BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
1 views

सिंधु घाटी सभ्यता की परिपक्व अवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित पुराश स्थलों और उनकी विशिष्ट विशेषताओं पर विचार कीजिए:

  1. 1. धौलाविरा (गुजरात): यह शहर तीन भागों (दुर्ग, मध्यम नगर और निचला नगर) में विभाजित था तथा यहाँ से एक अत्यंत विशिष्ट 'जल प्रबंधन प्रणाली' (जैसे बड़े जलाशय और पत्थर से बने जलकुंड) और एक बड़ा शिलालेख मिला है जिसमें हड़प्पा लिपि के बड़े आकार के चिन्ह उकेरे गए हैं।
  2. 2. चान्हूदोड़ो (सिंध, पाकिस्तान): यह एकमात्र ऐसा हड़प्पा स्थल है जहाँ कोई दुर्ग (Citadel) नहीं था, और यह स्थल मनके बनाने के कारखाने (Bead-making factory), ताँबे की मुद्राएँ और वक्राकार ईंटों के साक्ष्य के लिए विशेष रूप से प्रसिद्ध है।
  3. 3. लोथल (गुजरात): यहाँ से कृत्रिम गोदीबाड़ा (Dockyard) के साक्ष्य मिले हैं जो यह प्रमाणित करते हैं कि यह सिंधु सभ्यता का एक प्रमुख बंदरगाह और व्यापारिक केंद्र था, जहाँ से चावल और बाजरा के अवशेष तथा फारसी मोहरें भी प्राप्त हुई हैं।
  4. 4. कालीबंगा (राजस्थान): यहाँ से जूते हुए खेत (Ploughed field) के साक्ष्य, प्राक्-हड़प्पा और परिपक्व हड़प्पा दोनों स्तरों के अवशेष तथा अग्नि वेदियों (Fire altars) की पंक्तियाँ मिली हैं, जो धार्मिक अनुष्ठानों या यज्ञीय परंपराओं की ओर संकेत करती हैं।

उपर्युक्त में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

सिंधु घाटी सभ्यता (Indus Valley Civilisation) के ये सभी पुरातात्विक स्थल अपनी विशिष्ट नगर योजना, वास्तुकला और आर्थिक गतिविधियों के लिए जाने जाते हैं। धौलाविरा में सामान्यतः दो भागों (दुर्ग और निचला नगर) में बंटी बस्तियों के विपरीत तीन भागों में विभाजन और अद्वितीय जल संचयन प्रणाली पाई गई। चान्हूदोड़ो एक औद्योगिक नगर था जहाँ दुर्ग का अभाव था और वहाँ मनके बनाने के कारखाने व वक्राकार ईंटें मिलीं। लोथल का गोदीबाड़ा (डॉकयार्ड) समुद्री व्यापार का प्रमुख प्रमाण है। कालीबंगा में जूते हुए खेत और अग्नivedिकाएं मिली हैं। विस्तृत जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
Share:

Related Questions

वर्ष 1857 के महान विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए भारत सरकार अधिनियम 1858 और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (1 नवंबर 1858) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के तहत भारत के नियंत्रण के लिए ब्रिटिश मंत्रिमंडल में 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) के नए पद का सृजन किया गया, जिसे सहायता प्रदान करने के लिए 15 सदस्यीय 'भारत परिषद' (Council of India) का गठन किया गया, जिसके आधे सदस्यों की नियुक्ति ब्रिटिश संसद द्वारा और आधे सदस्यों की नियुक्ति क्राउन द्वारा की जाती थी। 2. इलाहाबाद में आयोजित दरबार में लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ी गई क्वीन विक्टोरिया की घोषणा में यह आश्वासन दिया गया कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियासतों के साथ पूर्व में की गई संधियों और अनुबंधों का सम्मान करेगी और भविष्य में किसी भी भारतीय राज्य का विलय नहीं किया जाएगा। 3. घोषणा में यह भी स्पष्ट किया गया कि धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा तथा नस्ल, जन्म या धर्म के भेदभाव के बिना सभी भारतीयों को उनकी योग्यता के आधार पर उच्च सरकारी सेवाओं में नियुक्त किया जाएगा। 4. विद्रोह के बाद सेना का पुनर्गठन करते हुए ब्रिटिश सरकार ने बंगाल प्रेसिडेंसी में यूरोपीय और भारतीय सैनिकों का अनुपात 1:2 कर दिया, जबकि मद्रास और बॉम्बे प्रेसिडेंसी में यह अनुपात 1:3 रखा गया, ताकि भविष्य में इस प्रकार के सैन्य विद्रोहों को रोका जा सके। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? तैमूर लंग के आक्रमण के बाद दिल्ली सल्तनत की स्थिति कैसी हो गई थी? दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक इतिहास और विभिन्न राजवंशों (गुलाम, खिलजी, तुगलक, सैयद और लोदी) के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार भूमि की वास्तविक पैमाइश (विश्वा) के आधार पर भू-राजस्व निर्धारित किया और 'दीवान-ए-मुस्तखराज' नामक नए विभाग की स्थापना की, जिसका मुख्य कार्य बकाया लगान और भ्रष्टाचार की जाँच करना था। 2. गयासुद्दीन तुगलक ने कृषि को प्रोत्साहन देने के लिए 'तकावी' (कृषि ऋण) वितरण को पूरी तरह से बंद कर दिया, जबकि उसके उत्तराधिकारी मुहम्मद बिन तुगलक ने दवाब क्षेत्र में कर वृद्धि के साथ-साथ 'दीवान-ए-कोही' नामक एक नया कृषि विभाग स्थापित किया। 3. फिरोजशाह तुगलक ने पूर्ववर्ती शासकों द्वारा वसूल किए जाने वाले 24 कष्टदायक करों को समाप्त कर दिया और केवल शरीयत द्वारा स्वीकृत चार करों—खराज, जकात, जिजिया और खुम्स—को ही वैध रखा, साथ ही उसने ब्राह्मणों पर भी जिजिया कर आरोपित किया। 4. लोदी वंश के संस्थापक बहलोल लोदी ने अफगान सरदारों की तुष्टीकरण और संतुष्टि के लिए 'मस्नद-ए-आली' की प्रथा को बढ़ावा दिया, जबकि सिकंदर लोदी ने 'गज-ए-सिकंदरी' का प्रचलन शुरू किया जो भूमि की पैमाइश के लिए 39 इंच का एक प्रमाणिक गज था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? महात्मा गांधी के भारत के शुरुआती सत्याग्रहों—चंपारण (1917) और खेड़ा (1918)—के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. चंपारण सत्याग्रह के दौरान यूरोपीय बागान मालिकों द्वारा किसानों पर 'तीनकथा पद्धति' थोपी गई थी, जिसके अंतर्गत किसानों को अपनी कुल भूमि के 3/20वें हिस्से पर नील की खेती करना अनिवार्य था। 2. खेड़ा सत्याग्रह में गांधीजी ने किसानों को फसल खराब होने के बावजूद लगान चुकाने का निर्देश दिया था, क्योंकि उनका मानना था कि ब्रिटिश सरकार के साथ सहयोग करना उस समय का सर्वोच्च कर्तव्य था। 3. चंपारण सत्याग्रह के सिलसिले में ही गांधीजी को पहली बार भारत में जन-आंदोलन का व्यावहारिक अनुभव मिला, और इसी दौरान रविराज शुक्ल के आग्रह पर उन्होंने चंपारण की यात्रा की थी। 4. खेड़ा सत्याग्रह में गांधीजी के प्रमुख सहयोगियों के रूप में वल्लभभाई पटेल और इंदुलाल याज्ञिक ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी, जिसके परिणामस्वरूप सरकार ने केवल उन्हीं किसानों से राजस्व वसूलने का निर्देश दिया जो भुगतान करने में सक्षम थे। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? भारतीय क्रांतिकारी आंदोलन और प्रमुख संगठनों के विकास के संदर्भ में, गदर पार्टी और हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन (HSRA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. वर्ष 1913 में अमेरिका के सैन फ्रांसिस्को शहर में लाला हरदयाल और सोहन सिंह भाखना द्वारा 'पैसिफिक कोस्ट एसोसिएशन ऑफ अमेरिका' की स्थापना की गई थी, जिसे इसके मुखपत्र 'गदर' के नाम पर 'गदर पार्टी' के रूप में प्रसिद्धि मिली। 2. गदर पार्टी के सदस्यों ने प्रथम विश्व युद्ध के दौरान ब्रिटिश सेना में कार्यरत भारतीय सैनिकों के बीच विद्रोह भड़काने और देश के भीतर सशस्त्र क्रांति (गदर) लाने के उद्देश्य से 'जुगांतर आश्रम' को अपना मुख्य केंद्र बनाया था। 3. वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में चंद्रशेखर आजाद के नेतृत्व में 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) का पुनर्गठन किया गया और इसका नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य मार्क्सवादी विचारों से प्रेरित होकर समाजवाद की स्थापना करना था। 4. भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने ट्रेड डिस्प्यूट बिल और पब्लिक सेफ्टी बिल के विरोध में 8 अप्रैल 1929 को केंद्रीय विधान सभा में बम फेंका था, और इस घटना के पश्चात वे मौके से फरार हो गए तथा भूमिगत होकर लंबे समय तक क्रांतिकारी गतिविधियों का संचालन किया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.