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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक दौर के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फर्रुख्शियर द्वारा जारी फरमान के तहत ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को बंगाल में 3,000 रुपये वार्षिक कर के बदले मुफ्त व्यापार करने का अधिकार मिला, जिसे कंपनी के अधिकारियों ने अपने निजी व्यापार पर मिलने वाले 'दस्तक' (Duty-free pass) का दुरुपयोग कर भारी वित्तीय क्षति पहुँचाई।
- 2. प्लासी के युद्ध (1757) के तुरंत बाद बंगाल के नवाब मीर जाफर ने अंग्रेजों को संतुष्ट करने के लिए चौबीस परगना जिले की जमींदारी अंग्रेजों को सौंप दी और कलकत्ता की किलेबंदी के लिए बड़ी धनराशि दी।
- 3. बक्सर के युद्ध (1764) की निर्णायक विजय के पश्चात अंग्रेजों ने अवध के नवाब शुजाउद्दोला के साथ इलाहाबाद की संधि (1765) की, जिसके तहत कड़ा और इलाहाबाद के जिले नवाब से लेकर मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय को सौंप दिए गए।
- 4. वर्ष 1765 में रॉबर्ट क्लाइव द्वारा बंगाल में द्वैध शासन (Dual Government) प्रणाली लागू की गई, जिसके अंतर्गत राजस्व संग्रह का अधिकार 'दीवानी' कंपनी के पास रहा जबकि प्रशासन और न्याय का दायित्व 'निजामत' नवाब के नियंत्रण में रखा गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 सही है क्योंकि फर्रुख्शियर के 1717 के फरमान द्वारा कंपनी को बंगाल में शुल्क मुक्त व्यापार की अनुमति मिली थी और 'दस्तक' का दुरुपयोग अधिकारियों द्वारा निजी व्यापार के लिए किया गया। कथन 2 सही है; प्लासी के युद्ध के बाद मीर जाफर ने अंग्रेजों को चौबीस परगना की जमींदारी दी थी। कथन 3 गलत है क्योंकि इलाहाबाद की प्रथम संधि के तहत कड़ा और इलाहाबाद के जिले अवध के नवाब से लेकर मुगल सम्राट शाह आलम द्वितीय को दिए गए थे, न कि नवाब को। इसके बारे में अधिक जानने के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं। कथन 4 सही है, रॉबर्ट क्लाइव ने 1765 में बंगाल में द्वैध शासन प्रणाली शुरू की थी जिसमें दीवानी अधिकार कंपनी के पास और निजामत नवाब के पास थी।
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गुप्तकालीन प्रशासन, अर्थव्यवस्था और भूमि प्रणाली के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. गुप्त काल में भू-राजस्व की दर सामान्यतः उपज का 1/6 से 1/4 भाग होती थी, जिसे 'भाग' या 'भोग' कहा जाता था, और भूमि की पैमाइश के लिए 'निवर्तन' और 'कुडव' जैसी माप इकाइयों का उल्लेख मिलता है।
2. इस काल में राजा द्वारा ब्राह्मणों, मंदिरों और बौद्ध विहारों को कर-मुक्त भूमि दान देने की प्रथा ('अग्रहार' व्यवस्था) में भारी वृद्धि हुई, जिसके परिणामस्वरूप गुप्त साम्राज्य में सामंती प्रवृत्तियों (Feudal Tendencies) का बीजारोपण हुआ।
3. गुप्त साम्राज्य की मुद्रा प्रणाली में सोने के सिक्कों को 'दीनार्क' और चांदी के सिक्कों को 'रूप्यक' कहा जाता था, तथा चंद्रगुप्त द्वितीय के पश्चिमी भारत के शक राजाओं को पराजित करने के उपरांत चांदी के सिक्कों का प्रचलन बड़े पैमाने पर शुरू हुआ था।
4. गुप्त प्रशासन में सर्वोच्च न्याय अधिकारी राजा होता था, और इस काल में पहली बार दीवानी (सिविल) और फौजदारी (आपराधिक) मुकदमों के बीच स्पष्ट कानूनी अंतर किया गया तथा चोरी और डकैती के मामलों के लिए 'धर्मस्थीय' और 'कंटकशोधन' न्यायालयों की स्थापना की गई।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस तथा इंडियन नेशनल आर्मी (INA) के संबंध में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित किए जाने के बाद, सुभाष चंद्र बोस ने इस आंदोलन का पूर्ण समर्थन किया और कांग्रेस के भीतर से ही गांधीजी के 'करो या मरो' (Do or Die) के नारे को अपनी आजाद हिंद फौज के सैनिकों का आधिकारिक युद्धघोष बना दिया था।
2. जब अगस्त 1942 के प्रारंभ में ब्रिटिश सरकार ने कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व को गिरफ्तार कर लिया, तब भूमिगत (Underground) कांग्रेस नेताओं ने 'रेडियो कांग्रेस' के माध्यम से आंदोलन का संचालन किया, जिसमें राम मनोहर लोहिया, अच्युत पटवर्धन और उषा मेहता जैसी प्रमुख हस्तियों ने गुप्त रूप से प्रसारण कर देशवासियों का मार्गदर्शन किया था।
3. सुभाष चंद्र बोस ने 1941 में भारत से गुप्त रूप से पलायन करने के पश्चात् बर्लिन में 'फ्री इंडिया सेंटर' की स्थापना की और 'इंडियन लीजन' का गठन किया, तथा जापान पहुँचकर रास बिहारी बोस से 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' और 'आजाद हिंद फौज' की बागडोर संभालते हुए सिंगापुर से भारत की अंतरिम सरकार ('आर हुकूमत-ए-आद हिंद') के गठन की घोषणा की थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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भारत छोड़ो आंदोलन (1942) और सुभाष चंद्र बोस से संबंधित निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. 8 अगस्त 1942 को बॉम्बे के गोवालिया टैंक मैदान में अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी द्वारा 'भारत छोड़ो' प्रस्ताव पारित किए जाने के तुरंत बाद, ब्रिटिश प्रशासन ने 'ऑपरेशन जीरो आवर' के तहत कांग्रेस के शीर्ष नेताओं को गिरफ्तार कर लिया, जिसके फलस्वरूप यह आंदोलन पूरी तरह नेतृत्वहीन हो गया और इसमें आम जनता की कोई सक्रिय भागीदारी नहीं देखी गई।
2. सुभाष चंद्र बोस ने वर्ष 1941 में जर्मनी पहुँचकर 'फ्री इंडिया सेंटर' (Free India Center) की स्थापना की और बर्लिन रेडियो से भारतीयों को संबोधित करते हुए पहली बार 'राष्ट्रपिता' (Father of the Nation) कहकर महात्मा गांधी को संबोधित किया था।
3. बैंकॉक सम्मेलन (1942) के उपरांत रास बिहारी बोस के प्रयासों से 'इंडियन इंडिपेंडेंस लीग' की स्थापना हुई, और वर्ष 1943 में सिंगापुर में सुभाष चंद्र बोस ने 'अस्थायी सरकार - आज़ाद हिंद सरकार' (Arzi Hukumat-e-Azad Hind) की स्थापना की घोषणा की।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के विद्रोह के उपरांत ब्रिटिश क्राउन द्वारा लाए गए 'भारत सरकार अधिनियम 1858' और क्वीन विक्टोरिया की ऐतिहासिक घोषणा के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. इस अधिनियम के द्वारा भारत का शासन कंपनी के हाथों से सीधे ब्रिटिश क्राउन को हस्तांतरित कर दिया गया, तथा भारत के गवर्नर-जनरल को 'वाइरॉय' (Viceroy) की अतिरिक्त उपाधि दी गई, जिसके तहत लॉर्ड कैनिंग भारत के पहले वाइसराय बने।
2. क्वीन विक्टोरिया की घोषणा (जिसे 'मैग्नाकार्टा' भी कहा जाता है) में स्पष्ट रूप से यह आश्वासन दिया गया था कि ब्रिटिश सरकार भारतीय रियाسतों के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप नहीं करेगी और उनके विलय की नीति (Doctrine of Lapse) को समाप्त किया जाता है।
3. इस घोषणा में धार्मिक सहिष्णुता और बिना किसी नस्लीय या धार्मिक भेदभाव के लोक सेवाओं में भारतीयों को उनकी योग्यता के आधार पर उच्च पदों पर नियुक्त करने का स्पष्ट वचन दिया गया था, जिसे ब्रिटिश प्रशासन ने शत-प्रतिशत ईमानदारी से तुरंत लागू भी कर दिया था।
4. सेना के पुनर्गठन के संदर्भ में 'पील आयोग' (Peel Commission) की सिफारिशों के आधार पर यूरोपीय सैनिकों का अनुपात बढ़ाया गया तथा बंगाल की सेना में जातियों और क्षेत्रों के संतुलन के तहत 'फूट डालो और राज करो' की नीति को संस्थागत रूप दिया गया।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में नाना साहब, तात्या टोपे और अजीमुल्ला खां की गतिविधियों तथा रणनीतिक प्रंबध के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. नाना साहब ने कानपुर में विद्रोह का नेतृत्व करते हुए स्वयं को पेशवा घोषित किया और पेशवा बाजीराव द्वितीय के दत्तक पुत्र होने के नाते ब्रिटिश सरकार द्वारा उनकी पेंशन और उपाधि रोके जाने के प्रतिशोध में ब्रिटिश सत्ता के विरुद्ध शस्त्र उठाए।
2. अजीमुल्ला खां, जो नाना साहब के मुख्य सलाहकार और निष्ठावान सहयोगी थे, ने कूटनीतिक और वैचारिक पक्ष संभालते हुए लंदन में पेंशन बहाली के लिए पैरवी की थी और बाद में तात्या टोपे के साथ मिलकर कानपुर की सैन्य रणनीति को अमलीजामा पहनाया।
3. तात्या टोपे ने कानपुर के पतन के पश्चात अपनी सैन्य टुकड़ी के साथ ग्वालियर की ओर प्रस्थान किया और वहाँ की सेना को अपने पक्ष में मिलाकर रानी लक्ष्मीबाई के साथ मिलकर ब्रिटिश सेना को कड़ी चुनौती दी।
4. कानपुर में पराजय के बाद नाना साहब अंग्रेजों के हाथों जीवित पकड़े गए और ब्रिटिश अदालत द्वारा मुकदमा चलाकर उन्हें सार्वजनिक रूप से कानपुर में ही फाँसी पर लटका दिया गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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