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History of India
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यूरोपीय कंपनियों के भारत आगमन और बंगाल में ब्रिटिश सत्ता की स्थापना के प्रारंभिक चरण के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. मुगल सम्राट जहांगीर ने वर्ष 1615 में ब्रिटिश सम्राट जेम्स प्रथम के राजदूत के रूप में भारत आए सर थॉमस रो को मुगल साम्राज्य के सभी भागों में व्यापार करने और कारखाना स्थापित करने का पूर्ण शाही फरमान प्रदान कर दिया था।
- 2. वर्ष 1717 में मुगल सम्राट फारुकसियर द्वारा ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को जारी किए गए 'सुनहरे फरमान' के तहत कंपनी को बंगाल में 3000 रुपये वार्षिक कर के बदले सीमा शुल्क मुक्त व्यापार करने का असीमित अधिकार मिल गया था, जिसे कंपनी के निजी व्यापारिक सामानों पर भी लागू कर दिया गया.
- 3. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना फ्रांसीसी मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से वर्ष 1664 में हुई थी, और उन्होंने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री वर्ष 1668 में सूरत में स्थापित की थी, जिसका नेतृत्व फ्रेंको कैरो ने किया था।
- 4. बंगाल के नवाब सिराजुद्दौला ने वर्ष 1756 में अंग्रेजों द्वारा कलकत्ता की किलेबंदी बिना अनुमति के किए जाने के कारण कलकत्ता पर आक्रमण कर उस पर अधिकार कर लिया था, जिसके परिणामस्वरूप 'कालहोल ट्रेजेडी' (ब्लैक होल की घटना) घटित हुई थी।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
कथन 1 गलत है, क्योंकि सर थॉमस रो को जहांगीर से पूरे मुगल साम्राज्य में व्यापार का पूर्ण शाही फरमान नहीं मिला था, बल्कि उन्हें केवल कुछ चुनिंदा स्थानों पर कारखाने स्थापित करने और व्यापार करने की सीमित शाही अनुमति (फरमान) प्राप्त हुई थी। कथन 2 सही है, 1717 के फारुकसियर के फरमान द्वारा बंगाल में 3000 रुपये वार्षिक के एवज में बिना चुंगी के व्यापार का अधिकार मिला। कथन 3 सही है, फ्रांसीसी कंपनी की स्थापना 1664 में कोल्बर्ट के द्वारा हुई और 1668 में सूरत में पहली फैक्ट्री खुली। कथन 4 भी सही है, सिराजुद्दौला द्वारा कलकत्ता पर अधिकार के दौरान ही ब्लैक होल त्रासदी (Black Hole Tragedy) घटित हुई थी। अधिक जानकारी के लिए विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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बौद्ध धर्म और जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों तथा उनके ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म का 'प्रतीत्यसमुत्पाद' (प्रतीतसमुत्पाद) का सिद्धांत यह प्रतिपादित करता है कि प्रत्येक घटना या वस्तु किसी कारण और प्रत्यय से उत्पन्न होती है (इदं प्रत्ययता), जबकि जैन धर्म का 'स्याद्वाद' (सप्तभंगीनय) यह मानता है कि ज्ञान सापेक्ष होता है और किसी भी वस्तु के बारे में एक साथ अंतिम या पूर्ण सत्य नहीं कहा जा सकता।
2. जैन धर्म में मोक्ष प्राप्ति के लिए महावीर स्वामी ने 'त्रिरत्न' (सम्यक् दर्शन, सम्यक् ज्ञान और सम्यक् चरित्र) के अतिरिक्त अत्यंत कठोर कायाकल्पन और संलेखना (संथारा) पर बल दिया, जबकि महात्मा बुद्ध ने मध्यम मार्ग (मज्झिम पतिपदा) का उपदेश देते हुए घोर तपस्या और भोग-विलासिता दोनों का समान रूप से त्याग करने पर जोर दिया।
3. बौद्ध संघ की प्रथम संगीति का आयोजन राजगृह की सप्तपर्णी गुफा में महाकस्सप की अध्यक्षता में हुआ था, जिसमें बुद्ध के उपदेशों को 'सुत्तपिटक' और 'विनयपिटक' के रूप में संकलित किया गया, जबकि जैन धर्म की प्रथम संगीति पाटलिपुत्र में स्थूलभद्र की अध्यक्षता में हुई जिसमें बारह अंगों का संकलन किया गया था।
4. आजीविक संप्रदाय के संस्थापक मख्खलि गोशाल ने 'नियतवाद' या 'भाग्यवादी' सिद्धांत (संसारशुद्धि) का प्रतिपादन किया, जिसके अनुसार मनुष्य का जीवन और उसका प्रत्येक कर्म पहले से ही नियत होता है और किसी भी मानवीय प्रयास से उसमें बदलाव नहीं किया जा सकता, और वे महावीर स्वामी के प्रारंभिक मित्र तथा शिष्य भी रहे थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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ब्रिटिश भारत में लागू की गई विभिन्न भू-राजस्व प्रणालियों — स्थाई बंदोबस्त, रयतवारी और महालवारी — के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल प्रेसिडेंसी में लॉर्ड कार्नवालिस द्वारा वर्ष 1793 में लागू किए गए 'स्थाई बंदोबस्त' के तहत जमींदारों को भूमि का स्थाई स्वामी बना दिया गया, किंतु 'सूर्ي अस्त कानून' (Sunset Law) के अंतर्गत यदि निश्चित तिथि तक सूर्यास्त से पहले भू-राजस्व जमा नहीं किया जाता था, तो उनकी जमींदारी नीलाम कर दी जाती थी।
2. थॉमस मुनरो द्वारा मुख्य रूप से मद्रास और बॉम्बे प्रेसिडेंसी में लागू 'रयतवारी व्यवस्था' में सरकार और कृषक (रयत) के बीच सीधा समझौता होता था, जिसमें किसानों को मालिकाना हक तो मिला, किंतु लगान की दरें अत्यधिक ऊँची थीं और सरकार को राजस्व समीक्षा के बाद हर 30 वर्ष पर कर दरों में वृद्धि करने का अधिकार प्राप्त था।
3. उत्तर-पश्चिम प्रांत, मध्य भारत और पंजाब के कुछ हिस्सों में हॉल्ट मैकेंज़ी द्वारा प्रवर्तित 'महालवारी व्यवस्था' के अंतर्गत भू-राजस्व निर्धारण के लिए व्यक्तिगत किसानों को नहीं, बल्कि पूरे ग्राम समुदाय या 'महाल' को एक इकाई माना जाता था, और इस प्रणाली में गाँव के प्रत्येक किसान की व्यक्तिगत जिम्मेदारी होती थी, जबकि सामूहिक या संयुक्त जिम्मेदारी का कोई प्रावधान नहीं था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-सा/से कथन सही है/हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह के दौरान कानपुर में विद्रोही ताकतों के रणनीतिक संचालन, कानपुर षड्यंत्र और उसके उपरांत तात्या टोपे तथा अजीमुल्ला खां की गतिविधियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. कानपुर में विद्रोह का आरंभ 5 जून 1857 को हुआ था, जहाँ नाना साहब ने नेतृत्व संभालते हुए ब्रिटिश सेना के जनरल व्हीलर की सेना को आत्मसमर्पण के लिए विवश किया, परंतु 'सती चौरा घाट' की दुर्भाग्यपूर्ण घटना के पश्चात ब्रिटिश कैदियों के साथ हुए नरसंहार के कारण इस अभियान की नैतिक छवि पर गंभीर प्रश्न उठे।
2. नाना साहब के मुख्य सलाहकार और रणनीतिकार अजीमुल्ला खां ने केवल आंतरिक सैन्य प्रबंधन ही नहीं संभाला, बल्कि उन्होंने विद्रोह की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के तहत उस्मानी साम्राज्य (तुर्की) के सुल्तान से संपर्क साधने और फ्रांस की यात्रा कर ब्रिटिश विरोधी समर्थन जुटाने का असफल प्रयास भी किया था।
3. कानपुर के पतन के बाद तात्या टोपे ने नाना साहब की अनुपस्थिति में कानपुर की कमान अपने हाथ में ली और ग्वालियर की ओर प्रस्थान करने से पूर्व बिठूर के निकट 'कानपुर के द्वितीय युद्ध' में ब्रिटिश जनरल विंडहाम की सेना को पराजित कर कानपुर पर अस्थायी रूप से पुनः अधिकार कर लिया था।
4. तात्या टोपे को अंग्रेजों के विरुद्ध अपने अंतिम दिनों में किसी भी भारतीय शासक या जागीरदार का सहयोग नहीं मिला, और वे पूरी तरह अकेले ही नेपाल की तराई में अंग्रेजों से संघर्ष करते हुए वीरगति को प्राप्त हुए थे।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1905 के बंगाल विभाजन और इसके विरोध में उपजे स्वदेशी आंदोलन के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बंगाल विभाजन के निर्णय की आधिकारिक घोषणा 20 जुलाई 1905 को लॉर्ड कर्जन द्वारा की गई थी, जिसके विरोध में 7 अगस्त 1905 को कलकत्ता के टाउन हॉल में ऐतिहासिक बैठक में स्वदेशी आंदोलन की औपचारिक शुरुआत की गई।
2. 16 अक्टूबर 1905 को जब बंगाल विभाजन प्रभावी हुआ, उस दिन को पूरे बंगाल में 'शोक दिवस' के रूप में मनाया गया और रविंद्रनाथ ठाकुर के आह्वान पर लोगों ने एक-दूसरे की कलाई पर राखी बांधकर 'राखी बंधन दिवस' मनाया।
3. स्वदेशी आंदोलन के दौरान आर्थिक बहिष्कार और राष्ट्रीय शिक्षा पर विशेष बल दिया गया, जिसके तहत कलकत्ता में 'राष्ट्रीय शिक्षा परिषद' (National Council of Education) की स्थापना की गई और इसके प्रथम अध्यक्ष रबींद्रनाथ ठाकुर को बनाया गया था।
4. इस आंदोलन के दौरान उग्रवादी नेताओं के प्रभाव से पारंपरिक भारतीय मेलों, लोक कलाओं और स्वदेशी उत्पादों के प्रचार-प्रसार के साथ-साथ सांस्कृतिक राष्ट्रवाद को भी अभूतपूर्व बढ़ावा मिला था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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वर्ष 1857 के महान विद्रोह की असफलता और इसके नेतृत्व की सीमाओं के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. विद्रोही नेतृत्व के पास औपनिवेशिक शासन के पतन के उपरांत एक वैकल्पिक अखिल भारतीय राजनीतिक ढांचा या भविष्य की शासन प्रणाली का कोई सुसंगत विजन नहीं था।
2. भारत के अधिकांश बड़े और संभ्रांत देसी रियासतों के शासकों, बड़े जमींदारों और आधुनिक रूप से शिक्षित मध्यम वर्ग ने ब्रिटिश सत्ता के प्रति वफादारी दिखाते हुए विद्रोह का सक्रिय विरोध या उससे दूरी बनाए रखी।
3. विद्रोही टुकड़ियों के बीच केंद्रीयकृत कमान, सुदृढ़ सैन्य समन्वय और पारस्परिकता का अभाव था; नाना साहब, तात्या टोपे और रानी लक्ष्मीबाई जैसे उत्कृष्ट स्थानीय नायक अपने सीमित क्षेत्रों में तो लड़े, किंतु वे किसी साझा एकीकृत रणनीति के तहत एक साथ तालमेल बिठाने में असमर्थ रहे।
4. अंग्रेजों के पास आधुनिक तार (टेलीग्राफ), रेल नेटवर्क और सुदृढ़ नौसैनिक सहायता जैसी उन्नत सैन्य व संचार प्रणालियाँ थीं, जिनका मुकाबला करने के लिए विद्रोहियों के पास न तो पर्याप्त रसद थी और न ही समान तकनीकी क्षमता।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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