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History of India
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वर्ष 1858 के 'भारत सरकार अधिनियम' और ब्रिटिश क्राउन की ऐतिहासिक घोषणा के पश्चात ब्रिटिश नीतियों में हुए परिवर्तनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. इस अधिनियम के तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर भारत के प्रशासन की संपूर्ण शक्ति ब्रिटिश कैबिनेट के एक सदस्य 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) को सौंप दी गई, जिसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (Council of India) का गठन किया गया।
- 2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (1858) में देशी रियासतों के प्रति अपनाई जाने वाली नीति में परिवर्तन करते हुए ब्रिटिश सरकार ने भविष्य में किसी भी प्रकार के राज्य-विलय (Annexation) और 'हड़प नीति' (Doctrine of Lapse) को हमेशा के लिए त्यागने की घोषणा की तथा राजाओं को 'दत्तक पुत्र' (Adopted Son) लेने के अधिकार को मान्यता दी।
- 3. इस घोषणा में यह स्पष्ट प्रावधान किया गया कि सेना में यूरोपीय सैनिकों के अनुपात को कम किया जाएगा और भारतीय सैनिकों की संख्या में भारी वृद्धि की जाएगी ताकि भविष्य में पुनः ऐसे किसी विद्रोह को तुरंत रोका जा सके।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश संसद ने 2 अगस्त 1858 को 'भारत सरकार अधिनियम, 1858' पारित किया, जिसके द्वारा भारत का शासन ईस्ट इंडिया कंपनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश क्राउन के अधीन चला गया। इसके तहत 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर्स' को समाप्त कर समस्त अधिकार 'भारत के राज्य सचिव' और उसकी सहायता के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' को सौंप दिए गए। क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (जो 1 नवंबर 1858 को इलाहाबाद में लॉर्ड कैननिंग द्वारा पढ़ी गई) में यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार देशी रियासत के विलय की नीति (हड़प नीति) को त्यागती है तथा भविष्य में राजकुमारों को गोद लेने के अधिकार को मान्यता दी जाएगी। किंतु, कथन 3 असत्य है क्योंकि विद्रोह के बाद सेना की नीति में इसके विपरीत परिवर्तन किया गया था; भारतीय सैनिकों के अनुपात को कम किया गया (विशेषकर बंगाल सेना में) और यूरोपीय सैनिकों की संख्या में भारी वृद्धि की गई, साथ ही सामरिक महत्व के तोपखाने जैसे महत्वपूर्ण सैन्य विभाग पूरी तरह यूरोपीय नियंत्रण में रखे गए। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक, आर्थिक और सैन्य विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इल्तुतमिश ने सल्तनत की वित्तीय स्थिरता को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से केंद्रीय स्तर पर 'तुर्कान-ए-चहलगानी' (चालीस गुलाम सरदारों का दल) का गठन किया तथा सल्तनत को आर्थिक मजबूती देने के लिए शुद्ध अरबी शैली के चांदी का टंका और तांबे का जीतल चलाया।
2. अलाउद्दीन खिलजी ने प्रशासनिक नियंत्रण को मजबूत करने के लिए घोड़ों को दागने और सैनिकों का हुलिया लिखने की प्रणाली शुरू की तथा बाजार नियंत्रण के लिए 'दीवान-ए-रियासत' और 'शहना-ए-मंडी' नामक विशेष अधिकारियों की नियुक्ति की।
3. मुहम्मद बिन तुगलक के प्रशासनिक प्रयोगों में दोआब कर वृद्धि और सांकेतिक मुद्रा का प्रचलन शामिल था, तथा कृषि के विकास के लिए उसने 'दीवान-ए-कोही' नामक एक नए कृषि विभाग की स्थापना की थी।
4. फिरोजशाह तुगलक ने सल्तनत की अर्थव्यवस्था को उदार बनाते हुए जागीरदारी और इक्तादारी व्यवस्था को समाप्त कर दिया तथा किसानों के सभी प्रकार के पुराने ऋणों को माफ करते हुए सिंचाई कर को पूरी तरह से गैर-कानूनी घोषित कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में वीर कुंवर सिंह और उनके उत्तराधिकारी अमर सिंह के संघर्ष के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वीर कुंवर सिंह ने आरा पर कब्जा करने के बाद ब्रिटिश सेनापति मेजर विंसेंट आयर के साथ बीबीगंज के पास हुए कड़े संघर्ष में पराजय के बावजूद गोरिल्ला युद्धनीति अपनाई और आजमगढ़ तक अंग्रेजों को चुनौती दी।
2. गंगा नदी पार करते समय ब्रिटिश सेना की गोली से गंभीर रूप से घायल होने के उपरांत वीर कुंवर सिंह ने स्वयं अपना बायाँ हाथ काटकर गंगा में अर्पित कर दिया था।
3. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु (26 अप्रैल 1858) के पश्चात उनके छोटे भाई अमर सिंह ने जगदीशपुर के जंगलों और कैमूर की पहाड़ियों से अंग्रेजी सेना के विरुद्ध सशस्त्र प्रतिरोध को जारी रखते हुए ब्रिटिश शासन के समानांतर एक प्रभावी प्रशासनिक व्यवस्था स्थापित की थी।
4. अमर सिंह को युद्ध के अंत में ब्रिटिश सरकार द्वारा गिरफ्तार कर लिया गया था और उन पर राजद्रोह का मुकदमा चलाकर कलकत्ता उच्च न्यायालय के आदेश पर सार्वजनिक रूप से फांसी दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार में स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने वाले वीर कुंवर सिंह और उनके भाई अमर सिंह के संघर्ष के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. जगदीशपुर के जमींदार वीर कुंवर सिंह ने अप्रैल 1858 में ब्रिटिश सेनापति कैप्टन ली ग्रांड को मात देते हुए आरा के निकट एक भीषण संघर्ष में अंग्रेजों को पराजित किया था, हालांकि इस युद्ध में गंभीर रूप से घायल होने के कुछ दिनों पश्चात उनका निधन हो गया था।
2. वीर कुंवर सिंह की मृत्यु के उपरांत उनके छोटे भाई अमर सिंह ने अंग्रेजों के विरुद्ध संघर्ष को जारी रखा और कैमूर की पहाड़ियों से ब्रिटिश सत्ता के खिलाफ एक प्रभावी गोरिल्ला युद्ध (छापेमार युद्ध) का नेतृत्व किया।
3. अमर सिंह के नेतृत्व में चलाए गए इस समानांतर प्रशासन और प्रतिरोध को कुचलने के लिए ब्रिटिश अधिकारी मेजर जनरल डगलस को नियुक्त किया गया था, जिन्होंने अंततः व्यापक सैन्य अभियानों के माध्यम से इस विद्रोह का दमन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के स्वरूप और प्रकृति को लेकर विभिन्न ब्रिटिश तथा भारतीय इतिहासकारों ने अपने-अपने दृष्टिकोण प्रस्तुत किए हैं। इस संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इतिहासकार सर जॉन सीले (Sir John Seeley) ने 1857 के विद्रोह को 'पूर्णतः देशभक्ति से रहित और स्वार्थी सैनिक विद्रोह' (A wholly unpatriotic and selfish mutiny) बताया था, जिसमें भारतीय जनता का कोई समर्थन नहीं था।
2. वी. डी. सावरकर ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'द इंडियन वॉर ऑफ इंडिपेंडेंस 1857' में इस घटना को सुनियोजित ढंग से लड़ा गया 'भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम' करार दिया था।
3. बीडी सावरकर के विपरीत, इतिहासकार डॉ. आर. सी. मजूमदार (Dr. R. C. Majumdar) का यह निष्कर्ष था कि 'तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो प्रथम, न ही राष्ट्रीय और न ही स्वतंत्रता संग्राम था।'
4. टी.आर. होम्स (T. R. Holmes) के अनुसार 1857 का यह विद्रोह 'सभ्यता और बर्बरता के बीच का संघर्ष' (A conflict between civilization and barbarism) था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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1857 के महान विद्रोह के दौरान बिहार के पटना और दानापुर क्षेत्र में हुई घटनाओं के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. पटना सिटी में 3 जुलाई 1857 को हुए विद्रोह का नेतृत्व एक प्रतिष्ठित पुस्तक विक्रेता पीर अली खान ने किया था, जिन्हें ब्रिटिश कमिश्नर विलियम टेलर के आदेश पर गिरफ्तार कर सार्वजनिक रूप से फाँसी पर लटका दिया गया था।
2. दानापुर छावनी (Danapur Cantonment) के 7वें, 8वें और 40वें रेजिमेंट के भारतीय सिपाहियों ने 25 जुलाई 1857 को विद्रोह कर दिया था और सोन नदी पार कर सीधे जगदीशपुर के जमींदार बाबू कुंवर सिंह की सेना में शामिल हो गए थे।
3. पटना के कमिश्नर विलियम टेलर ने विद्रोह की शुरुआत से पहले ही शहर के संभावित खतरे को भांपते हुए पटना के दो प्रमुख वहाबी नेताओं—मौलाना शाह मुहम्मद हुसैन और अहमदullah को गिरफ्तार कर लिया था, जिससे शहर में भारी तनाव फैल गया था।
4. दानापुर के विद्रोही सिपाहियों के जगदीशपुर पहुँचने से पूर्व ही ब्रिटिश सेनापति मेजर विंसेंट आयर ने दानापुर और आरा के मार्ग को पूरी तरह सुरक्षित कर लिया था और विद्रोही सैनिकों को पटना में ही घेरकर आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर दिया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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