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History of India
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वर्ष 1942 के 'भारत छोड़ो आंदोलन' और नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नेतृत्व में गठित 'आज़ाद हिंद फौज' (INA) के वैचारिक व ऐतिहासिक परिदृश्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब मुख्यधारा के अधिकांश वरिष्ठ कांग्रेसी नेता जेल में बंद थे, तब भूमिगत (Underground) नेटवर्क का संचालन करने वाले समाजवादी नेताओं—जैसे जयप्रकाश नारायण, अच्युत पटवर्धन, अरुणा आसफ अली और राममनोहर लोहिया—ने सशस्त्र प्रतिरोध और तोड़फोड़ की गतिविधियों को संगठित किया था।
- 2. सुभाष चंद्र बोस ने सिंगापुर में वर्ष 1943 में 'आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना करने के उपरांत अंडमान और निकोबार द्वीप समूह का नियंत्रण प्राप्त किया और उनका नाम क्रमशः 'शहीद द्वीप' तथा 'स्वराज द्वीप' रखा था।
- 3. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान महात्मा गांधी ने 'करो या मरो' (Do or Die) का नारा दिया था, और इसी दौरान सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी से रेडियो प्रसारण के माध्यम से गांधी जी को आधिकारिक रूप से सर्वप्रथम 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) संबोधित किया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1942 का भारत छोड़ो आंदोलन और आज़ाद हिंद फौज भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के दो अत्यंत महत्वपूर्ण मील के पत्थर हैं। गांधी जी के 'करो या मरो' के आह्वान के बाद जब शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया गया, तब जयप्रकाश नारायण, अरुणा आसफ अली और राममनोहर लोहिया जैसे समाजवादी नेताओं ने भूमिगत रहकर आंदोलन की कमान संभाली। वहीं दूसरी ओर, सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी और जापान के सहयोग से 'आज़ाद हिंद फौज' (विकिपीडिया संदर्भ) का पुनर्गठन किया तथा सिंगापुर में आज़ाद हिंद सरकार की स्थापना की। सुभाष चंद्र बोस ने ही 6 जुलाई 1944 को आज़ाद हिंद रेडियो से सिंगापुर से प्रसारण करते हुए महात्मा गांधी को 'राष्ट्रपिता' कहकर संबोधित किया था। अतः तीनों कथन पूर्णतः सही हैं।
Related Questions
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भारतीय स्वतंत्रता और देश के विभाजन के संदर्भ में माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) और उससे संबंधित विभिन्न प्रावधानों के निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माउंटबेटन योजना के तहत यह प्रावधान किया गया था कि बंगाल और पंजाब की प्रांतीय विधानसभाओं की बैठकें दो भागों में होंगी—एक मुस्लिम बहुसंख्यक जिलों के प्रतिनिधियों के लिए और दूसरी शेष जिलों के प्रतिनिधियों के लिए—ताकि यह लोकतांत्रिक निर्णय लिया जा सके कि प्रांतों का विभाजन किया जाए या नहीं।
2. इस योजना के अंतर्गत उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में शामिल होने का निर्णय लेने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराने का स्पष्ट प्रावधान किया गया था।
3. योजना के अनुसार भारत और पाकिस्तान नामक दो स्वतंत्र डोमिनियन (Dominions) के सृजन और सत्ता हस्तांतरण के लिए 15 अगस्त 1947 की तिथि निर्धारित की गई थी, तथा इस अधिनियम को कानूनी रूप देने के लिए ब्रिटिश संसद में 'भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम 1947' पारित किया गया।
4. माउंटबेटन योजना में यह भी स्पष्ट किया गया था कि रियाسतों (Princely States) के पास यह पूर्ण स्वतंत्रता होगी कि वे चाहें तो भारत या पाकिस्तान में शामिल हों, अथवा ब्रिटिश क्राउन के प्रत्यक्ष संरक्षण में एक स्वतंत्र और संप्रभु देश के रूप में अपना अस्तित्व बनाए रखें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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शिवाजी महाराज का विधिवत राज्याभिषेक 1674 ई. में किस स्थान पर हुआ था?
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पल्लव और चालुक्य राजवंशों के संघर्ष तथा दक्षिण भारत के राजनीतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव नरेश महेन्द्रवर्मन् प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का अनुयायी होने के बावजूद शैव संत अप्पर (तिरुनावुक्करासर) के प्रभाव में आकर शैव धर्म स्वीकार कर लिया था, और उसने महाबलीपुरम में प्रसिद्ध एकश्म (मोनोलिथिक) रथ मंदिरों के निर्माण की शुरुआत कराई थी।
2. चालुक्य सम्राट पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन की विशाल सेना को पराजित किया था, जिसका सजीव और ऐतिहासिक विवरण कालिदास द्वारा रचित 'ऐहोले प्रशस्ति' में प्राप्त होता है, जिसके रचयिता कवि रवि कीर्ति थे।
3. पल्लव शासक नरसिंहवर्मन् प्रथम (महामल्ल) ने चालुक्य राजधानी वतापी (बागलकोट) पर अधिकार कर लिया था और इस विजय के उपरांत उसने 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की थी।
4. राष्ट्रकूट वंश के संस्थापक दन्तिदुर्ग ने चालुक्य वंश के अंतिम शासक कीर्तिवर्मन् द्वितीय को पराजित कर अपनी राजनीतिक सत्ता स्थापित की थी, जिससे चालुक्यों की मुख्य राजनीतिक शक्ति का अंत हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बंगाल विभाजन (1905) और उसके परिणामस्वरूप प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई थी, जिसमें ब्रिटिश वस्तुओं के बहिष्कार का संकल्प लिया गया था।
2. विभाजन के विरोधस्वरूप 16 अक्टूबर 1905 को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, गंगा स्नान किया और 'वंदे मातरम्' गाते हुए सड़कों पर जुलूस निकाले।
3. इस आंदोलन के दौरान मुस्लिम समुदाय की बड़े पैमाने पर सक्रिय भागीदारी रही, और पूर्वी बंगाल के मुस्लिम बहुसंख्यक किसानों ने नवाब सलीमुल्लाह के नेतृत्व में हिन्दू जमींदारों के विरुद्ध स्वदेशी आंदोलन का पूर्ण समर्थन किया था।
4. स्वदेशी आंदोलन के प्रसार के साथ-साथ पारंपरिक शिक्षा प्रणाली के बहिष्कार और राष्ट्रीय नियंत्रण वाली शिक्षा को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अक्टूबर 1905 में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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अकबर ने दास प्रथा कब बंद की?
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