त्वरित लिंक्स
History of India
1 views
प्राचीन भारतीय बौद्ध और जैन धर्मों के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके संघ के नियमों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बौद्ध धर्म के 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (कार्यालय-कारण सिद्धांत) के अनुसार संसार की प्रत्येक वस्तु किसी न किसी कारण से उत्पन्न होती है, जबकि जैन धर्म का 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) यह प्रतिपादित करता है कि ज्ञान सापेक्ष होता है और किसी भी वस्तु के बारे में एक साथ कई दृष्टिकोण हो सकते हैं।
- 2. प्रारंभिक जैन संघ और बौद्ध संघ दोनों में ही वर्ण व्यवस्था का कड़ा विरोध करते हुए समाज के सभी वर्गों के लिए प्रवेश खुला था, तथा बौद्ध संघ में प्रवेश पाने वाली प्रथम महिला महाप्रजापति गौतमी थीं, जबकि जैन संघ में महावीर स्वामी की पुत्री प्रियदर्शिनी प्रथम भिक्षुणी बनीं।
- 3. बौद्ध धर्म 'अनात्मवाद' (आत्मा के अस्तित्व को अस्वीकार करना) में विश्वास करता है, जबकि जैन दर्शन जीव (आत्मा) के शाश्वत अस्तित्व को स्वीकार करता है और मोक्ष प्राप्ति के लिए शरीर त्याग हेतु 'लेखना' या 'संथारा' पद्धति का विधान करता है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है: बौद्ध धर्म का केंद्रीय दर्शन 'प्रतीत्यसमुत्पाद' है, जो यह बताता है कि प्रत्येक घटना या वस्तु किसी पूर्व कारण पर आधारित होती है। वहीं जैन धर्म का 'अनेकांतवाद' और 'स्यादवाद' यह मानता है कि सत्य बहुआयामी होता है। कथन 2 गलत है: बौद्ध संघ में प्रवेश पाने वाली प्रथम महिला महाप्रजापति गौतमी थीं, किंतु जैन परंपरा के अनुसार जैन संघ में प्रथम भिक्षुणी चंपा (दधिवाहन की पुत्री) बनी थीं, न कि प्रियदर्शिनी। कथन 3 सही है: बौद्ध धर्म अनात्मवाद का प्रतिपादन करता है यानी वह स्थिर आत्मा के अस्तित्व को नहीं मानता, जबकि जैन धर्म जीव (आत्मा) को शाश्वत मानता है और संथारा (संलेखना) के माध्यम से प्राण त्यागने की अनुमति देता है। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Related Questions
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के समय दिल्ली में विद्रोही सैनिकों और मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर के मध्य प्रशासनिक समन्वय तथा सत्ता के वास्तविक स्वरूप के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पहुँचने पर वृद्ध मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर ने तुरंत उत्साहपूर्वक इस विद्रोह का नेतृत्व स्वीकार कर लिया और अपनी व्यक्तिगत देखरेख में एक सुदृढ़ सैन्य रणनीति तैयार की।
2. दिल्ली में विद्रोह के सुचारू संचालन के लिए एक 'कोर्ट ऑफ एडमिनिस्ट्रेशन' (प्रशासनिक न्यायालय) का गठन किया गया था, जिसमें नागरिक और सैन्य दोनों सदस्य शामिल थे, किंतु इसके अधिकांश महत्वपूर्ण निर्णय सम्राट की व्यक्तिगत अनुमति के बिना लिए जाते थे।
3. विद्रोही सैनिकों में अनुशासनहीनता, वित्तीय संकट और प्रशासनिक नियंत्रण के अभाव के कारण बहादुर शाह जफर की स्थिति एक नाममात्र के प्रतीक से अधिक नहीं रह गई थी, और वे सैनिकों की मनमानी पर प्रभावी अंकुश लगाने में असमर्थ थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
भक्ति और सूफी आंदोलन के वैचारिक विकास, संतों की दार्शनिक प्रणालियों तथा उनके प्रभाव के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शंकराचार्य द्वारा प्रतिपादित अद्वैत वेदांत के दर्शन के विपरीत, दक्षिण भारत के वैष्णव संत रामानुज ने 'विशिष्टाद्वैत' मत का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जीव और ब्रह्म पृथक होने के बावजूद अंततः ब्रह्म का ही एक अंश हैं और भक्ति ही मोक्ष का एकमात्र साधन है।
2. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को प्रसारित करने वाले रामानंद ने जातिगत बंधनों और ऊंच-नीच के भेदों को अस्वीकार करते हुए सभी जातियों के लोगों को अपने शिष्य के रूप में स्वीकार किया, जिनमें उनके प्रसिद्ध शिष्यों में रैदास (जूता बनाने वाले), सेना (नाई) और कबीर (जुलाहा) शामिल थे।
3. सूफी संतों की 'चिश्ती सिलसिला' (Chisti Order) की परंपरा में संगीत (जिसे 'समां' कहा जाता है) को ईश्वर प्राप्ति का माध्यम माना गया, और ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने अजमेर को अपना मुख्य केंद्र बनाकर भारत में इस सिलसिले की नींव रखी थी।
4. सूफी संतों की 'सुहरावर्दी सिलसिला' (Suhrawardy Order) के संतों ने चिश्ती संतों के विपरीत राजकीय संरक्षण को अस्वीकार करने की कठोर नीति अपनाई और जीवनयापन के लिए भिक्षावृत्ति को अनिवार्य मानते हुए शाही जागीरों या आर्थिक अनुदानों को लेने से पूरी तरह इंकार कर दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
हम्पी में स्थित प्रसिद्ध "विट्ठलस्वामी मंदिर" का निर्माण किसने करवाया था?
→
दिल्ली में 1857 के विद्रोह के दौरान मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर की भूमिका और विद्रोहियों के संगठनात्मक स्वरूप के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मेरठ के सिपाहियों द्वारा दिल्ली पहुँचकर सम्राट बहादुर शाह जफर को भारत का सम्राट घोषित किए जाने के बाद, सम्राट ने विद्रोहियों के सैन्य और प्रशासनिक मामलों के प्रबंधन के लिए एक 'शासन न्यायालय' (Court of Administration) का गठन किया था, जिसमें दस सदस्यीय परिषद थी और इसके अधिकांश सदस्य सैन्य अधिकारी व नागरिक प्रतिनिधि थे।
2. बहादुर शाह जफर ने स्वेच्छा से इस विद्रोह का नेतृत्व पूरी ऊर्जा और राजनीतिक दूरदर्शिता के साथ स्वीकार किया था, तथा उन्होंने अपनी शाही सेना का प्रत्यक्ष संचालन करते हुए दिल्ली की सुरक्षा के लिए स्वयं युद्ध के मैदान में अंग्रेजों का मुकाबला किया था।
3. ब्रिटिश सेना द्वारा दिल्ली पर पुनः अधिकार प्राप्त करने के पश्चात ब्रिटिश अधिकारी मेजर हडसन ने हुमायूँ के मकबरे से बहादुर शाह जफर को गिरफ्तार किया था और उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर उन्हें म्यांमार (बर्मा) की रंगून जेल में निर्वासित कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
→
दिल्ली सल्तनत का कालखंड आधिकारिक रूप से किस वर्ष समाप्त हुआ?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.