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History of India
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पल्लव और चालुक्य राजवंशों के संघर्ष तथा दक्षिण भारतीय इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. पल्लव नरेश महेन्द्रवर्मन प्रथम को अपने शासनकाल के प्रारंभिक दौर में जैन धर्म का अनुयायी माना जाता है, किंतु बाद में शैव संत अप्पर (तिरुनावुक्करासर) के प्रभाव में आकर उन्होंने शैव धर्म अपना लिया था।
  2. 2. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित कर 'परमेश्वर' की उपाधि धारण की थी, जिसका विस्तृत उल्लेख ह्वेनसांग के यात्रा वृत्तांत और अहोल शिलालेख में मिलता है।
  3. 3. पल्लव राजा नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी (बादामी) पर आक्रमण कर चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय को पराजित किया और 'वातापिकोंड' (वातापी का विजेता) की उपाधि धारण की थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। पल्लव नरेश महेन्द्रवर्मन प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का पालन किया था, किंतु शैव संत अप्पर के संपर्क में आने के बाद उन्होंने शैव धर्म स्वीकार कर लिया। बादामी के चालुक्य राजा पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर उत्तर भारत के सम्राट हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसकी पुष्टि विकिपीडिया संदर्भ के अनुसार रवि कीर्ति रचित अहोल शिलालेख से होती है। इसके अतिरिक्त, पुलकेशिन द्वितीय के हाथों अपने पिता की पराजय का बदला लेते हुए पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम ने वातापी पर आक्रमण किया और पुलकेशिन द्वितीय को पराजित कर 'वातापिकोंड' की उपाधि धारण की।
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