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History of India
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सिंधु घाटी सभ्यता की नगर योजना, वास्तुकला और सामाजिक-आर्थिक विशिष्टताओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. सिंधु सभ्यता के अधिकांश नगरों (अपवादस्वरूप धौलाविरा और लोथल को छोड़कर) में पारंपरिक रूप से नगर को दो भागों में विभाजित किया गया था—पश्चिमी भाग जो ऊंचे चबूतरे पर स्थित 'दुर्ग' (Citadel) कहलाता था और पूर्वी भाग जो 'निचला नगर' (Lower Town) था, जहाँ सामान्य जनता निवास करती थी।
  2. 2. मोहनजोदड़ो से प्राप्त 'विशाल स्नानागार' (Great Bath) इस सभ्यता की ईंट-चिनाई का एक उत्कृष्ट उदाहरण है, जिसके तल को जल-रोधी (Water-tight) बनाने के लिए ईंटों के बीच बिटुमिन (तारकोल) की परत का उपयोग किया गया था और इसके उत्तर व दक्षिण में सीढ़ियां बनी हुई थीं।
  3. 3. सिंधु घाटी सभ्यता के मोहरों (Seals) पर सर्वाधिक संख्या में 'एकसिंगी पशु' (Unicorn) का अंकन मिलता है, इसके अतिरिक्त कुबड़ वाले सांड, बाघ, हाथी और गैंडे के चित्र भी प्रचुर मात्रा में उत्कीर्ण हैं, किंतु घोड़े के स्पष्ट और नियमित साक्ष्य इस सभ्यता के परिपक्व स्तर पर बहुतायत में मिलते हैं।
  4. 4. सुरकोटाड़ा नामक स्थल से घोड़े की अस्थियों के अवशेष प्राप्त हुए हैं, तथा यहाँ से एक अनोखी 'अंडाकार कब्र' (Oval Grave) और तराशे गए पत्थरों से निर्मित दीवार से घिरी हुई बस्ती के साक्ष्य भी मिले हैं जो इसके रक्षात्मक महत्व को दर्शाते हैं।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: अधिकांश हड़प्पा कालीन नगर दो भागों में बंटे थे (पश्चिमी दुर्ग और पूर्वी निचला नगर), हालांकि धौलाविरा तीन भागों (दुर्ग, मध्यम नगर और निचला नगर) में विभाजित था। कथन 2 सही है: मोहनजोदड़ो का विशाल स्नानागार पकी ईंटों के प्रयोग और जल-रोधी बिटुमिन के लेप के कारण जल संचयन और अनुष्ठानिक स्नान का एक अद्भुत नमूना है। कथन 3 गलत है क्योंकि सिंधु सभ्यता के परिपक्व स्तर पर घोड़े के नियमित या व्यापक उपयोग के साक्ष्य नहीं मिलते हैं; हालांकि सुरकोटाड़ा और कुछ अन्य स्थलों से घोड़े की हड्डियों के छिटपुट अवशेष जरूर मिले हैं, लेकिन यह सभ्यता मूलतः अश्व-केंद्रित नहीं थी। कथन 4 सही है: गुजरात के कच्छ जिले में स्थित सुरकोटाड़ा से घोड़े की हड्डियों के अवशेष तथा पत्थर की दीवार से घिरी अंडाकार कब्रें और दुर्गीकृत बस्तियों के साक्ष्य मिले हैं। विकिपीडिया संदर्भ
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