स्वयंसेवकों के प्रशिक्षण और विदेशी वस्तुओं के बहिष्कार में अत्यंत महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
- 2. स्वदेशी आंदोलन के आर्थिक और औद्योगिक प्रभावों के परिणामस्वरूप बंगाल में पारंपरिक हथकरघा उद्योगों और वस्त्र मिलों के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई, जिसके तहत आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय ने कलकत्ता में 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वorks' की स्थापना की थी।
- 3. कांग्रेस के भीतर इस बात को लेकर गंभीर वैचारिक मतभेद उत्पन्न हो गए थे कि स्वदेशी और बहिष्कार आंदोलन का विस्तार केवल बंगाल तक ही सीमित रखा जाए या इसे पूरे देश में प्रसारित किया जाए, तथा इसके साथ ही ब्रिटिश सरकार के समक्ष संवैधानिक तरीकों से याचिकाएँ दी जाएं या उग्रवादी तेवर अपनाए जाएं।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
बंगाल विभाजन (1905) के विरोध में प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के दौरान अश्विनी कुमार दत्त ने 'स्वदेश बांधव समिति' की स्थापना की थी जो जन-आंदोलन का एक प्रभावी केंद्र बनी। इसके अतिरिक्त, आचार्य प्रफुल्ल चंद्र राय ने स्वदेशी उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए 'बंगाल केमिकल' की स्थापना की थी। कांग्रेस के भीतर नरमदल और गरमदल के बीच आंदोलन के विस्तार और तौर-तरीकों को लेकर गंभीर मतभेद उभरे थे। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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बंगाल विभाजन (1905) के निर्णय की घोषणा और उसके विरुद्ध चलाए गए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन का प्रस्ताव लॉर्ड कर्ज़न द्वारा 20 जुलाई 1905 को विज्ञापित किया गया था, जिसका मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक सुविधा बताना था, किंतु वास्तविक उद्देश्य बंगाली राष्ट्रवाद की बढ़ती ताकत को कमजोर करना और सांप्रदायिक आधार पर प्रांत का विभाजन करना था।
2. बंगाल विभाजन के विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में प्रसिद्ध 'बहिष्कार प्रस्ताव' पारित किया गया, तथा इसी आंदोलन के दौरान पहली बार बड़े पैमाने पर 'अमार सोनार बांग्ला' गीत गाया गया जिसे बाद में बांग्लादेश ने अपना राष्ट्रगान बनाया।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक आत्मनिर्भरता पर जोर देते हुए आचार्य प्रफुल्ल चन्द्र राय ने 'बंगाल केमिकल एंड फार्मास्युटिकल वक्र्स' की तर्ज पर कई स्वदेशी उद्योगों, बुनकर समितियों और वित्तीय संस्थानों की स्थापना में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।
4. मुस्लिम बहुल आबादी वाले पूर्वी बंगाल में इस आंदोलन को अपार जनसमर्थन मिला, और यहाँ के नवाब सलीमुल्लाह ने स्वदेशी आंदोलन की हर सभा में सक्रिय रूप से भाग लेते हुए ब्रिटिश विभाजनकारी नीतियों का खुलकर विरोध किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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मध्यकालीन भारत के सूफी संप्रदायों और उनकी कार्यप्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. चिश्ती संप्रदाय के संतों ने राज्य की सेवा, राजकीय अनुदान और जागीर स्वीकार करने की नीति का कड़ा विरोध किया और 'समां' (संगीत गोष्ठियों) को अपनी आध्यात्मिक साधना का प्रमुख अंग बनाया, जबकि सुहरावर्दी संप्रदाय के संतों ने इसके विपरीत सरकारी अनुदान और शाही संरक्षण स्वीकार करने में कोई संकोच नहीं किया।
2. नक्शबंदी संप्रदाय, जिसकी स्थापना भारत में ख्वाजा बाकी بالله द्वारा की गई थी, ने संगीत और 'समां' का पूर्ण बहिष्कार किया और रूढ़िवादी सुन्नी इस्लाम के पुनर्स्थापन पर बल देते हुए अकबर की उदार धार्मिक नीतियों का कड़ा विरोध किया।
3. कादिरी संप्रदाय के प्रमुख संत मियां मीर थे, जिन्होंने लाहौर में सिख गुरु अर्जुन देव के साथ घनिष्ठ संबंध बनाए रखे, और इस संप्रदाय के अनुयायी मोक्ष प्राप्ति के लिए 'वह्दत-उल-वजूद' (अस्तित्व की एकता) के सिद्धांत के कट्टर समर्थक थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ (अवध) में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका तथा उनके संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बृजकिसर (बिरजिज कादिर) को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया और ब्रिटिश रेजिडेंसी की घेराबंदी के दौरान सैन्य रणनीतियों का प्रभावी संचालन किया।
2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'फैजाबाद का डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता है, ने अवध और रोहिलखंड के क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध को संगठित किया और चिनहट के युद्ध (जुलाई 1857) में हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को पराजित किया था।
3. लखनऊ के अंतिम पतन के पश्चात बेगम हजरत महल ने आत्मसमर्पण कर दिया और उन्हें ब्रिटिश सरकार द्वारा पेंशन देकर कोलकाता में नजरबंद कर दिया गया, जबकि मौलवी अहमदुल्लाह शाह नेपाल की तराई में अंग्रेजों के विरुद्ध आजीवन संघर्ष करते रहे।
4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह की लोकप्रियता और ब्रिटिश विरोधी गतिविधियों से भयभीत होकर अंग्रेजों ने उन्हें पकड़ने के लिए पचास हजार रुपये का भारी इनाम घोषित किया था, और अंततः एक स्थानीय राजा (पवैन के राजा) की गद्दारी के कारण वे धोखे से मारे गए।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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विजयनगर के अवशेष वर्तमान में किस राज्य में स्थित हैं?
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