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History of India
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वर्ष 1857 के विद्रोह की प्रकृति और उसके वैचारिक आकलन के संदर्भ में, निम्नलिखित में से किस ब्रिटिश इतिहासकार या समकालीन विचारक ने यह मत व्यक्त किया था कि 'यह विद्रोह न तो राष्ट्रीय था, न ही स्वतंत्रता संग्राम था और न ही प्रथम स्वतंत्रता संग्राम था'?

Detailed Explanation

प्रसिद्ध भारतीय इतिहासकार डॉ. रमेश चंद्र मजूमदार (R. C. Majumdar) ने अपनी प्रसिद्ध पुस्तक 'The Sepoy Mutiny and the Revolt of 1857' में यह स्पष्ट रूप से कहा था कि 1857 का तथाकथित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम न तो 'प्रथम', न ही 'राष्ट्रीय' और न ही 'स्वतंत्रता संग्राम' था। इसके विपरीत, वी. डी. सावरकर ने इसे अपनी पुस्तक 'The Indian War of Independence 1857' में सुनियोजित प्रथम राष्ट्रीय स्वतंत्रता संग्राम बताया था। 1857 के विद्रोह के विभिन्न पहलुओं के बारे में अधिक जानने के लिए आप विकिपीडिया संदर्भ देख सकते हैं।
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→ सत्रहवीं शताब्दी के शुरुआती दशकों में भारत में यूरोपीय व्यापारिक कंपनियों के प्रवेश, उनकी बस्तियों की स्थापना तथा स्थानीय शासकों के साथ उनके संबंधों के संदर्भ में निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. ब्रिटिश ईस्ट इंडिया कंपनी को भारत में व्यापार करने का अधिकार प्रदान करने वाला पहला शाही फरमान मुगल सम्राट जहाँगीर द्वारा विलियम हॉकिंस को नहीं, बल्कि बाद में राजदूत के रूप में आए सर थॉमस रो के प्रयासों से वर्ष 1618 में प्राप्त हुआ था, हालांकि उन्होंने 1613 में ही सूरत में अपनी पहली स्थायी फैक्ट्री स्थापित कर ली थी। 2. डच ईस्ट इंडिया कंपनी (VOC) ने अपनी पहली व्यावसायिक कोठी वर्ष 1605 में कोरोमंडल तट पर स्थित मसूलीपट्टम में स्थापित की थी, और उन्होंने भारतीय उपमहाद्वीप से मसालों के व्यापार के बजाय मुख्य रूप से भारतीय वस्त्रों (विशेषकर सूती कपड़ों) को दक्षिण-पूर्व एशिया के बाजारों में निर्यात करने पर सर्वाधिक जोर दिया था। 3. फ्रांसीसी ईस्ट इंडिया कंपनी की स्थापना लुई चौदहवें के मंत्री कोल्बर्ट के प्रयासों से वर्ष 1664 में हुई थी, और फ्रांसीसियों ने भारत में अपनी पहली फैक्ट्री फ्रैंक कैरो के नेतृत्व में वर्ष 1668 में सूरत में तथा दूसरी फैक्ट्री वर्ष 1669 में मसूलीपट्टम में स्थापित की थी। 4. पुर्तगालियों द्वारा बंगाल की खाड़ी में हुगली को अपने मुख्य व्यापारिक केंद्र के रूप में विकसित किया गया था, किंतु वर्ष 1632 में मुगल बादशाह शाहजहाँ के आदेश पर बंगाल के सूबेदार कासिम खान ने हुगली पर आक्रमण कर पुर्तगालियों को बुरी तरह पराजित किया और उनके हजारों कैदियों को आगरा भेज दिया था। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं? 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→ मध्यकालीन भारत के इतिहास में भक्ति और सूफी आंदोलन के दार्शनिक परिप्रेक्ष्य और उनके विशिष्ट संप्रदायों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए: 1. दक्षिण भारत के अलवार (विष्णु भक्त) और नयनार (शिव भक्त) संतों ने भक्ति आंदोलन की नींव रखी, और इन्होंने जातिगत कठोरताओं का विरोध करते हुए तमिल भाषा में भजनों (जैसे 'नालायिर दिव्य प्रबंधम') के माध्यम से लोकप्रिय भक्ति का प्रसार किया। 2. उत्तर भारत में भक्ति आंदोलन को Ramananda द्वारा प्रचारित किया गया, जिन्होंने जाति और लिंग के भेदभाव को दरकिनार करते हुए समाज के सभी वर्गों को अपने शिष्य-मंडल में शामिल किया, जिनमें कबीर और रैदास जैसे संत प्रमुख थे। 3. सूफी मत के 'चिश्ती सिलसिला' के संस्थापकों में शामिल ख्वाजा मोइनुद्दीन चिश्ती ने भारत में इस सिलसिले की नींव रखी, और इस सिलसिले के संतों ने राज्य के संरक्षण, शाही दरबारों में उच्च पदों को स्वीकार करने और संगीत (समां) का कड़ा विरोध किया। 4. महान सूफी संत निजामुद्दीन औलिया के आध्यात्मिक प्रभाव और उदार दृष्टिकोण के कारण उन्हें 'महबूब-ए-इलाही' (ईश्वर के प्रेमी) के रूप में जाना गया, और उनके शिष्य अमीर खुसरो ने भारतीय संगीत और भाषा के विकास में अभूतपूर्व योगदान दिया। उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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