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History of India
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वर्ष 1913 में स्थापित 'गदर पार्टी' और उसके क्रांतिकारी क्रियाकलापों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. गदर पार्टी की स्थापना सैन फ्रांसिस्को (अमेरिका) में लाला हरदयाल के नेतृत्व में 'पैसिफिक कोस्ट हिंदुस्तान एसोसिएशन' के रूप में की गई थी, जिसका मुख्य उद्देश्य सशस्त्र क्रांति के माध्यम से भारत से ब्रिटिश औपवेशिक शासन को उखाड़ फेंकना था।
  2. 2. इस पार्टी द्वारा 'गदर' नामक साप्ताहिक समाचार पत्र का प्रकाशन कई भाषाओं (जैसे गुरुमुखी, उर्दू, गुजराती और पश्туो) में किया जाता था, जिसके प्रत्येक अंक के पहले पृष्ठ पर 'अंग्रेजी राज का कच्चा चिट्ठा' शीर्षक से ब्रिटिश नीतियों की पोल खोली जाती थी।
  3. 3. प्रथम विश्व युद्ध के आरंभ होने पर गदर पार्टी के अधिकांश क्रांतिकारियों ने विदेशों से भारत वापसी (कामागाटा मारू घटना की पृष्ठभूमि और अन्य माध्यमों से) की और सेना के भारतीय सिपाहियों में असंतोष फैलाकर 21 फरवरी 1915 को एक साथ सशस्त्र विद्रोह करने की योजना बनाई, जो मुखबिरी के कारण असफल हो गई।
  4. 4. गदर पार्टी के प्रमुख नेता सोहन सिंह भाकना और बाघा जतिन ने बंगाल में गुप्त रूप से क्रांतिकारियों का नेतृत्व किया था, जबकि रास बिहारी बोस ने गुप्त रूप से जापान पलायन करने से पूर्व पंजाब में इस सैन्य विद्रोह के षड्यंत्र का खुलकर विरोध किया था।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1, 2 और 3 पूर्णतः सत्य हैं। गदर पार्टी की स्थापना 1913 में सैन फ्रांसिस्को में लाला हरदयाल, सोहन सिंह भाकना और अन्य साथियों द्वारा की गई थी। इसका साप्ताहिक पत्र 'गदर' विभिन्न भाषाओं में छपता था और इसके मुख्य पृष्ठ पर 'अंग्रेजी राज का कच्चा चिट्ठा' प्रकाशित होता था। प्रथम विश्व युद्ध के दौरान 21 फरवरी 1915 को सशस्त्र विद्रोह की योजना बनाई गई थी जो असफल रही। कथन 4 असत्य है क्योंकि बाघा जतिन बंगाल के क्रांतिकारी थे (युगांतर पार्टी से जुड़े थे), और रास बिहारी बोस ने पंजाब के गदर षड्यंत्र का नेतृत्व किया था, विरोध नहीं। अधिक जानकारी के लिए देखें विकिपीडिया संदर्भ।
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