त्वरित लिंक्स
History of India
1 views
वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और नेताजी सुभाष चंद्र बोस द्वारा संचालित आज़ाद हिंद फौज (INA) के ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जब कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया गया था, तब उषा मेहता और अन्य समाजवादी नेताओं ने बंबई में गुप्त रूप से 'कांग्रेस रेडियो' (Secret Congress Radio) का संचालन किया, जिसके माध्यम से बर्लिन और टोक्यो से प्रसारित होने वाले सुभाष चंद्र बोस के संदेशों को भी देश के कोने-कोने तक पहुँचाया जाता था।
- 2. जर्मनी में हिटलर के साथ हुए मतभेदों और यूरोप में युद्ध की प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण सुभाष चंद्र बोस ने जर्मन पनडुब्बी U-180 की सहायता से खतरनाक समुद्री यात्रा पूरी की और मई 1943 में जापानी नियंत्रित दक्षिण-पूर्व एशिया (मादगासकर के तट से होते हुए सुमात्रा) पहुँचे, जहाँ उन्होंने रास बिहारी बोस से आज़ाद हिंद फौज की कमान अपने हाथ में ली।
- 3. आज़ाद हिंद फौज की एक विशिष्ट महिला इकाई — 'झांसी की रानी रेजीमेंट' — का गठन सिंगापुर में किया गया था, जिसका नेतृत्व डॉ. लक्ष्मी सहगल (कैप्टन लक्ष्मी) ने किया था, और इस रेजीमेंट ने इम्फाल-कोहिमा सैन्य अभियान के दौरान जापानी सेना के साथ मोर्चे पर प्रत्यक्ष युद्ध लड़ा था।
- 4. वर्ष 1945 के लाल किले के ऐतिहासिक मुकदमों (Red Fort Trials) के दौरान आज़ाद हिंद फौज के अधिकारियों (शाहनवाज खान, प्रेम सहगल और गुरदयाल सिंह ढिल्लों) के बचाव पक्ष के मुख्य वकीलों की समिति की अध्यक्षता भूलाभाई देसाई ने की थी, जिसमें तेज बहादुर सप्रू, जवाहरलाल नेहरू और कात्जू जैसे दिग्गज वकील भी शामिल थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
वर्ष 1942 के भारत छोड़ो आंदोलन और सुभाष चंद्र बोस द्वारा संचालित आज़ाद हिंद फ़ौज का भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अत्यंत महत्वपूर्ण स्थान है। उपर्युक्त चारों कथन पूर्णतः सत्य हैं। भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान जहाँ भूमिगत गतिविधियों और उषा मेहता के गुप्त रेडियो ने जनसंचार का कार्य किया, वहीं सुभाष चंद्र बोस ने जर्मनी से जापानी क्षेत्र में पहुँचकर आज़ाद हिंद सरकार और INA की बागडोर संभाली। महिलाओं की 'झांसी की रानी रेजीमेंट' का नेतृत्व कैप्टन लक्ष्मी (सहगल) ने किया था। इसके अतिरिक्त, 1945 के लाल किले के मुकदमे में बचाव पक्ष के वकीलों के मुख्य मंडल का नेतृत्व प्रख्यात विधिवेत्ता भूलाभाई देसाई ने किया था।
Related Questions
→
वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की भूमिका तथा उनकी रणनीतिक गतिविधियों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए नाना साहब ने स्वयं को पेशवा घोषित किया और ब्रिटिश जनरल सर ह्यू व्हीलर की सेना को आत्मसमर्पण करने के लिए विवश कर दिया, जिसके उपरांत बीबीघर हत्याकांड की घटना घटी।
2. तात्या टोपे ने नाना साहब के सेनापति के रूप में ग्वालियर की विद्रोही सेना का कुशल नेतृत्व किया तथा बाद में अंग्रेजों के विरुद्ध गोरिल्ला युद्ध का संचालन करते हुए मध्य भारत और राजस्थान के क्षेत्रों में ब्रिटिश सेना को कड़ी चुनौती दी।
3. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और दार्शनिक मार्गदर्शक थे, ने विद्रोह से पूर्व लंदन जाकर भारत के पूर्व पेशवा बाजीराव द्वितीय की पेंशन बहाली के लिए ब्रिटिश अधिकारियों और ब्रिटिश जनता के बीच पैरवी की थी।
4. कानपुर के पुनः पतन के बाद नाना साहब और अजीमुल्ला खां ने ब्रिटिश सेना के साथ शांति समझौता कर लिया था, जिसके तहत उन्हें आजीवन कानपुर में ही सुरक्षित रहने की अनुमति दे दी गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
मध्यकालीन भारत के भक्ति और सूफी आंदोलनों के वैचारिक विकास, प्रमुख संतों के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके ऐतिहासिक प्रभावों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वल्लभाचार्य ने 'शुद्धअद्वैतवाद' (Pure Non-dualism) के दर्शन का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार जगत माया का परिणाम नहीं बल्कि स्वयं ब्रह्म का वास्तविक रूपांतरण है, तथा उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की 'पुष्टिमार्ग' (Grace-based devotion) के माध्यम से उपासना पर विशेष बल दिया।
2. सूफी सिलसिले के अंतर्गत 'फिरदौसी सिलसिला' मुख्य रूप से बिहार क्षेत्र में अत्यधिक लोकप्रिय हुआ, और इस सिलसिले के सबसे प्रसिद्ध एवं सम्मानित संत शेख बदरुद्दीन समरकंदी थे, जिन्होंने स्थानीय जनता के बीच आध्यात्मिक और सामाजिक सुधारों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
3. मध्यकालीन संत मीराबाई ने राजसी सुखों का त्याग कर भगवान कृष्ण को अपना पति मानकर 'माधुर्य भाव' की भक्ति की, और उनके पद मुख्य रूप से मारवाड़ी और ब्रज भाषा में रचे गए हैं, जिन्हें राजस्थान और गुजरात के लोक-मानस में अत्यधिक प्रतिष्ठा प्राप्त हुई।
4. सूफी संतों में 'सुहरावर्दी सिलसिला' ने चिश्ती सिलसिले के ठीक विपरीत रुख अपनाते हुए शाही अनुदान, जागीरें और उच्च राजकीय पदों को सहर्ष स्वीकार किया, तथा उनके संतों का मानना था कि आध्यात्मिक उन्नति के लिए राज्य का संरक्षण और धन का होना आवश्यक है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक ढांचे, राजस्व प्रणालियों और सैन्य सुधारों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने सल्तनत काल में पहली बार सैनिकों को नकद वेतन देने की स्थायी व्यवस्था शुरू की और घोड़ों को दागने तथा सैनिकों के हुलिया दर्ज करने की प्रथा को अनिवार्य बनाया ताकि सैन्य भ्रष्टाचार पर अंकुश लगाया जा सके।
2. गयासुद्दीन तुगलक ने अपने पूर्ववर्ती सुल्तानों की कठोर राजस्व नीतियों में सुधार करते हुए 'राजस्व बटाई' या 'नस्क़' प्रणाली को अपनाया और कर की दर को घटाकर उपज का एक-तिहाई कर दिया, साथ ही किसानों के प्रति उदार दृष्टिकोण अपनाते हुए लगान में अत्यधिक वृद्धि न करने का निर्देश दिया।
3. मुहम्मद बिन तुगलक ने अपनी प्रशासनिक महत्वाकांक्षाओं के तहत दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि का प्रयोग किया था, और कृषि सुधारों के तहत 'अमीर-ए-कोही' नामक एक नए विभाग की स्थापना की जो सीधे तौर पर बंजर भूमि को उपजाऊ बनाने और किसानों को तकावी (अग्रिम) ऋण देने के लिए उत्तरदायी था।
4. फिरोज शाह तुगलक ने अपने शासनकाल में 'मदद-इ-माश' और इक्ता व्यवस्था को पूरी तरह से समाप्त करते हुए सभी जागीर भूमि को राज्य के प्रत्यक्ष नियंत्रण (खालसा) में ले लिया और सैनिकों को भूमि के बजाय केवल नकद वेतन देने की नीति को सख्ती से लागू किया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
→
पानीपत का द्वितीय युद्ध कब हुआ?
→
क्रांतिकारी आंदोलन के द्वितीय चरण (1924 के पश्चात) के दौरान गठित प्रमुख संगठनों और उनके संस्थापकों तथा विचारधारा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. वर्ष 1924 में कानपुर में सचिंद्रनाथ সান্যाल, रामप्रसाद बिस्मिल और चंद्रशेखर आजाद द्वारा 'हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HRA) की स्थापना की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य सोवियत संघ की तर्ज पर भारत में एक संघीय गणराज्य की स्थापना करना था।
2. भगत सिंह के नेतृत्व में वर्ष 1928 में दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में HRA का नाम बदलकर 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसिएशन' (HSRA) कर दिया गया, जिसमें समाजवाद को संगठन का आधिकारिक लक्ष्य बनाया गया।
3. भगवती चरण बोहरा द्वारा रचित प्रसिद्ध दस्तावेज 'बम का दर्शन' (Philosophy of the Bomb) में व्यक्तिगत आतंकवाद और राजनीतिक हत्याओं को पूर्णतः खारिज करते हुए केवल अहिंसक जन-संघर्ष को ही एकमात्र मार्ग बताया गया था।
4. वर्ष 1929 में लाहौर षड्यंत्र केस के तहत भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को ब्रिटिश राज के विरुद्ध युद्ध छेड़ने के आरोप में फाँसी की सजा सुनाई गई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
Log in
to add to quiz, bookmark, or report issues.