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History of India
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मुगलकालीन प्रशासनिक व्यवस्था और राजस्व सुधारों के संदर्भ में, 'दहसाला' (या बन्दोबस्त) प्रणाली के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. इस राजस्व प्रणाली को अकबर के शासनकाल में उनके योग्य वित्त मंत्री राजा टोडरमल द्वारा वर्ष 1580 में पूर्ण रूप से लागू किया गया था, जिसे 'आइन-ए-दहसाला' भी कहा जाता है।
  2. 2. इस व्यवस्था के तहत पिछले दस वर्षों (1570 से 1579 तक) के दौरान विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और औसत बाजार मूल्यों का सावधानीपूर्वक अध्ययन कर राजस्व का निर्धारण किया गया था।
  3. 3. इस बंदोबस्त प्रणाली के अंतर्गत भूमि को चार श्रेणियों—पलाज, परती, चाचर और बंजर—में वर्गीकृत किया गया था, जिसमें से 'चाचर' भूमि पर खेती करना सबसे आसान था क्योंकि वह प्रतिवर्ष उपजाऊ बनी रहती थी।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

मुगल सम्राट अकबर के शासनकाल में भू-राजस्व व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए वर्ष 1580 में 'दहसाला' (या जाबती) प्रणाली की शुरुआत की गई थी, जिसे लागू करने में उनके प्रसिद्ध वित्त मंत्री राजा टोडरमल ने मुख्य भूमिका निभाई थी। इस प्रणाली के अंतर्गत पिछले दस वर्षों (1570-79) के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उत्पादित विभिन्न फसलों के औसत उत्पादन और उनके औसत प्रचलित बाजार मूल्यों का आकलन कर राज्य का हिस्सा (सामान्यतः एक-तिहाई) निश्चित किया गया था। जहाँ तक भूमि के वर्गीकरण का प्रश्न है, 'पलाज' वह उपजाऊ भूमि थी जिस पर प्रतिवर्ष खेती की जाती थी, जबकि 'परती' को कुछ समय के लिए खाली छोड़ा जाता था। 'चाचर' वह भूमि थी जिस पर तीन या चार वर्षों तक खेती नहीं की जाती थी, और 'बंजर' वह भूमि थी जो पाँच या उससे अधिक वर्षों तक उपजाऊ नहीं रहती थी। अतः कथन 3 गलत है क्योंकि चाचर भूमि प्रतिवर्ष उपजाऊ नहीं रहती थी, बल्कि इसे कुछ वर्षों के लिए खाली छोड़ा जाता था। इस विषय के विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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