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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता (Harappan Civilization) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. हड़प्पा सभ्यता की लिपि मुख्य रूप से चित्रात्मक (Pictographic) थी, जो दाईं से बाईं ओर (Boustrophedon शैली) लिखी जाती थी, और इस लिपि को अब तक पूरी तरह से पढ़ा (Decipher) जा चुका है।
- 2. लोथल में खोजा गया 'गोदीवाडा' (Dockyard) एक कृत्रिम ईंटों से बना विशाल ढांचा था, जो समुद्री व्यापार और जलपोतों के आवागमन के लिए उपयोग किया जाता था।
- 3. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'नर्तकी की कांस्य मूर्ति' (Dancing Girl) 'लुप्त मोम तकनीक' (Lost-wax casting process) का एक उत्कृष्ट उदाहरण है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है क्योंकि सिंधु घाटी सभ्यता की लिपि चित्रात्मक और भावचित्रात्मक है, जिसे प्रायः दाईं से बाईं ओर (ब्रोस्ट्रोफेडन शैली) लिखा जाता था, किंतु इस लिपि को आज तक पूरी तरह से पढ़ा नहीं जा सका है। कथन 2 सही है; गुजरात में स्थित लोथल एक प्रमुख बंदरगाह शहर था जहाँ पकी हुई ईंटों से निर्मित एक विशाल गोदीवाड़ा (डॉकयार्ड) के अवशेष मिले हैं जो मेसोपोटामिया और फारस के साथ समुद्री व्यापार का प्रमाण देते हैं। कथन 3 सही है; मोहनजोदड़ो से प्राप्त काँसे की नर्तकी की मूर्ति 'मधुच्छिद्म प्रक्रिया' या 'लुप्त मोम तकनीक' (Lost-wax casting) से बनाई गई थी। सिंधु घाटी सभ्यता के बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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मराठा साम्राज्य के प्रशासन, राजस्व व्यवस्था और अष्टप्रधान के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. शिवाजी की प्रशासनिक व्यवस्था में 'अष्टप्रधान' के अंतर्गत प्रत्येक मंत्री प्रशासनिक और सैन्य मामलों में सीधे राजा के प्रति उत्तरदायी होता था, किंतु ये पद वंशानुगत नहीं थे और आवश्यकता पड़ने पर अधिकांश मंत्रियों को सैन्य अभियानों का नेतृत्व भी करना पड़ता था।
2. 'चौथ' मराठा साम्राज्य के स्वराज्य (प्रत्यक्ष नियंत्रण वाले क्षेत्र) से वसूला जाने वाला मुख्य भू-राजस्व कर था, जबकि 'सरदेशमुखी' उस बाहरी क्षेत्र से वसूला जाता था जहाँ मराठों का प्रत्यक्ष नियंत्रण नहीं था बल्कि वे उसकी सुरक्षा का आश्वासन देते थे।
3. शिवाजी की राजस्व प्रणाली काफी हद तक मलिक अंबर की दक्कनी राजस्व व्यवस्था पर आधारित थी, जिसके तहत भूमि की पैमाइश करवाकर राज्य का हिस्सा कुल उपज का लगभग 40 प्रतिशत निर्धारित किया गया था।
4. शिवाजी की केंद्रीय मंत्रिपरिषद में 'पंडितराव' और 'न्यायाधीश' धार्मिक और न्यायिक मामलों के सर्वोच्च अधिकारी थे, और इन दोनों पदों को छोड़कर अन्य सभी छह मंत्रियों को अपने प्रशासनिक दायित्वों के साथ-साथ युद्ध के समय सेना का नेतृत्व करना अनिवार्य होता था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों और उनके संस्थापकों तथा संगठनों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. राजा राममोहन राय द्वारा 1815 में स्थापित 'आत्मीय सभा' का मुख्य उद्देश्य धार्मिक और सामाजिक कुप्रथाओं का विरोध करना था, जबकि 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने किसी भी धर्म के ग्रंथों को अचूक (Infallible) मानने से इंकार किया और सभी धर्मों की एकता पर बल दिया।
2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने 'वेदों की ओर लौटो' का नारा दिया, किंतु उन्होंने वेदों को अपौरुषेय और अचूक मानने के साथ-साथ मूर्तिपूजा, अवतारवाद और जन्म आधारित जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया।
3. केशव चंद्र सेन की प्रेरणा से 1867 में बंबई में स्थापित 'प्रार्थना समाज' ने अंतर्जातीय विवाह, विधवा पुनर्विवाह और स्त्री शिक्षा के प्रसार को बढ़ावा दिया, और इसके संस्थापकों में आत्माराम पांडुरंग तथा महादेव गोविंद रानाडे प्रमुख रूप से शामिल थे।
4. सत्यशोधक समाज की स्थापना ज्योतिराव फुले द्वारा 1873 में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ब्राह्मणवादी वर्चस्व को चुनौती देना, शूद्रों और अतिशूद्रों को उनके अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा धार्मिक पाखंडों से मुक्त समाज का निर्माण करना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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जहाँगीर के बाद मुगल सिंहासन पर कौन बैठा जिसे "खुर्रम" के नाम से जाना जाता था?
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गुप्त साम्राज्य एवं मौर्योत्तर काल के दौरान भारतीय अर्थव्यवस्था, व्यापारिक गतिविधियों और मुद्रा प्रणाली के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. मौर्योत्तर काल की तुलना में गुप्त काल में बड़े पैमाने पर सोने के सिक्के (दीनार) जारी किए गए, जो यह दर्शाते हैं कि इस काल में लंबी दूरी का अंतरराष्ट्रीय व्यापार अपनी चरम सीमा पर था और रोमन साम्राज्य के साथ व्यापारिक संतुलन भारत के पूरी तरह पक्ष में था।
2. गुप्तकालीन मुद्रा व्यवस्था में तांबे के सिक्कों की संख्या कुषाण और सातवाहन कालों की तुलना में अत्यंत सीमित मिलती है, जिससे यह अनुमान लगाया जाता है कि स्थानीय स्तर पर नकद मुद्रा का चलन कम हुआ और वस्तु-विनिमय (Barter system) या ग्रामीण स्वावलंबन की प्रवृत्ति को बढ़ावा मिला।
3. गुप्तोत्तर काल तक आते-आते भारत के विदेशी व्यापार में भारी गिरावट दर्ज की गई, विशेष रूप से छठी शताब्दी ईस्वी के मध्य तक बीजान्टिन साम्राज्य द्वारा रेशम उत्पादन की तकनीक (Sericulture) सीख लेने के बाद भारतीय रेशम की मांग में भारी कमी आ गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्धन राजवंश तथा दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) के कला, प्रशासन और राजनीतिक इतिहास के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. महाबलीपुरम के प्रसिद्ध रथ मंदिरों का निर्माण पल्लव शासक नरसिंहवर्मन प्रथम (महमल्ल) के शासनकाल में हुआ था, और ये सभी मंदिर एकात्म (Monolithic) चट्टानों को काटकर बनाए गए हैं।
2. बादामी के चालुक्य शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन को पराजित किया था, जिसकी जानकारी हमें कालिदास की प्रसिद्ध रचना 'हर्षचरित' से मिलती है।
3. चोल राजवंश की स्थानीय स्वशासन प्रणाली, विशेषकर उत्तरमेरूर अभिलेखों में वर्णित ग्राम सभाओं और चुनावों की कार्यप्रणाली, उनकी प्रशासनिक उत्कृष्टता का एक अनूठा उदाहरण थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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