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History of India
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भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस की स्थापना के प्रारंभिक दौर (1885-1905) और इसके वैचारिक परिदृश्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. कांग्रेस के प्रथम अधिवेशन में कलकत्ता के प्रसिद्ध बैरिस्टर व्योमेश चंद्र बनर्जी (डब्ल्यू. सी. बनर्जी) ने अध्यक्षता की थी, और इस अधिवेशन में कुल 72 प्रतिनिधि सम्मिलित हुए थे, जिनमें अधिकांश सदस्य पत्रकार, वकील और बुद्धिजीवी वर्ग से थे।
- 2. 'सुरक्षा वाल्व का सिद्धांत' (Safety Valve Theory), जिसके तहत यह तर्क दिया गया कि कांग्रेस की स्थापना ब्रिटिश साम्राज्य को असंतोष की संभावित हिंसक जन-क्रांति से बचाने के लिए एक 'सुरक्षा वाल्व' के रूप में की गई थी, सर्वप्रथम प्रसिद्ध राष्ट्रवादी नेता लाला लाजपत राय द्वारा उनके पत्र 'यंग इंडिया' में प्रतिपादित किया गया था।
- 3. प्रारंभिक नरमपंथी नेताओं (जैसे फिरोजशाह मेहता, दिनशा वाच्छा और सुरेन्द्रनाथ बनर्जी) ने 'दैनिक प्रेस' और 'संसदीय मंचों' का प्रभावी उपयोग करते हुए ब्रिटिश सरकार के समक्ष औपनिवेशिक स्वराज्य, विधान परिषदों के विस्तार और सिविल सेवा परीक्षाओं के एक साथ भारत तथा इंग्लैंड में आयोजन की मांग उठाई।
- 4. लॉर्ड डफरिन ने कांग्रेस की स्थापना का समर्थन करते हुए इसे 'सूक्ष्म अल्पसंख्यक वर्ग' (Microscopic Minority) की संस्था कहा था, जो संपूर्ण भारतीय जनता का प्रतिनिधित्व नहीं करती है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए कथनों में से कथन 1, 2 और 4 सही हैं, जबकि कथन 3 आंशिक रूप से त्रुटिपूर्ण है क्योंकि नरमपंथियों ने 'औपनिवेशिक स्वराज्य' (Dominion Status) की मांग उस समय आधिकारिक रूप से नहीं उठाई थी, बल्कि वे ब्रिटिश शासन के अंतर्गत क्रमिक प्रशासनिक सुधारों और स्वशासन के पक्षधर थे; औपनिवेशिक स्वराज्य की मांग बहुत बाद में आई। कांग्रेस की स्थापना और इसके शुरुआती राजनीतिक सफर के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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बहमनी साम्राज्य की प्रारंभिक राजधानी कहाँ थी?
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मौर्य साम्राज्य की केंद्रीय और प्रांतीय प्रशासनिक व्यवस्था के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कौटिल्य के 'अर्थशास्त्र' के अनुसार मौर्य केंद्रीय प्रशासन में अट्ठारह प्रमुख प्रशासनिक विभागों का उल्लेख मिलता है, जिन्हें 'तीर्थ' कहा जाता था और इन तीर्थों के अध्यक्षों को 'महामात्र' की संज्ञा दी जाती थी।
2. अशोक के शासनकाल में प्रांतीय प्रशासन के अंतर्गत साम्राज्य को पाँच प्रमुख प्रांतों में विभाजित किया गया था, जिनकी राजधानियाँ तक्षशिला, उज्जैन, सुवर्णगिरि, धौलि और तोशाली थीं, और इन प्रांतों का शासन सामान्यतः शाही परिवार के राजकुमारों (आर्यपुत्र या कुमार) द्वारा संचालित होता था।
3. मौर्यकालीन नगर प्रशासन की जानकारी हमें मेगास्थनीज की 'इंडिका' से मिलती है, जिसके अनुसार पाटलिपुत्र नगर का प्रशासन तीस सदस्यों की एक नगर परिषद द्वारा चलाया जाता था, जो छह समितियों (प्रत्येक में पाँच सदस्य) में विभाजित थी और विभिन्न कार्यों जैसे कर संग्रहण, शिल्पकारों के निरीक्षण तथा विदेशी नागरिकों की देखरेख का दायित्व संभालती थी।
4. अशोक के शिलालेखों में वर्णित 'रज्जुक' और 'प्रादेशिक' नामक अधिकारी केवल न्याय प्रशासन तक सीमित थे, और उनका भू-राजस्व निर्धारण तथा ग्रामीण जनता के कल्याण से कोई प्रत्यक्ष संबंध नहीं था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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लोदी शासक किस धर्म को मानने वाले थे?
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मुगल कालीन प्रशासनिक व्यवस्था और नीतियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अकबर द्वारा वर्ष 1582 में शुरू की गई 'दहसाला प्रणाली' (Todar Mal's Bandobast) के अंतर्गत पिछले दस वर्षों के उत्पादन और औसत मूल्यों का आकलन करके भू-राजस्व का निर्धारण किया जाता था।
2. जहांगीर के शासनकाल में मुगल चित्रकला अपने स्वर्णकाल पर पहुँची, जहाँ चित्रों में प्राकृतिक दृश्यों, पक्षियों और चित्रों के किनारों (Border) को सजाने की कला का अभूतपूर्व विकास हुआ।
3. शाहजहां के शासनकाल के अंतिम वर्षों में दारा शिकोह और औरंगजेब के बीच उत्तराधिकार को लेकर संघर्ष हुआ, जिसमें 'सामूगढ़ का युद्ध' निर्णायक साबित हुआ और इसी विजय के बाद औरंगजेब ने दिल्ली में अपना प्रथम राज्याभिषेक कराया।
4. औरंगजेब ने अपने शासनकाल के दौरान सिक्कों पर कलमा खुदवाने की प्रथा को समाप्त कर दिया तथा संगीत और चित्रकला को बढ़ावा देते हुए दरबार में चित्रकारों को शाही संरक्षण प्रदान करना जारी रखा।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उससे जुड़े सैन्य एवं रणनीतिक घटनाक्रमों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व संभालते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया तथा पेशवा बाजीराव द्वितीय के उत्तराधिकारी के रूप में अंग्रेजों के पेंशन संबंधी दावों को अस्वीकार करते हुए ब्रिटिश सेना के विरुद्ध सशस्त्र संघर्ष का आह्वान किया।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और रणनीतिकार थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर नाना साहब की पेंशन के मामले की पैरवी की थी और क्रीमिया युद्ध के दौरान ब्रिटिश सैन्य कमजोरियों का प्रत्यक्ष अवलोकन कर भारतीय विद्रोह की योजना को वैचारिक आधार दिया था।
3. कानपुर में ब्रिटिश समर्पण के पश्चात जनरल नील द्वारा भारतीय नागरिकों और विद्रोहियों पर ढाए गए अमानवीय अत्याचारों के प्रतिकार के रूप में 'बीबीघर नरसंहार' की घटना घटी, जिसके उपरांत तात्या टोपे ने कानपुर की रक्षा में असफल होने पर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ग्वालियर और कालपी के मोर्चे पर ब्रिटिश सेना के खिलाफ अत्यंत कुशल गोरिल्ला युद्ध का संचालन किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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