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History of India
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मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक और सैन्य इतिहास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. शिवाजी के अष्टप्रधान में 'अमात्य' (या मजुमदार) राज्य की आय और व्यय का लेखा-जोखा रखने वाला प्रमुख वित्तीय अधिकारी था, जबकि 'पंडितराव' दान, धार्मिक मामलों और आचार-व्यवहार के निरीक्षण का कार्य संभालता था।
  2. 2. शिवाजी द्वारा कर प्रणाली को सुदृढ़ करने के लिए मलिक अंबर की भू-राजस्व व्यवस्था को आधार बनाया गया, जिसके तहत शुरुआती दौर में उपज का 33 प्रतिशत राज्य को मिलता था, जिसे बाद में बढ़ाकर 40 प्रतिशत कर दिया गया था।
  3. 3. 'चौथ' और 'सरदेशमुखी' मराठों द्वारा वसूले जाने वाले प्रमुख कर थे, जिनमें 'चौथ' मराठा आक्रमण से सुरक्षा के एवज में पड़ोसी क्षेत्रों की आय का 25 प्रतिशत हिस्सा था, जबकि 'सरदेशमुखी' शिवाजी द्वारा अपने आपको पूरे महाराष्ट्र का सर्वोच्च देशमुखी (सरदेशमुख) दावा करते हुए अतिरिक्त 10 प्रतिशत वसूला जाने वाला कर था।
  4. 4. शिवाजी की घुड़सवार सेना में 'बर्गीर' वे सैनिक थे जिन्हें राज्य द्वारा घोड़े और शस्त्र प्रदान किए जाते थे, जबकि 'सिलहदार' वे सैनिक होते थे जो अपने स्वयं के घोड़े और हथियार लेकर युद्ध में भाग लेते थे।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

दिए गए सभी कथन छत्रपति शिवाजी महाराज और मराठा साम्राज्य के प्रशासनिक, राजस्व तथा सैन्य संगठन के संदर्भ में पूर्णतः सत्य हैं। शिवाजी ने अपनी शासन व्यवस्था को सुचारू रूप से चलाने के लिए मंत्रियों की एक परिषद 'अष्टप्रधान' का गठन किया था, जिसमें अमात्य (मजुमदार) वित्त मंत्री और पंडितराव धार्मिक मामलों के प्रमुख थे। उन्होंने मलिक अंबर की रयतवाड़ी व्यवस्था को अपनाते हुए कृषि कर निर्धारित किया था। मराठों द्वारा पड़ोसी राज्यों से लिए जाने वाला 'चौथ' 25% और 'सरदेशमुखी' 10% कर था। इसके अतिरिक्त, उनकी घुड़सवार सेना 'बर्गीर' और 'सिलहदार' दो प्रमुख श्रेणियों में विभाजित थी। विस्तृत अध्ययन के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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