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History of India
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वर्धन राजवंश एवं दक्षिण भारत के राजवंशों (चोल, पल्लव, चालुक्य) की राजनीतिक, प्रशासनिक और सांस्कृतिक उपलब्धियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:

  1. 1. हर्षवर्धन के शासनकाल के दौरान आयोजित 'कन्नौज सभा' का मुख्य उद्देश्य महायान बौद्ध धर्म के सिद्धांतों का प्रचार करना और चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में एक भव्य उत्सव आयोजित करना था, जिसमें बीस विभिन्न देशों के राजाओं और विभिन्न संप्रदायों के विद्वानों ने भाग लिया था।
  2. 2. पल्लव शासक महेंद्रवमन् प्रथम द्वारा रचित संस्कृत प्रहसन 'मत्तविलास प्रहसन' में बौद्ध और जैन भिक्षुओं के आचरण तथा उस समय की सामाजिक एवं धार्मिक रूढ़ियों पर हास्यपूर्ण व्यंग्य किया गया है, और महेंद्रवमन् अपने प्रारंभिक जीवन में जैन धर्म के अनुयायी थे, जिन्हें बाद में शैव संत अप्पर के प्रभाव से शैव धर्म अपना लिया।
  3. 3. बादामी के चालुक्य राजवंश के महान शासक पुलकेशिन द्वितीय ने नर्मदा नदी के तट पर हर्षवर्धन की उत्तर भारत विजय के रथ को रोककर उसे पराजित किया था, जिसका विस्तृत और जीवंत विवरण बाणभट्ट द्वारा रचित 'हर्षचरित' में खुलकर मिलता है।
  4. 4. तंजावुर के प्रसिद्ध 'बृहदेश्वर या राजराजेश्वर मंदिर' का निर्माण चोल सम्राट राजराज प्रथम द्वारा करवाया गया था, जो द्रविड़ वास्तुकला की उत्कृष्ट मिसाल है और इसमें ग्रेनाइट पत्थरों का प्रयोग किया गया है।

उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?

Detailed Explanation

कथन 1 सही है: हर्षवर्धन ने चीनी यात्री ह्वेनसांग के सम्मान में कन्नौज में एक भव्य धर्मसभा का आयोजन किया था, जिसका उद्देश्य महायान धर्म की श्रेष्ठता प्रतिपादित करना था। कथन 2 सही है: पल्लव नरेश महेंद्रवमन् प्रथम ने 'मत्तविलास प्रहसन' की रचना की; वे पहले जैन मत के अनुयायी थे किंतु शैव संत अप्पर के संपर्क में आने के बाद शैव बन गए। कथन 3 गलत है: पुलकेशिन द्वितीय द्वारा हर्षवर्धन को नर्मदा तट पर पराजित किए जाने का ऐतिहासिक उल्लेख बाणभट्ट के 'हर्षचरित' में नहीं, बल्कि रवि कीर्ति द्वारा रचित **विकिपीडिया संदर्भ** (ऐहोल प्रशस्ति) में मिलता है। बाणभट्ट ने अपनी पुस्तक में इस पराजय का कोई उल्लेख नहीं किया है। कथन 4 सही है: तंजावुर का बृहदेश्वर मंदिर राजराज प्रथम द्वारा निर्मित द्रविड़ वास्तुकला का सर्वोत्तम उदाहरण है।
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