BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
15 views

वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध के क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरjis कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह की बागडोर संभाली और ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का नेतृत्व किया।
  2. 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, ने फैजाबाद और अवध क्षेत्र में ब्रिटिश साम्राज्य के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और विद्रोही सैनिकों के सबसे प्रमुख सैन्य रणनीतिकारों में उभरे।
  3. 3. लखनऊ की घेराबंदी के दौरान ब्रिटिश सेनापति सर कॉलिन कैंपबेल ने बेगम हजरत महल के महलों पर अधिकार कर लिया, जिसके पश्चात बेगम ने आत्मसमर्पण कर दिया और ब्रिटिश सरकार से पेंशन स्वीकार कर ली।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के विद्रोह में अवध और लखनऊ का केंद्र अत्यधिक महत्वपूर्ण था। बेगम हजरत महल (अवध के निष्कासित नवाब वाजिद अली शाह की पत्नी) ने अपने नाबालिग बेटे बिरजिस कादिर को नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह का नेतृत्व किया। वहीं, मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने अवध और रुहेलखंड क्षेत्र में ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ कड़ा प्रतिरोध संगठित किया, जिन्हें उनकी ड्रम बीटिंग रणनीति के कारण 'डंका शाह' भी कहा जाता था। हालांकि, कथन 3 गलत है क्योंकि बेगम हजरत महल ने कभी अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण नहीं किया; बल्कि पराजय के बाद वे नेपाल चली गईं और वहीं उनकी मृत्यु हुई। विकिपीडिया संदर्भ
Share:

Related Questions

→ निम्नलिखित में से 1857 के विद्रोह के दौरान ब्रिटिश सैन्य अधिकारियों और उनके द्वारा पुनः अधिकृत किए गए संबंधित क्षेत्रों/केंद्रों का कौन-सा युग्म सही सुमेलित नहीं है? → बंगाल विभाजन (1905) और इसके विरोध में प्रारंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की घोषणा सर्वप्रथम जुलाई 1905 में की गई थी तथा लॉर्ड कर्जन ने प्रशासनिक सुविधा को इसका मुख्य आधार बताया था, किंतु इसका वास्तविक उद्देश्य बंगाल में उभर रही राष्ट्रवादी चेतना को कमजोर करना और सांप्रदायिक आधार पर राजनीतिक विभाजन पैदा करना था। 2. 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में 'स्वदेशी आंदोलन' की औपचारिक घोषणा की गई और प्रसिद्ध 'बहिष्कार प्रस्ताव' (Boycott Resolution) पारित किया गया। 3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के प्रसिद्ध गीतकार और कवि मुकुंद दास ने 'अमार सोनार बांग्ला' गीत की रचना की थी, जिसे बाद में स्वतंत्र बांग्लादेश ने अपना राष्ट्रीय गान बनाया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व व्यवस्थाओं (स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल, बिहार और उड़ीसा में लॉर्ड कॉर्नवालिस द्वारा 1793 में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' (Permanent Settlement) के तहत जमींदारों को भूमि का वास्तविक स्वामी मान लिया गया, जिससे पारंपरिक रूप से भूमि पर साझा अधिकार रखने वाले कृषकों के अधिकारों का हनन हुआ और वे केवल 'किरायेदार' (Tenant) बनकर रह गए। 2. थॉमस मुनरो और कैप्टन रीड द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बंबई प्रेसीडेंसी में विकसित 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और किसान (रयत) के बीच सीधा भू-राजस्व समझौता हुआ, तथा इस व्यवस्था के अंतर्गत राजस्व की दरें अत्यधिक लचीली थीं, जिससे फसल खराब होने पर किसानों को स्थायी रूप से कर छूट स्वतः मिल जाती थी। 3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में लागू की गई 'महालवारी व्यवस्था' (Mahalwari System) में राजस्व का निर्धारण व्यक्तिगत कृषक स्तर पर न करके संपूर्ण ग्राम या 'महाल' के स्तर पर किया जाता था, और इसके संग्रहण की जिम्मेदारी पारंपरिक रूप से ग्राम के मुखिया या लंबरदार को सौंपी गई थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की राजनीतिक संरचना, प्रशासनिक व्यवस्था और उपाधि परंपराओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. पल्लव शासक महेंद्रवमन् प्रथम ने अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म का अनुयायी होने के बावजूद संत अप्पर के प्रभाव में आकर शैव धर्म स्वीकार किया था, तथा उसने 'मत्तविलास प्रहसन' जैसे संस्कृत नाटक की रचना की और 'विचित्राचित्त', 'गुणभाड़' जैसी उपाधियाँ धारण की थीं। 2. बादामी के चालुक्य नरेश पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसकी पुष्टि अहोल प्रशस्ति से होती है, और इस प्रशस्ति की रचना जैन कवि रवि कीर्ति द्वारा की गई थी जो संस्कृत काव्य का एक उत्कृष्ट उदाहरण है। 3. चोल साम्राज्य की स्थानीय स्वशासन प्रणाली, विशेषकर उत्तरमेरूर अभिलेखों में वर्णित ग्राम सभाओं और समितियों (कुटुम्ब) के चुनाव के लिए 'कुरावोलै' (पॉट-टिकट या पर्ची प्रणाली) का उल्लेख मिलता है, जिसके अनुसार महिलाओं को भी इन प्रशासनिक समितियों में मतदान और चुनाव लड़ने का पूर्ण अधिकार प्राप्त था। 4. राष्ट्रकूट शासक ध्रुव और गोपाल (पाल वंश) के साथ त्रिपक्षीय संघर्ष में उलझने वाले पल्लव शासक नन्दिवर्मन् द्वितीय ने महाबलीपुरम के प्रसिद्ध 'वैकुंठ पेरुमल मंदिर' का निर्माण करवाया था, जो विष्णु को समर्पित है और इसकी दीवारों पर पल्लव इतिहास के दृश्यों का उत्कीर्णन मिलता है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की भूमिका के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजििस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ में विद्रोह की बागडोर संभाली और ब्रिटिश सेनाओं के विरुद्ध लंबी घेराबंदी का नेतृत्व किया। 2. मौलवी अहमदुल्लाह शाह, जिन्हें 'डंका शाह' के नाम से भी जाना जाता था, ने फैजाबाद और अवध क्षेत्र में अंग्रेजों के विरुद्ध जिहाद का आह्वान किया और ब्रिटिश सेनापति कैंपबेल तथा आउट्राम की संयुक्त सेनाओं को शुरुआती संघर्षों में कड़ी टक्कर दी। 3. लखनऊ की अंतिम पराजय के पश्चात बेगम हजरत महल ने आत्मसमर्पण कर दिया और ब्रिटिश सरकार से पेंशन स्वीकार कर कलकत्ता में जीवन व्यतीत किया। 4. मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों ने ₹50,000 का भारी इनाम घोषित किया था, और अंततः पुवायाँ के एक स्थानीय राजा के विश्वासघात के कारण वे ब्रिटिश सैनिकों द्वारा धोखे से मार दिए गए। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.