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History of India
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनकी ऐतिहासिक पृष्ठभूमि के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. बौद्ध धर्म के 'प्रतीतसमुत्पाद' (प्रतीत्यसमुत्पाद) का सिद्धांत इस मान्यता पर आधारित है कि प्रत्येक घटना या वस्तु किसी कारण और प्रत्यय से उत्पन्न होती है, जबकि जैन धर्म का 'स्याद्वाद' या 'सप्तभंगीनय' यह प्रतिपादित करता है कि ज्ञान सापेक्ष होता है और किसी भी वस्तु के बारे में एक साथ पूर्ण सत्य नहीं कहा जा सकता।
- 2. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए महावीर स्वामी ने 'त्रिरत्न' (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र) के अतिरिक्त अत्यंत कठोर कायाकल्पन और संलेखना (संथारा) पर बल दिया, जबकि महात्मा बुद्ध ने मध्यम मार्ग (मज्झिम पतिपदा) का उपदेश देते हुए घोर तपस्या और भोग-विलासिता दोनों का समान रूप से त्याग करने पर जोर दिया।
- 3. बौद्ध संघ की प्रथम संगीति का आयोजन राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में महाकस्सप की अध्यक्षता में हुआ था, जिसमें बुद्ध के उपदेशों को 'सुत्तपिटक' और 'विनयपिटक' के रूप में संकलित किया गया, जबकि जैन धर्म की प्रथम संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई जिसमें बारह अंगों का संकलन किया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
उपर्युक्त तीनों कथन पूर्णतः सत्य हैं। बौद्ध धर्म का 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (कारण-कार्य का नियम) और जैन धर्म का 'स्याद्वाद' (सापेक्षता का सिद्धांत) दोनों ही भारतीय दर्शन के अत्यंत महत्वपूर्ण और तार्किक सिद्धांत हैं। जैन धर्म के अनुसार ज्ञान की सापेक्षता को 'स्याद्वाद' या 'सप्तभंगीनय' के माध्यम से समझा जाता है, जिसके बारे में अधिक जानकारी के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं। इसी प्रकार, बौद्ध धर्म में मध्यम मार्ग को सर्वोच्च माना गया और जैन धर्म में संलेखना तथा त्रिरत्न को मोक्ष का साधन बताया गया है। प्रथम बौद्ध संगीति 483 ईसा पूर्व में राजगृह में और प्रथम जैन संगीति पाटलिपुत्र में आयोजित की गई थी।
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस तथा उनकी आजाद हिंद फौज (INA) के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान देश के कई हिस्सों में समानांतर सरकारों की स्थापना हुई थी, जिनमें बलिया में चित्तू पाण्डे के नेतृत्व में, तामलुक (मिदनापुर) में 'जातीय सरकार' और सतारा में 'प्रति सरकार' (यशवंतराव चव्हाण व नाना पाटिल के नेतृत्व में) सबसे लंबे समय तक चलने वाली समानांतर सरकारें थीं।
2. जब 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे के गोवालिया टैंक मैदान में भारत छोड़ो प्रस्ताव पारित हुआ, तब सुभाष चंद्र बोस भारत में ही कांग्रेस के एक प्रमुख वामपंथी नेता के रूप में उपस्थित थे और उन्होंने इस आंदोलन के पहले दिन ही महात्मा गांधी के साथ गिरफ्तार होकर आगा खान पैलेस में नजरबंदी स्वीकार की थी।
3. सुभाष चंद्र बोस ने जनवरी 1941 में ब्रिटिश खुफिया तंत्र को चकमा देकर 'ग्रेट एस्केप' (Great Escape) किया और अफगानिस्तान तथा सोवियत संघ के रास्ते जर्मनी पहुँचे, जहाँ उन्होंने बर्लिन रेडियो से भारतीय स्वतंत्रता के पक्ष में प्रसारण किया और 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की।
4. सिंगापुर में रास बिहारी बोस द्वारा स्थापित 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और भारतीय राष्ट्रीय सेना (INA) की कमान जब अक्टूबर 1943 में सुभाष चंद्र बोस को सौंपी गई, तो उन्होंने सिंगापुर में ही 'आर्गा सरकार' (Azad Hind Government) यानी स्वतंत्र भारत की अनंतिम सरकार की स्थापना की और 'चलो दिल्ली' तथा 'जय हिन्द' का नारा दिया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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जहाँदार शाह के शासनकाल में लाल कुँवर नामक वेश्या का अत्यधिक प्रभाव था, उसने किस व्यवस्था को बढ़ावा दिया?
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शिवाजी महाराज ने औरंगजेब के खिलाफ कौन सी नीति अपनाई?
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मुगलकालीन वास्तुकला और उसके विशिष्ट लक्षणों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. हुमायूं का मकबरा भारत में पहली बार चारबाग शैली का पूर्ण प्रयोग और सफेद संगमरमर से निर्मित विशाल दोहरे गुंबद (Double Dome) वाला पहला मकबरा था, जिसका निर्माण उसकी विधवा हाजी बेगम की देखरेख में फारसी वास्तुकार मिर्जा गियास द्वारा किया गया था।
2. शाहजहां के शासनकाल को मुगल वास्तुकला का 'स्वर्णकाल' कहा जाता है, जिसके दौरान लाल बलुआ पत्थर के स्थान पर शुद्ध सफेद संगमरमर का अत्यधिक प्रयोग शुरू हुआ, तथा वास्तुकला में 'पित्रा दूरा' (Pietra Dura - संगमरमर पर मूल्यवान रत्नों की जड़ाई कला) का उत्कृष्ट प्रदर्शन ताजमहल और आगरा के दीवान-ए-आम में देखने को मिलता है।
3. जहांगीर के काल में वास्तुकला में मकबरों के निर्माण से अधिक सुंदर उद्यानों और कलात्मक अलंकरणों को प्राथमिकता मिली, जिसका सबसे सुंदर उदाहरण लाहौर का शालीमार बाग और नूरजहां द्वारा अपने पिता इत्माद-उद-दौला का संगमरमर से निर्मित मकबरा है, जो पूरी तरह पित्रा दूरा शैली से सुसज्जित है।
4. औरंगजेब के शासनकाल में विलासितापूर्ण वास्तुकला को राजकीय प्रोत्साहन मिलना बंद हो गया, किंतु उसकी अपनी पत्नी राबिया-उद-दौरानी (दिलरस बानो बेगम) की स्मृति में औरंगाबाद में निर्मित 'बीबी का मकबरा' (जिसे 'दक्खिन का ताज' भी कहा जाता है) ताजमहल की नकल के रूप में संगमरमर और प्लास्टर दोनों के मिश्रण से बनवाया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान ब्रिटिश अधिकारियों द्वारा विभिन्न क्षेत्रों में विद्रोह को दबाने के सैन्य अभियानों के संदर्भ में निम्नलिखित युग्मों पर विचार कीजिए:
1. दिल्ली - जॉन निकलसन और हडसन
2. लखनऊ - सर कॉलिन कैंपबेल और हेनरी लॉरेंस
3. कानपुर - सर कॉलिन कैंपबेल
4. झांसी और ग्वालियर - जनरल ह्यूरोज
उपर्युक्त युग्मों में से कौन-से युग्म सही सुमेलित हैं?
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