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History of India
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मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों तथा उनके प्रमुख विचारकों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी थी, तथा उन्होंने जाति व्यवस्था का कड़ा विरोध करते हुए तमिल भाषा को अपने उपदेशों और भजनों का माध्यम बनाया।
- 2. सूफी संत मइनुद्दीन चिश्ती द्वारा स्थापित चिश्ती सिलसिले ने शाही संरक्षण (पैट्रोनटेज) को अनिवार्य रूप से स्वीकार किया और सुल्तानों के दरबार में उच्च पदों को प्राप्त कर राज्य की नीतियों को प्रत्यक्ष रूप से प्रभावित किया।
- 3. महाराष्ट्र के वारकरी संप्रदाय के प्रमुख संत ज्ञानेश्वर (ज्ञानेश्वरी के रचयिता) और तुकाराम ने पंढरपुर के विठोबा (विट्ठल) की उपासना पर बल दिया तथा कर्मकांडों और संस्कृत भाषा के एकाधिकार को चुनौती दी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
मध्यकालीन भारत में भक्ति आंदोलन की शुरुआत दक्षिण भारत में अलवार और नयनार संतों द्वारा की गई थी। उन्होंने सामाजिक समरसता पर जोर दिया और तमिल भाषा में अपने विचार प्रसारित किए, जिससे आम जनता तक उनकी पहुँच आसान हुई। इसके विपरीत, चिश्ती सिलसिले के संतों ने सुल्तानों और राजाओं के राजकीय संरक्षण तथा दरबार से दूरी बनाए रखने की नीति का पालन किया, जबकि शाही संरक्षण स्वीकार करने की नीति मुख्य रूप से 'सुहरावर्दी' सिलसिले की विशेषता थी। महाराष्ट्र में वारकरी संप्रदाय के संतों ने विठोबा की पूजा को बढ़ावा दिया और क्षेत्रीय भाषा के प्रयोग से धार्मिक लोकतान्त्रीकरण को बल दिया। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Related Questions
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वर्ष 1857 के विद्रोह के विभिन्न कारणों (राजनीतिक, आर्थिक, सामाजिक और धार्मिक) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजनीतिक कारणों के अंतर्गत लॉर्ड डलहौजी की 'व्यपगत सिद्धांत' (Doctrine of Lapse) नीति ने सातारा, नागपुर, झाँसी और अवध जैसी रियासतों का ब्रिटिश साम्राज्य में विलय कर दिया, जिससे भारतीय शासकों और वहाँ की जनता में गहरा असंतोष फैल गया था।
2. आर्थिक कारणों में ब्रिटिश भू-राजस्व नीतियों और उद्योगों के विनाशात्मक प्रभावों ने पारंपरिक ग्रामीण अर्थव्यवस्था को तहस-नहस कर दिया, जिसके परिणामस्वरूप किसानों और पारंपरिक शिल्पकारों का एक बड़ा वर्ग अंग्रेजों के विरुद्ध हो गया।
3. सामाजिक और धार्मिक कारणों में वर्ष 1850 के 'धार्मिक निर्योग्यता अधिनियम' (Religious Disabilities Act) ने हिंदू धर्म त्यागने या ईसाई धर्म अपनाने वाले व्यक्तियों को उनके पैतृक संपत्ति के अधिकारों से वंचित करने के पुराने प्रावधान को समाप्त कर दिया, जिससे रूढ़िवादी भारतीयों में यह आशंका उत्पन्न हो गई कि ब्रिटिश सरकार जानबूझकर ईसाई धर्म को बढ़ावा दे रही है।
4. ब्रिटिश सेना के भीतर मौजूद नस्लीय भेदभाव, भारतीय सैनिकों को मिलने वाले कम वेतन और पदोन्नति के अवसरों के अभाव ने भी इस विद्रोह की पृष्ठभूमि तैयार करने में एक महत्वपूर्ण उत्प्रेरक की भूमिका निभाई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध उठे विद्रोह को दबाने के लिए नियुक्त किए गए सैन्य अधिकारियों और उनके संबंधित कार्यक्षेत्रों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. जॉन निकलसन — दिल्ली में विद्रोह का दमन एवं पुनर्धिकार
2. कॉलिन कैंपबेल — कानपुर और लखनऊ में विद्रोह का दमन
3. ह्यूरोज — झाँसी, कलपी और ग्वालियर क्षेत्र में विद्रोह का दमन
4. जेम्स आउट्राम — बनारस और इलाहाबाद क्षेत्र में विद्रोह का तात्कालिक दमन
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से सही सुमेलित हैं?
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ताजमहल की वास्तुकला:
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इतालवी यात्री "निकोलो कोंटी" किसके शासनकाल में विजयनगर आया था?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के विभिन्न क्षेत्रों (विशेषकर पटना, दानापुर, आरा और मुजफ्फरपुर) में हुए घटनाक्रमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक प्रसिद्ध पुस्तक विक्रेता पीर अली खाँ ने किया था, जिनके नेतृत्व में हुए इस जन-विद्रोह के दौरान अफीम के एक ब्रिटिश अधिकारी डॉ. लॉयल की हत्या कर दी गई थी।
2. दानापुर छावनी (Danapur Cantonment) के 7वीं, 8वीं और 40वीं देशी पैदल सेना के सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और वे सोन नदी पार करके शाहाबाद जिले में प्रवेश कर गए थे, जहाँ उन्होंने बाबू कुंवर सिंह के नेतृत्व को स्वीकार किया था।
3. मुजफ्फरपुर और छपरा क्षेत्र में विद्रोह के दौरान यूरोपीय अधिकारियों को भारी प्रतिरोध का सामना करना पड़ा था, तथा छपरा (सारण) में मोहम्मद हुसैन खान के नेतृत्व में स्थानीय विद्रोही सैनिकों और जमींदारों ने ब्रिटिश सत्ता को खुली चुनौती दी थी।
4. आरा (शाहाबाद) में बाबू कुंवर सिंह द्वारा अंग्रेजों के विरुद्ध लड़ी गई अंतिम सफल सैन्य झड़प उनके गृह नगर जगदीशपुर में अप्रैल 1858 में लड़ी गई थी, जिसमें उन्होंने ब्रिटिश सेना के कैप्टन ली ग्रांड को पूरी तरह पराजित किया था और इसके तुरंत बाद उनकी प्राकृतिक मृत्यु हो गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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