त्वरित लिंक्स
History of India
14 views
भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन के इतिहास में 'गदर पार्टी' तथा 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1913 में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भकना द्वारा स्थापित 'गदर पार्टी' का मुख्यालय सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) के 'युगांतर आश्रम' में बनाया गया था, जहाँ से 'गदर' नामक साप्ताहिक पत्र का प्रकाशन विभिन्न भाषाओं में किया जाता था।
- 2. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिन्दुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन करके 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) की स्थापना की गई थी, जिसमें समाजवाद को इसके घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य बनाया गया था।
- 3. भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने वर्ष 1929 में केंद्रीय विधानसभा में बम फेंका था, जिसका मुख्य उद्देश्य किसी भी अंग्रेज अधिकारी की हत्या करना था ताकि ब्रिटिश सरकार में खौफ पैदा किया जा सके और वे अपने ऊपर चल रहे लाहौर षड्यंत्र केस से बच सकें।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि वर्ष 1913 में सोहन सिंह भकना, लाला हरदयाल और अन्य प्रवासियों द्वारा अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को में 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' की स्थापना की गई थी, जिसे बाद में 'गदर पार्टी' के रूप में जाना गया और इसका मुख्यालय 'युगांतर आश्रम' था। कथन 2 सही है क्योंकि सितंबर 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में HRA का नाम बदलकर 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया, जिसमें भगवती चरण बोहरा द्वारा समाजवादी विचारधारा आधारित नया घोषणापत्र तैयार किया गया था। कथन 3 गलत है क्योंकि 8 अप्रैल 1929 को भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त द्वारा केंद्रीय विधानसभा में बम फेंकने का उद्देश्य किसी की हत्या करना नहीं था, बल्कि 'ब बहरों को सुनाना' था और उन्होंने अपनी गिरफ्तारी स्वेच्छा से दी ताकि वे अदालत को अपने क्रांतिकारी विचारों के प्रचार का मंच बना सकें। अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
भारतीय स्वतंत्रता, माउंटबेटन योजना और देश के विभाजन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 3 जून 1947 को प्रस्तुत माउंटबेटन योजना में ब्रिटिश भारत के विभाजन का प्रस्ताव था, जिसके तहत पंजाब और बंगाल की विधानसभाओं को अपने-अपने प्रांतों के विभाजन के पक्ष या विपक्ष में निर्णय लेने के लिए अलग-अलग बैठकें करने का अधिकार दिया गया था।
2. भारतीय स्वतंत्रता अधिनियम, 1947 (Indian Independence Act 1947) के प्रावधानों के अनुसार, 15 अगस्त 1947 को ब्रिटिश संसद का भारत पर से प्रभुत्व समाप्त हो गया और दोनों नए डोमिनियन (भारत और पाकिस्तान) को अपने संविधान बनाने तथा ब्रिटिश राष्ट्रमंडल (Commonwealth) से बाहर होने की पूर्ण स्वतंत्रता दी गई।
3. सीमा आयोग (Boundary Commission) के गठन के लिए सर सिरिल रेडक्लिफ को बंगाल और पंजाब की सीमाओं के निर्धारण की जिम्मेदारी सौंपी गई थी, और उनकी अध्यक्षता में गठित इस आयोग ने 15 अगस्त 1947 से ठीक पहले अपने सीमा रेखा पुरस्कार (Award) की घोषणा कर दी थी।
4. पंजाब और बंगाल की सीमाओं के निर्धारण के समय सिलहट जिले (असम) में हुए जनमत संग्रह (Referendum) में जनता ने भारत के साथ बने रहने के पक्ष में स्पष्ट बहुमत दिया था, जिसके परिणामस्वरूप सिलहट को तत्कालीन पूर्वी पाकिस्तान में शामिल होने से बचा लिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
माउंटबेटन योजना (3 जून 1947) और उसके क्रियान्वयन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. माउंटबेटन योजना के अंतर्गत भारत विभाजन के तौर-तरीकों को तय करने के लिए पंजाब और बंगाल की प्रांतीय विधानसभाओं की अलग-अलग बैठकें बुलाई गईं, जिनमें दोनों प्रांतों के हिंदू बहुل और मुस्लिम बहुल जिलों के सदस्यों ने अपने प्रांतों के विभाजन के पक्ष में मतदान किया।
2. उत्तर-पश्चिम सीमा प्रांत (NWFP) और असम के सिलहट जिले में भारत या पाकिस्तान में से किसी एक को चुनने के लिए जनमत संग्रह (Referendum) कराया गया, जिसमें खान अब्दुल गफ्फार खान और उनके 'खुदाई खिदमतगार' संगठन ने पाकिस्तान के पक्ष में मतदान का पुरजोर समर्थन किया था।
3. रियासतों (Princely States) के भविष्य के संबंध में माउंटबेटन योजना में स्पष्ट किया गया कि उन्हें या तो भारत या पाकिस्तान में शामिल होना होगा अथवा वे चाहें तो स्वतंत्र रह सकते हैं, और उन्हें ब्रिटिश क्राउन की सर्वोच्चता (Paramountcy) की समाप्ति के साथ ही अपनी संप्रभुता वापस मिल जाएगी।
4. पंजाब और बंगाल की सीमाओं के निर्धारण और सीमांकन के लिए ब्रिटिश सरकार द्वारा सर सिरिल रेडक्लिफ की अध्यक्षता में दो अलग-अलग 'सीमा आयोग' (Boundary Commission) गठित किए गए, जिन्होंने 15 अगस्त 1947 से पूर्व ही अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी थी, जिससे विभाजन के समय उत्पन्न होने वाली प्रशासनिक जटिलताओं का पूरी तरह समाधान हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की प्रशासनिक और सांस्कृतिक प्रणालियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पल्लव शासक महेंद्रवर्मन प्रथम ने अपने शासनकाल में 'मत्तविलासं प्रहसन' नामक प्रसिद्ध नाटक की रचना की, और पाशुपत शैव धर्म अपनाने से पूर्व वे जैन धर्म के अनुयायी थे।
2. बादामी के चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय की 'ऐहोल प्रशस्ति' के अनुसार, उसने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, तथा इस प्रशस्ति की भाषा प्राकृत और लिपि खरोष्ठी है।
3. चोल प्रशासन के दौरान ग्रामीण स्वशासन के अंतर्गत 'वरियम' (समितियों) के सदस्यों के चयन के लिए 'कुडवोलाई' (Kudavolai) नामक पर्ची-डालकर चुनाव पद्धति का विस्तृत वर्णन उत्तरमेरूर शिलालेखों में मिलता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश नीतियों में हुए आमूल-चूल परिवर्तनों और भारत सरकार अधिनियम 1858 के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत सरकार अधिनियम 1858 के तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' की द्वैध शासन प्रणाली को समाप्त कर दिया गया तथा भारत के शासन का पूर्ण नियंत्रण सीधे ब्रिटिश क्राउन के अंतर्गत 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) को सौंप दिया गया, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय भारतीय परिषद का गठन किया गया।
2. इलाहाबाद दरबार में 1 नवंबर 1858 को महारानी विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा को गवर्नर-जनरल लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया, जिसमें यह गारंटी दी गई कि ब्रिटिश सरकार अब भविष्य में किसी भी देशी रियासत का विलय नहीं करेगी और गोद लेने के अधिकार (दत्तक पुत्र) को मान्यता दी जाएगी।
3. महारानी की घोषणा में यह स्पष्ट किया गया कि भारतीय प्रजा के साथ नस्ल, धर्म, जाति या जन्मस्थान के आधार पर सरकारी सेवाओं में कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा और सभी योग्य भारतीयों को उच्च पदों पर नियुक्ति में पूर्ण अवसर दिए जाएंगे।
4. विद्रोह के तुरंत पश्चात सेना के पुनर्गठन के तहत ब्रिटिश सैनिकों और भारतीय सैनिकों के अनुपात में भारी वृद्धि की गई, तथा बंगाल की सेना में उच्च जातियों (ब्राह्मणों और राजपूतों) के सैनिकों का वर्चस्व बढ़ाकर सिख, गोरखा और पठानों की संख्या को लगभग शून्य कर दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
वर्ष 1857 के विद्रोह के तात्कालिक कारणों और चर्बी वाले कारतूस की घटना के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. ब्रिटिश सेना में पुरानी 'ब्राउन बेस' मस्कट बंदूक के स्थान पर शामिल की गई नई 'एनफील्ड राइफल' के कारतूस के आवरण को लोड करने से पहले दांतों से काटना पड़ता था, जिसमें गाय और सुअर की चर्बी होने की अफवाह ने भारतीय सैनिकों में भारी आक्रोश पैदा किया था।
2. 34वीं बंगाल नेटिव इन्फैंट्री (34th Bengal Native Infantry) के सिपाही मंगल पांडे ने 29 मार्च 1857 को बैरकपुर छावनी में इस नई राइफल के कारतूसों के प्रयोग का पुरजोर विरोध करते हुए अपने वरिष्ठ अधिकारियों (लेफ्टिनेंट बॉग और सार्जेंट ह्यूसन) पर आक्रमण कर दिया था।
3. मंगल पांडे की इस बगावत के तुरंत बाद बैरकपुर छावनी में पूरी रेजीमेंट ने एक साथ विद्रोह कर दिया और ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ दिल्ली की ओर कूच कर दिया था।
4. इस घटना के उपरांत मंगल पांडे को गिरफ्तार कर लिया गया और सैन्य अदालत द्वारा मुकदमा चलाए जाने के पश्चात 8 अप्रैल 1857 को उन्हें फांसी दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.