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History of India
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान विभिन्न क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना द्वारा विद्रोह के दमन और नियुक्त सैन्य अधिकारियों/कमांडरों के संदर्भ में, निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:

  1. 1. दिल्ली - जॉन निकलसन और हडसन
  2. 2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और हेनरी लॉरेंस
  3. 3. झांसी और ग्वालियर - सर ह्यूरोज़
  4. 4.

बनारस और इलाहाबाद - कर्नल नील उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?

Detailed Explanation

वर्ष 1857 के विद्रोह के दमन में विभिन्न ब्रिटिश अधिकारियों ने अलग-अलग क्षेत्रों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। दिल्ली में विद्रोह का दमन जॉन निकलसन और हडसन ने किया था (यद्यपि हेनरी लॉरेंस लखनऊ के शुरुआती ब्रिटिश रेजिडेंट थे जिनकी मृत्यु घेराबंदी के दौरान हो गई थी, तथा लखनऊ का मुख्य दमन सर कॉलिन कैंपबेल, आउट्राम और हैवलॉक द्वारा किया गया था)। झाँसी और ग्वालियर में विद्रोह को दबाने का श्रेय सर ह्यूरोज़ को जाता है, जिन्होंने रानी लक्ष्मीबाई और तात्या टोपे का सामना किया था। बनारस और इलाहाबाद में क्रूरतापूर्वक विद्रोह का दमन कर्नल नील (James Neill) द्वारा किया गया था। विकिपीडिया संदर्भ
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19वीं शताब्दी के सामाजिक-धार्मिक सुधार आंदोलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. राजा राममोहन राय द्वारा स्थापित 'आत्मीय सभा' (1815) ने एकेश्वरवाद के प्रचार और मूर्तिपूजा के विरोध का समर्थन किया, तथा उनके द्वारा 1828 में स्थापित 'ब्रह्म समाज' ने किसी भी धर्मग्रंथ को अछूत या अचूक (Infallible) मानने से इंकार किया। 2. स्वामी दयानंद सरस्वती द्वारा 1875 में स्थापित 'आर्य समाज' ने वेदों की अपौरुषेयता में अटूट विश्वास व्यक्त किया और 'वेदों की ओर लौटो' का नारा देते हुए मूर्तिपूजा, बहुदेववाद तथा जन्मना जाति व्यवस्था का पुरजोर खंडन किया। 3. केशव चंद्र सेन के नेतृत्व में ब्रह्म समाज के प्रथम विभाजन के पश्चात, देवेंद्रनाथ टैगोर ने 'साधारण ब्रह्म समाज' की स्थापना की, जो आगे चलकर अधिक कट्टरपंथी और लोकतांत्रिक सुधारों का समर्थक बन गया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वैदिक सभ्यता और वैदिक साहित्य के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ऋग्वैदिक काल में 'दुहितृ' (जिसका शाब्दिक अर्थ गायहंता या वह है जो दूधोती है) शब्द का प्रयोग पुत्री के लिए किया जाता था, तथा इस समाज में सभा और समिति नामक संस्थाओं में महिलाओं की सक्रिय भागीदारी थी, जहाँ वे वाद-विवाद में हिस्सा ले सकती थीं। 2. उत्तर वैदिक काल में वर्ण व्यवस्था जन्म पर आधारित होने लगी और सभा तथा समिति का प्रभाव कम होने लगा, किंतु इस काल में 'गोत्र' प्रथा का उदय हुआ, जिसका मूल अर्थ वह स्थान था जहाँ संपूर्ण कुल का गोधन (गोशाला) पाला जाता था। 3. शतपथ ब्राह्मण में कृषि की विभिन्न प्रक्रियाओं (जैसे जुताई, बुай, कटाई और मड़ाई) का विस्तृत वर्णन मिलता है, तथा इस ग्रंथ में विदेह माधव की कथा वर्णित है, जो गंडक (सदानिरा) नदी तक आर्य संस्कृति के विस्तार का प्रमाण देती है। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और तदुपरांत आरंभ हुए स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को भारत के तत्कालीन वायसराय लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, जबकि इसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में आयोजित ऐतिहासिक बैठक में स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक घोषणा करते हुए बहिष्कार प्रस्ताव पारित किया गया था। 2. लार्ड कर्जन द्वारा बंगाल विभाजन का मुख्य आधार केवल प्रशासनिक असुविधा और बड़े प्रांत का कुशल संचालन बताया गया था, परंतु गुप्त शासकीय दस्तावेजों और समकालीन राष्ट्रवादी विश्लेषणों से यह स्पष्ट हो गया कि इसका वास्तविक राजनीतिक उद्देश्य उभरते हुए बंगाली राष्ट्रवाद की ताकत को खंडित करना और 'फूट डालो और राज करो' की नीति के तहत सांप्रदायिक विभाजन पैदा करना था। 3. बंगाल विभाजन के प्रभावी होने की तिथि (16 अक्टूबर 1905) को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया, जहाँ लोगों ने उपवास रखा, नंगे पाँव जुलूस निकाले और रबीन्द्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर एक-दूसरे की कलाई पर 'राखी बांधी' ताकि हिंदू और मुस्लिम एकता का सुदृढ़ प्रदर्शन किया जा सके। 4. स्वदेशी आंदोलन के दौरान बंगाल के राष्ट्रीय शिक्षा परिषद (National Council of Education) की स्थापना 15 अगस्त 1906 को की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य ब्रिटिश शिक्षा प्रणाली का बहिष्कार कर साहित्यिक, वैज्ञानिक और तकनीकी शिक्षा के लिए राष्ट्रीय स्तर पर शिक्षण संस्थानों का विकास करना था, और इसके प्रथम अध्यक्ष अरबिंदो घोष बनाए गए थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 1857 के महान विद्रोह की असफलता और उसके नेतृत्व की कमियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस विद्रोह का नेतृत्व करने वाले अधिकांश पारंपरिक शासक (जैसे नाना साहब, बेगम हजरत महल और कुंवर सिंह) अपने-अपने क्षेत्रीय हितों और रियायतों की पुनर्प्राप्ति तक ही सीमित थे, तथा उनके पास संपूर्ण भारत के लिए कोई स्पष्ट राजनीतिक दृष्टिकोण, भविष्य का वैकल्पिक आर्थिक ढांचा या आधुनिक राष्ट्र-राज्य का खाका नहीं था। 2. विद्रोहियों के पास आधुनिक हथियारों, सैन्य अनुशासन और केंद्रीकृत कमान (Centralized Command) का भारी अभाव था, जबकि ब्रिटिश सेना के पास आधुनिक संचार साधनों (टेलीग्राफ और रेलवे) तथा अनुभवी सेनापतियों का सुदृढ़ नेटवर्क था। 3. भारत के अधिकांश शिक्षित मध्यम वर्ग, व्यापारियों और बड़े जमींदारों ने आधुनिक सुधारों की आस और अपनी संपत्ति की सुरक्षा के कारण इस विद्रोह का सक्रिय समर्थन किया और इसे पूरे देश में फैलाने में ब्रिटिश शासन की मदद की। 4. दिल्ली पर कब्जा करने के बाद मुगल सम्राट बहादुर शाह जफर को विद्रोहियों द्वारा औपचारिक प्रतीक के रूप में सम्राट घोषित तो कर दिया गया था, किंतु विभिन्न क्षेत्रों के नेतृत्वकर्ताओं के बीच आपसी समन्वय और सैन्य रणनीतिक एकता का पूर्ण अभाव था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? मुगल काल में "अमल गुजार" नामक अधिकारी का मुख्य कार्य क्या था?
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