BaalVikas
Menu

त्वरित लिंक्स

History of India
19 views

गुप्तकालीन अर्थव्यवस्था, भूमि अनुदान व्यवस्था और प्रशासनिक शब्दावली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. गुप्त काल में 'निवी-धर्म' (Nivi-dharma) एक ऐसी भूमि व्यवस्था थी जिसके अंतर्गत भूमि के क्रय-विक्रय या दान पर पूर्ण प्रतिबंध था और यह केवल राजा की अनुमति से ही वंशानुगत रूप से हस्तांतरित हो सकती थी, जबकि 'अप्रद' वह भूमि थी जिस पर किसी भी प्रकार का कर नहीं लगाया जाता था।
  2. 2. गुप्त अभिलेखों में वर्णित 'हल्यावह' शब्द का तात्पर्य उस भूमि से था जो एक जोड़े बैलों द्वारा एक दिन में जोती जा सकती थी, और इस काल में भूमि की पैमाइश के लिए 'निवर्तन' और 'द्रोणवाप' जैसी माप इकाइयों का बड़े पैमाने पर प्रयोग किया जाता था।
  3. 3. गुप्तोत्तर और गुप्त काल की राजस्व व्यवस्था में 'हिरण्य' एक ऐसा कर था जो नकद रूप में वसूला जाता था, जबकि 'विष्टि' एक प्रकार का बलात् श्रम (बेगार) था जो किसानों और कामगारों से बिना पारिश्रमिक दिए राज्य या स्थानीय अधिकारियों द्वारा करवाया जाता था।
  4. 4. फाह्यान के विवरण के अनुसार, इस काल में बौद्ध और ब्राह्मण मंदिरों को दिए जाने वाले अग्रहार अनुदानों (Agrahara grants) के कारण करों का बोझ वैश्य और शूद्र कृषकों पर कम हो गया था, क्योंकि राजा ने पूरी तरह से कृषि करों को माफ कर दिया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

गुप्त काल (Gupta Empire) भारतीय इतिहास का 'स्वर्ण युग' कहलाता है, जिसमें प्रशासनिक और आर्थिक संरचना में महत्वपूर्ण परिवर्तन आए। कथन 1 सही है; 'निवी-धर्म' स्थायी बंदोबस्त या ऐसी भूमि व्यवस्था को इंगित करता है जहाँ भूमि से जुड़े अधिकार सुरक्षित रहते थे और राजा की अनुमति के बिना उसका मनमाना हस्तांतरण वर्जित था। 'अप्रद' ऐसी भूमि थी जिस पर कर नहीं लगता था। कथन 2 सही है; गुप्त अभिलेखों में भूमि माप के लिए 'निवर्तन', 'कुलवाप' और 'द्रोणवाप' जैसे शब्दों का प्रयोग मिलता है तथा 'हल्यावह' जुताई की क्षमता से संबंधित इकाई थी। कथन 3 सही है; 'हिरण्य' नकद कर (Cash tax) था और 'विष्टि' अनिवार्य बेगार (forced labor) थी, जिसका उल्लेख कई गुप्तकालीन अभिलेखों में मिलता है। कथन 4 गलत है क्योंकि फाह्यान के अनुसार यद्यपि अर्थव्यवस्था समृद्ध थी, किंतु अग्रहार अनुदानों और सामंती प्रवृत्तियों के कारण कृषकों पर करों का बोझ कम नहीं हुआ था, बल्कि कई मामलों में उनकी स्थिति उपेक्षित हो गई थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देखें।
Share:

Related Questions

→ विजयनगर साम्राज्य में "गणिकाओं" (Courtesans) पर लगने वाले कर का उपयोग किस कार्य के लिए किया जाता था? → सविनय अवज्ञा आंदोलन, गांधी-इरविन समझौते (1931) और गोलमेज सम्मेलनों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. गांधी-इरविन समझौते के तहत सरकार द्वारा उन सभी राजनीतिक कैदियों को तुरंत रिहा करने पर सहमति व्यक्त की गई थी जिन पर हिंसा का प्रत्यक्ष आरोप था, तथा कराची अधिवेशन में कांग्रेस ने इस समझौते का पूर्ण समर्थन किया था। 2. इस समझौते के प्रावधानों के अंतर्गत कांग्रेस ने प्रथम गोलमेज सम्मेलन का बहिष्कार किया था, किंतु द्वितीय गोलमेज सम्मेलन में महात्मा गांधी ने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के एकमात्र आधिकारिक प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था। 3. समझौते के दौरान गांधी जी ने पुलिस की ज्यादतियों और दमनकारी नीतियों की निष्पक्ष न्यायिक जांच की अपनी मांग पर अत्यधिक जोर दिया था, जिसे वायसराय लॉर्ड इरविन ने बिना किसी शर्त के पूरी तरह स्वीकार कर लिया था। 4. सविनय अवज्ञा आंदोलन के दूसरे चरण के दौरान (दांडी मार्च के पश्चात) भारत के तटीय क्षेत्रों में लोगों को अपने उपभोग के लिए नमक बनाने और एकत्र करने का कानूनी अधिकार मिल गया था, जिसे इरविन ने समझौते में मान्यता दी थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → 1857 के विद्रोह के पश्चात ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और 'क्वीन विक्टोरिया की घोषणा' (मैग्नाकार्टा) के प्रावधानों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. इस अधिनियम के तहत भारत के प्रशासन का नियंत्रण ईस्ट इंडिया कंपनी से छीनकर सीधे ब्रिटिश ब्रिटिश क्राउन के हाथों में सौंप दिया गया, तथा 'बोर्ड ऑफ कंट्रोल' और 'कोर्ट ऑफ डायरेक्टर' को समाप्त कर उनके समस्त अधिकार 'भारत के राज्य सचिव' (Secretary of State for India) और उसकी सहायता के लिए गठित 15 सदस्यीय भारतीय परिषद को दे दिए गए। 2. गवर्नर-जनरल का पद समाप्त कर दिया गया और ब्रिटिश भारत के सभी क्षेत्रों के प्रत्यक्ष प्रशासन के लिए 'वाइउसराय' (Viceroy) पद का सृजन किया गया, जो सीधे ब्रिटिश संसद के प्रति उत्तरदायी था और लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले गवर्नर-जनरल एवं अंतिम वाइउसराय बने। 3. क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा (जिसे इलाहाबाद दरबार में 1 नवंबर 1858 को लॉर्ड कैनिंग द्वारा पढ़ा गया था) के माध्यम से भारतीय रियासतों को यह आश्वासन दिया गया कि भविष्य में ब्रिटिश साम्राज्य का विस्तार नहीं किया जाएगा, तथा भारतीय राजाओं की दत्तक पुत्र लेने की प्रथा (Adoptive rights) को मान्यता दे दी गई। 4. इस घोषणा में ब्रिटिश सरकार ने भारतीय प्रजा के धार्मिक मामलों में अहस्तक्षेप करने, नस्लीय भेदभाव को समाप्त कर योग्यता के आधार पर बिना किसी भेदभाव के सरकारी सेवाओं में भारतीयों को नियुक्त करने तथा प्राचीन भारतीय सामाजिक एवं धार्मिक परंपराओं का पूर्ण सम्मान करने का वचन दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? → वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान लखनऊ और अवध क्षेत्र में बेगम हजरत महल और मौलवी अहमदुल्लाह शाह की क्रांतिकारी गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. बेगम हजरत महल ने अपने अल्पवयस्क पुत्र बिरजिस कादिर को अवध का नवाब घोषित कर लखनऊ की रेजिडेंसी के विरुद्ध विद्रोह का प्रभावी नेतृत्व किया और ब्रिटिश सेना के समक्ष कभी आत्मसमर्पण न करते हुए नेपाल की तराई में पलायन किया। 2. 'डंका शाह' के नाम से प्रसिद्ध मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने चिनहट के युद्ध में हेनरी लॉरेंस के नेतृत्व वाली ब्रिटिश सेना को पराजित किया था, जिसके कारण ब्रिटिश प्रशासन ने उनकी गिरफ्तारी पर पचास हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। 3. मौलवी अहमदुल्लाह शाह को अंततः अवध के ही पुवायाँ नामक स्थान पर ब्रिटिश सेना द्वारा घेर लिया गया, जहाँ वे भीषण संघर्ष के दौरान वीरगति को प्राप्त हुए और उनके इस पराक्रम में पुवायाँ के राजा ने अंग्रेजों की पूरी सहायता की थी। उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं? → मुगल प्रशासन में "मुश़रिफ" का मुख्य कार्य क्या था?
Log in to add to quiz, bookmark, or report issues.