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History of India
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दक्षिण भारत के प्राचीन राजवंशों और उनकी सांस्कृतिक एवं स्थापत्य उपलब्धियों के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
- 1. पल्लव वंश के शासक नरसिंहवमन् प्रथम (महामल्ल) ने महाबलीपुरम (मामलपुरम) में एक ही विशाल चट्टान को काटकर प्रसिद्ध 'रथ मंदिरों' (सप्त पगोडा) का निर्माण करवाया था, और उसके शासनकाल के दौरान ही चीनी बौद्ध यात्री ह्वेनसांग ने पल्लव राजधानी कांचीपुरम की यात्रा की थी।
- 2. बादामी के चालुक्य राजवंश के अधीन निर्मित 'विरुपाक्ष मंदिर' (पट्टदकल) का निर्माण विक्रमादित्य द्वितीय की रानी लोकमहादेवी द्वारा करवाया गया था, जो द्रविड़ शैली की वास्तुकला से अत्यधिक प्रभावित है और इसमें कांची के कैलाशनाथ मंदिर की शैली का स्पष्ट प्रभाव झलकता है।
- 3. राष्ट्रकूट वंश के शासक कृष्ण प्रथम ने एलोरा में प्रसिद्ध 'कैलाश मंदिर' (गुफा संख्या 16) का निर्माण करवाया था, जो द्रविड़ वास्तुकला का एक अद्भुत आश्चर्य है और इसे एक ही चट्टान को ऊपर से नीचे की ओर (Monolithic rock-cut architecture) तराशकर बनाया गया है।
- 4. चोल साम्राज्य की स्थानीय स्वशासन प्रणाली (ग्राम प्रशासन) का सबसे प्रामाणिक विवरण 'उत्तरामेरूर अभिलेख' से मिलता है, जो परांतक प्रथम के शासनकाल से संबंधित है और इसमें ग्राम सभा (सभा या महासभा) के सदस्यों के चयन के लिए 'कुरावै' (लॉटरी) पद्धति का विस्तृत नियम दिया गया है।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
✓ Correct! Well done.
✗ Not quite — the correct answer is highlighted above.
Detailed Explanation
दिए गए सभी कथन पूर्णतः सत्य हैं। पल्लव नरेश नरसिंहवमन् प्रथम ने महाबलीपुरम के रथ मंदिरों का निर्माण कराया था। बादामी के चालुक्य शासक विक्रमादित्य द्वितीय की रानी लोकमहादेवी द्वारा पट्टदकल का विरुपाक्ष मंदिर बनवाया गया था। राष्ट्रकूट राजा कृष्ण प्रथम ने एलोरा का एकात्मकमय (Monolithic) कैलाश मंदिर बनवाया। चोल राजवंश के उत्तरमेरूर अभिलेख में ग्राम स्वायत्तता और लॉटरी प्रणाली (कुडवोलई पद्धति) का विस्तृत उल्लेख मिलता है। इस संदर्भ में विकिपीडिया संदर्भ से अधिक जानकारी प्राप्त की जा सकती है।
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दिल्ली सल्तनत के प्रशासनिक सुधारों और आर्थिक नीतियों के संदर्भ में, अलाउद्दीन खिलजी और मुहम्मद बिन तुगलक के शासनकाल की निम्नलिखित विशेषताओं पर विचार कीजिए:
1. अलाउद्दीन खिलजी ने अपने साम्राज्य में कृषि योग्य भूमि की पैमाइश (विश्वा) अनिवार्य कर दी थी और बिस्वा के आधार पर लगान निर्धारण करते हुए खाद्यान्न पर 'खराज' की दर को बढ़ाकर उपज का आधा (50%) कर दिया था, साथ ही 'घरी कर' (घरों पर) और 'चराई कर' (मवेशियों पर) भी वसूलना शुरू किया था।
2. मुहम्मद बिन तुगलक ने दोआब क्षेत्र में कर वृद्धि के अपने निर्णय के समय क्षेत्रीय अकाल और गंभीर सूखे की स्थिति का अनुमान लगाने में पूरी तरह विफल रहा, जिसके कारण किसानों ने विद्रोह कर दिया और बाद में स्थिति से निपटने के लिए उसने 'दीवान-ए-कोही' नामक एक नए कृषि विभाग की स्थापना की।
3. अलाउद्दीन खिलजी द्वारा स्थापित 'बाजार नियंत्रण प्रणाली' का मुख्य उद्देश्य गरीब और जरूरतमंद किसानों के कल्याण को बढ़ावा देना था, ताकि ग्रामीण भारत में आय की असमानता को समाप्त किया जा सके।
4. मुहम्मद बिन तुगलक द्वारा चलाई गई 'सांकेतिक मुद्रा' (Token Currency) योजना की असफलता का प्रमुख कारण तांबे और कांसे के सिक्कों के प्रचलन के दौरान बड़े पैमाने पर जाली सिक्कों (Counterfeit Coins) का निर्माण रोकना और शाही टकसाल पर राज्य का कड़ा नियंत्रण बनाए रखना था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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बौद्ध धर्म एवं जैन धर्म के दार्शनिक सिद्धांतों और उनके ऐतिहासिक विकास के संदर्भ में, निम्नलिखित कथनों पर विचार कीजिए:
1. बौद्ध धर्म के शून्यवाद (माध्यमिक दर्शन) के प्रणेता आचार्य नागार्जुन थे, जिन्होंने यह प्रतिपादन किया कि सभी वस्तुएं और धर्म 'प्रतीत्यसमुत्पाद' के कारण स्वभाव से शून्य (निःस्वभाव) हैं, जबकि जैन धर्म के 'स्यादवाद' (अनेकांतवाद) के अनुसार किसी भी वस्तु के सत्य का निर्धारण सात अलग-अलग दृष्टिकोणों (सप्तभंगी नय) से किया जाता है।
2. जैन धर्म के श्वेतांबर संप्रदाय के अनुसार स्त्रियां इसी जन्म में मोक्ष (निर्वाण) प्राप्त कर सकती हैं और उनके 19वें तीर्थंकर मल्लिनाथ एक स्त्री थे, जबकि दिगंबर संप्रदाय इस तथ्य का पूर्ण खंडन करता है कि कोई स्त्री मोक्ष प्राप्त कर सकती है।
3. बौद्ध धर्म की महायान शाखा में भविष्य के बुद्ध के रूप में 'मैत्रय' (Maitreya) की कल्पना की गई है, जो इस कल्प के अंतिम बुद्ध होंगे, जबकि जैन धर्म में प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव (आदिनाथ) का उल्लेख ऋग्वेद में भी प्राप्त होता है।
4. बौद्ध संगीतों के क्रम में, चतुर्थ बौद्ध संगीति कनिष्क के शासनकाल में कुण्डलनवन (कश्मीर) में हुई थी, जिसकी अध्यक्षता वसुमित्र ने की थी और इसी संगीति में बौद्ध धर्म स्पष्ट रूप से हीनयान और महायान संप्रदायों में विभाजित हो गया था।
उपर्युक्त कथनों में से कौन-से कथन सही हैं?
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